3 नवंबर 2026
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उज्जैन: बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार, रजत चंद्र-त्रिशूल और ड्रायफ्रूट से हुआ अभिषेक

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उज्जैन: बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार, रजत चंद्र-त्रिशूल और ड्रायफ्रूट से हुआ अभिषेक

सारांश

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को बाबा महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट से राजा स्वरूप शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण के बाद संपन्न हुई भव्य आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए पहुँचे।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 3 नवंबर 2026 को भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट से राजा स्वरूप शृंगार किया गया।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) से अभिषेक किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाबा को भस्म अर्पित की गई।
दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन लाभ के लिए उपस्थित रहे। मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

कपाट खुलने से आरती तक का क्रम

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात् ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और उसके बाद दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर की आरती के उपरांत बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया। तत्पश्चात् झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मधुर ध्वनि में भस्म आरती की गई।

राजा स्वरूप शृंगार की विशेषता

इस अवसर पर बाबा महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, त्रिपुंड तथा ड्रायफ्रूट से विशेष राजा स्वरूप शृंगार किया गया। झांझ-मंजीरे और डमरू की ध्वनि के बीच आरती संपन्न हुई, और दिव्य शृंगार के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

अपने आराध्य देव के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध थे। महाकाल की नगरी उज्जैन में दूर-दूर से पहुँचे भक्तों ने भस्म आरती में सम्मिलित होकर खुद को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से एक अलौकिक वातावरण में डूबा रहा।

परंपरा और मान्यता

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात् बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही अनूठी धार्मिक परंपरा देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन भूमि की ओर बार-बार आकर्षित करती है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन संपन्न होने वाली यह भस्म आरती भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है, और आस्था के इस अद्वितीय केंद्र में श्रद्धालुओं की उपस्थिति निरंतर बढ़ती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। महाकाल लोक के विस्तार के बाद से यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह निरंतर बढ़ती भीड़ मंदिर प्रशासन के लिए व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से एक सतत चुनौती भी बनती जा रही है, जिस पर समुचित ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा महाकाल की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस अर्पण के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
राजा स्वरूप शृंगार में क्या किया जाता है?
राजा स्वरूप शृंगार में बाबा महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल, त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट से सजाया जाता है। इसके साथ मुकुट धारण कराया जाता है और पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न होता है।
3 नवंबर 2026 को उज्जैन महाकाल मंदिर में क्या विशेष हुआ?
3 नवंबर 2026 को श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार किया गया, जिसमें रजत चंद्र-त्रिशूल-त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट का उपयोग हुआ। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो रात से ही दर्शन के लिए कतारबद्ध थे।
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दर्शन कैसे कर सकते हैं?
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं या मंदिर परिसर में जाकर कतार में स्थान ले सकते हैं। यह आरती तड़के होती है, इसलिए श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होते हैं।
महानिर्वाणी अखाड़े की भस्म आरती में क्या भूमिका है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से ही बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे मंदिर के पवित्रतम अनुष्ठानों में से एक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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