UP 2027 से पहले सपा का चंद्रशेखर आजाद को न्योता, हरेंद्र मलिक बोले — भाजपा हराने के लिए साथ आएं
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद हरेंद्र मलिक ने 25 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद से सपा के साथ आकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विरुद्ध संयुक्त मोर्चा बनाने का खुला आग्रह किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ तेज होने के बीच यह बयान राजनीतिक गठबंधन की जटिल बिसात पर एक नई चाल के रूप में देखा जा रहा है।
मलिक का मुख्य तर्क
मलिक ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सीधा मुकाबला सपा और BJP के बीच है। उनके अनुसार, जो मतदाता BJP को सत्ता से हटाना चाहते हैं, वे स्वाभाविक रूप से समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ेंगे, क्योंकि सपा कमजोर और वंचित वर्गों की लड़ाई लड़ती है। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद से आग्रह करते हुए कहा, 'हमारा उनसे अनुरोध है कि वह आएं और समाजवादी पार्टी के हाथ को मजबूत करें।'
वोट काटने की आशंका पर सीधी बात
मलिक ने संकेत दिया कि सपा की चिंता यह है कि छोटे दल विपक्षी मत विभाजित कर BJP को फायदा पहुँचाते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर उन्हें वोट काटने का डर है तो वोट ना काटें — यह ठीक बात कह रहे हैं। उन्हें प्रयास करना चाहिए कि वह वोट ना काटें।' यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से आजाद समाज पार्टी की संभावित स्वतंत्र उम्मीदवारी की रणनीति पर निशाना थी।
MLC चुनाव विवाद और चुनाव आयोग पर सवाल
इसी दौरान मलिक ने स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनावों में कथित अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची से उनका और विधायक पंकज सहित कई अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम हटाए गए थे, जिसके कारण वे अपने घर से जाकर मत नहीं डाल सके। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान अपना वोट डालने के बाद चले गए, जबकि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सांसद और विधायकों को बूथ पर नहीं जाना चाहिए। उनके अनुसार जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सही काम किया, परंतु अपर जिला अधिकारी और एक इंस्पेक्टर का व्यवहार अनुचित रहा। मलिक ने चेतावनी दी कि वे इस मामले में किसी को नहीं छोड़ेंगे।
चंद्रशेखर आजाद का रुख
गौरतलब है कि शनिवार को आजाद समाज पार्टी ने मीरापुर विधानसभा क्षेत्र के गाँव मोरना में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया था। इस अवसर पर चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया से कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बारे में उनकी राय स्पष्ट है — वह हार जाना पसंद करेंगे, लेकिन मिलकर BJP को हराना पसंद नहीं करेंगे। यह बयान साफ संकेत करता है कि आजाद समाज पार्टी फिलहाल सपा के साथ गठबंधन के मूड में नहीं है।
आगे की राजनीतिक संभावनाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब UP 2027 के लिए सभी दल अपनी सामाजिक गोलबंदी को धार देने में लगे हैं। दलित-बहुजन और पिछड़े वर्ग के वोटों पर सपा और आजाद समाज पार्टी दोनों की नजर है। गठबंधन होगा या नहीं, यह अगले कुछ महीनों की राजनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।