13 अक्टूबर 2026
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उज्जैन: बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार, आश्विन तृतीया पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

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उज्जैन: बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार, आश्विन तृतीया पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन तृतीया पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती सम्पन्न हुई और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 13 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष तृतीया पर भस्म आरती सम्पन्न हुई।
बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया और पंचामृत अभिषेक की विधि पूरी की गई।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार रात से ही दर्शन के लिए कतारबद्ध थे।
मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 13 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती सम्पन्न हुई। इस अलौकिक धार्मिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए, जिनमें से अनेक सोमवार की रात से ही कतारों में खड़े थे।

मुख्य घटनाक्रम: भोर से शुरू हुआ पूजन विधान

मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक सम्पन्न हुआ।

पूजन की प्रथम विधि में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके उपरांत कपूर आरती की गई और बाबा ने मुकुट धारण किया। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मनोहर ध्वनियों के बीच भस्म आरती का क्रम पूरा हुआ।

राजा स्वरूप में शृंगार: भक्तों के लिए अलौकिक दर्शन

पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष शृंगार किया गया। यह शृंगार मंदिर की परंपराओं के अनुरूप अत्यंत भव्य रूप से सम्पन्न किया गया। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के उपरांत श्रद्धालुओं को बाबा के साक्षात दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सम्पूर्ण मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा

परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह आस्था ही हर वर्ष असंख्य श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन नगरी तक खींच लाती है।

आम जनता पर असर: आस्था का जनसैलाब

गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। भस्म आरती में भाग लेने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु पूर्व पंजीकरण करवाकर इस अनुष्ठान का हिस्सा बनते हैं। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से निरंतर गुंजायमान रहा, जिसने भक्तिमय वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया। आने वाले पर्व और तिथियों पर भी इसी प्रकार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुँचने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है, जो देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब मंदिर परिसर के विकास और श्रद्धालु प्रबंधन को लेकर बड़े प्रयास किए गए हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के नाते महाकालेश्वर की धार्मिक महत्ता असीम है, और प्रतिदिन की भस्म आरती इस आस्था की निरंतरता का प्रतीक है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का एक प्राचीन और पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के पश्चात भगवान निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
13 अक्टूबर 2026 को भस्म आरती में क्या विशेष था?
13 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष शृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक के बाद मुकुट धारण कराया गया और महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती सम्पन्न हुई।
महानिर्वाणी अखाड़ा भस्म आरती में क्या भूमिका निभाता है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे मंदिर के धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में कैसे शामिल हो सकते हैं?
भस्म आरती में भाग लेने के इच्छुक श्रद्धालुओं को पूर्व पंजीकरण करवाना होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर इस अलौकिक दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
श्री महाकालेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन में स्थित है। यह मंदिर देशभर के शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और आस्था का प्रमुख केंद्र है।
राष्ट्र प्रेस
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