चंद्रशेखर आजाद का विपक्ष पर बड़ा हमला: 'भाजपा नहीं, नई दलित लीडरशिप से डरते हैं ये लोग'
सारांश
मुख्य बातें
आजाद समाज पार्टी (ASP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 3 सितंबर 2026 को जौनपुर में इंडिया गठबंधन और समूचे विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) से नहीं, बल्कि दलित-पिछड़े वर्ग से उभरने वाली नई और मज़बूत नेतृत्व से भय लगता है। उन्होंने साथ ही 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति का ऐलान करते हुए स्पष्ट किया कि ASP इस बार अकेले दम पर पूरे प्रदेश में चुनावी मैदान में उतरेगी।
2027 के लिए चुनावी तैयारी का ऐलान
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पार्टी ने 45 ज़िला प्रभारियों की घोषणा कर दी है और शीघ्र ही सैकड़ों और नाम सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि संगठन के कार्यकर्ताओं को पहले अपनी लोकप्रियता साबित करने का काम सौंपा गया था और उसकी रिपोर्ट 20 तारीख तक जमा होनी है। रिपोर्ट के आधार पर नए प्रभारियों की सूची जारी की जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी उस तरह से नहीं लड़ पाई जैसा चाहिए था, और इस बार उसी कमज़ोरी को दूर करने पर पूरा ज़ोर है।
विपक्षी गठबंधनों की विफलता पर सवाल
आजाद ने 2017 और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों बार विपक्षी गठबंधन बने, लेकिन दोनों बार BJP को हराने में नाकाम रहे। उनके अनुसार, लोकसभा चुनाव में भी विपक्ष बुरी तरह पराजित हुआ। उन्होंने तर्क दिया कि BJP के वोट शेयर को काटने के लिए एक व्यापक और समावेशी गठबंधन की ज़रूरत है, जो अब तक नहीं बन सका।
विपक्ष पर सबसे तीखा आरोप
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जो दल BJP को हराने का दावा करते हैं, वे वास्तव में ऐसा चाहते ही नहीं। उन्होंने नगीना लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि तथाकथित विपक्षी नेता वहाँ दो-दो बार बड़ी रैलियाँ करने पहुँचे — जो यह साबित करता है कि उनकी असली मंशा BJP को नहीं, बल्कि कमज़ोर वर्गों की उभरती नेतृत्व को रोकना है। उनके शब्दों में, 'बहुत सारे लोग तो इसी बात को सोचकर रात को सो भी नहीं पाते।'
आंदोलन और जवाबदेही का दावा
आजाद ने यह भी याद दिलाया कि जब जंतर-मंतर पर युवा छात्र सड़कों पर बैठे थे, तब वे तीन रातें बारिश में उनके साथ डटे रहे। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास का घेराव भी हुआ — एक ऐसा कदम जो पिछले 12 वर्षों में पहले नहीं देखा गया। यह बयान उन्होंने विपक्ष की निष्क्रियता के विपरीत अपनी सक्रियता को रेखांकित करने के लिए दिया। आने वाले महीनों में ASP की संगठनात्मक सूची के विस्तार और चुनावी रणनीति के स्पष्ट होने के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी अकेले दम पर 2027 में कोई निर्णायक भूमिका निभा पाती है।