22 सितंबर 2026
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परिवर्तनी एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती, भांग शृंगार और राम नाम बेल पत्र से हुई विशेष पूजा

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परिवर्तनी एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती, भांग शृंगार और राम नाम बेल पत्र से हुई विशेष पूजा

सारांश

परिवर्तनी एकादशी के पावन अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। भांग से विशेष शृंगार और राम नाम के बेल पत्र अर्पण ने इस आरती को और अलौकिक बनाया। हजारों श्रद्धालु रात से ही कतार में खड़े रहे — बाबा महाकाल की एक झलक पाने की आस में।

मुख्य बातें

22 सितंबर 2026 को परिवर्तनी एकादशी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार किया गया और राम नाम के बेल पत्र अर्पित किए गए।
पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस — से पूजा का शुभारंभ हुआ।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
दर्शन के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध रहे; पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 22 सितंबर 2026, मंगलवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तनी एकादशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक दृश्य के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया और राम नाम के बेल पत्र अर्पित किए गए।

कपाट खुलते ही गूंजा 'जय श्री महाकाल'

मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो गया।

पंचामृत अभिषेक से हुई पूजा की शुरुआत

मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया, तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न कराई गई।

परिवर्तनी एकादशी पर विशेष शृंगार

परिवर्तनी एकादशी के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया और उन्हें राम नाम के बेल पत्र अर्पित किए गए। यह शृंगार इस तिथि की विशेष धार्मिक मान्यता को दर्शाता है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा और आस्था

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

गौरतलब है कि उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती विश्वभर में अपनी अलौकिकता के लिए प्रसिद्ध है। परिवर्तनी एकादशी जैसे विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की आस्था और भी प्रगाढ़ हो जाती है। आने वाले त्योहारी मौसम में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की जीवंत आस्था-परंपरा का सबसे शक्तिशाली प्रतीक है, जो सदियों से अपरिवर्तित चली आ रही है। परिवर्तनी एकादशी जैसे विशेष पर्वों पर भांग-शृंगार और बेल पत्र अर्पण की परंपरा यह दर्शाती है कि भारतीय धार्मिक अनुष्ठानों में ऋतु और तिथि के अनुसार सूक्ष्म बदलाव किस प्रकार जीवित रखे जाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस आयोजन के सामाजिक पहलू — हजारों श्रद्धालुओं का अनुशासित रात्रि-प्रतीक्षा में रहना — को नजरअंदाज कर देती है, जो स्वयं में एक असाधारण सामूहिक आस्था का दृश्य है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिवर्तनी एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्यों विशेष होती है?
परिवर्तनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है, और इस दिन बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार तथा राम नाम के बेल पत्र अर्पण जैसे विशिष्ट अनुष्ठान किए जाते हैं। इस विशेष संयोग के कारण देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं।
महाकालेश्वर की भस्म आरती में क्या-क्या अनुष्ठान होते हैं?
भस्म आरती में सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर कपाट खोले जाते हैं, फिर जलाभिषेक और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) से अभिषेक होता है। कपूर आरती के बाद बाबा मुकुट धारण करते हैं और महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की जाती है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए पोशाक संबंधी नियम क्या हैं?
भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की परंपरा और पवित्रता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
महानिर्वाणी अखाड़े का भस्म आरती से क्या संबंध है?
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर की धार्मिक महत्ता क्या है?
श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती अपनी अलौकिकता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। उज्जैन को 'मोक्षदायिनी नगरी' माना जाता है और यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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