उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-ड्रायफ्रूट व रजत मुकुट से भव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 8 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी में एकत्रित हुए। बाबा को राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया और भांग, ड्रायफ्रूट, पुष्प एवं रजत मुकुट-चंद्र से उनका शृंगार किया गया।
कपाट खुलने का क्रम और विधि-विधान
गुरुवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात् ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। कपाट खुलते ही जलाभिषेक संपन्न हुआ और तदुपरांत दूध, दही, घी, शहद एवं फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया।
भस्म आरती का विशेष शृंगार
पूजा के क्रम में सर्वप्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की धुन के मध्य भस्म आरती का आयोजन हुआ। बाबा महाकाल को भांग, ड्रायफ्रूट, सुगंधित पुष्पों और रजत मुकुट-चंद्र से राजा स्वरूप में अलंकृत किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात् बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस आरती में सम्मिलित होने के लिए उज्जैन पधारते हैं।
श्रद्धालुओं की अपार भीड़
दिव्य शृंगार और भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध हो गए थे। आरती के बाद पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।
गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन की धार्मिक पहचान का केंद्र है। आने वाले पर्वों पर भी इसी प्रकार भव्य आयोजन अपेक्षित हैं।