15 अक्टूबर 2026
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राजस्थान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने की राज्यव्यापी कानून-व्यवस्था समीक्षा, अधिकारियों को सख्त निर्देश

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राजस्थान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने की राज्यव्यापी कानून-व्यवस्था समीक्षा, अधिकारियों को सख्त निर्देश

सारांश

राजस्थान के डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने पंचायती राज चुनावों और त्योहारी सीज़न से ठीक पहले पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था की बड़ी समीक्षा की। बॉडी कैमरे, लंबित मामलों की समय-सीमा और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही — यह बैठक राजस्थान पुलिस के लिए एक स्पष्ट संदेश है।

मुख्य बातें

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने 14 अक्टूबर 2026 को जयपुर में राज्यव्यापी कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
सभी रेंज के आईजीपी और सभी जिलों के एसपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए हिस्सा लिया।
एक वर्ष से अधिक लंबित मामलों की समीक्षा एसपी और तीन वर्ष से अधिक लंबित मामलों की समीक्षा रेंज आईजी करेंगे।
जिन जिलों में बीएनएस/आईपीसी मामलों में 5% से अधिक वृद्धि हुई, उन्हें अपराध विश्लेषण व कार्ययोजना बनाने के निर्देश।
पुलिसकर्मियों को चेकपॉइंट पर बॉडी कैमरे अनिवार्य रूप से पहनने के निर्देश दिए गए।
आगामी पंचायती राज चुनावों और त्योहारों को ध्यान में रखते हुए व्यापक पुलिस तैनाती और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी के आदेश।

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने 14 अक्टूबर 2026 को जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में राज्यव्यापी अपराध एवं कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और सभी रेंज के महानिरीक्षकों (आईजीपी) ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए भाग लिया। बैठक में डीजीपी ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

समीक्षा बैठक में अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) स्तर के अधिकारी भी शारीरिक रूप से उपस्थित रहे। डीजीपी शर्मा ने पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया — लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा, अपराध की रोकथाम, संवेदनशील घटनाओं की निगरानी, आगामी पंचायती राज चुनावों की तैयारी और पुलिसकर्मियों का जनता के प्रति व्यवहार।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे विवादित मामलों की सूची तैयार की जाए जिनसे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, और इन्हें थाना, सर्कल एवं जिला स्तर पर नियमित रूप से समीक्षा के दायरे में रखा जाए। विवादों को गंभीर स्थिति में बदलने से रोकने के लिए मध्यस्थता, एहतियाती उपायों और अन्य कानूनी माध्यमों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया।

लंबित मामलों पर सख्त रुख

डीजीपी ने संबंधित एसपी को एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा करने और रेंज आईजी को तीन वर्ष से अधिक समय से अनिर्णीत मामलों की पड़ताल करने के निर्देश दिए। पुराने मामलों, लंबित चार्जशीट और अंतिम रिपोर्टों के निपटारे में तेज़ी लाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने का आह्वान किया गया।

गौरतलब है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत जिन जिलों में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है, उन्हें अपराध के रुझानों का विश्लेषण कर प्रभावी रणनीति तैयार करने को कहा गया।

नशा, महिला अपराध और एनडीपीएस पर विशेष निर्देश

जिन जिलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामलों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम रही, उन्हें प्रयास तेज़ करने और नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसी तरह, जिन जिलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, उन्हें मूल कारणों की जाँच कर ठोस रणनीति बनाने को कहा गया।

डीजीपी ने पुलिसकर्मियों के कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए ऐसे कर्मियों की पहचान करने और उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।

पंचायती राज चुनाव और त्योहारों की तैयारी

आगामी पंचायती राज चुनावों और त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए सभी जिलों को व्यापक पुलिस तैनाती की योजना बनाने और संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध एहतियाती कार्रवाई, नियमित गश्त और प्रभावी नाकाबंदी सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल

डीजीपी शर्मा ने पुलिसकर्मियों को चेकपॉइंट कार्रवाई के दौरान बॉडी कैमरों का उपयोग करने का निर्देश दिया, ताकि पारदर्शिता और व्यावसायिकता को बढ़ावा मिल सके। संवेदनशील एवं गंभीर घटनाओं की वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल रिपोर्टिंग, सत्यापित तथ्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई और प्रेस व सोशल मीडिया पर तथ्यात्मक जानकारी समय पर साझा करने को भी अनिवार्य किया गया। उन्होंने राजस्व और वन विभागों सहित संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।

डीजीपी ने सभी अधिकारियों से जन सुरक्षा, पुलिस जवाबदेही और जनता के भरोसे को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की — यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राजस्थान में पंचायत चुनावों और त्योहारी सीज़न की दोहरी चुनौती सामने है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निर्देशों का ज़मीनी अनुपालन कितना होगा। राजस्थान में महिला अपराध और नशे से जुड़े मामलों में जिलेवार असमानता यह दर्शाती है कि समस्या केवल नीति की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की भी है। बॉडी कैमरों का आदेश पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक है, परंतु यह तभी कारगर होगा जब फुटेज की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था हो। लंबित मामलों की समय-सीमा तय करना सराहनीय है, पर बिना अदालती समन्वय के यह लक्ष्य कागज़ी ही रह सकता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने 14 अक्टूबर को कौन-सी बैठक की?
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने 14 अक्टूबर 2026 को जयपुर के पुलिस मुख्यालय में राज्यव्यापी अपराध एवं कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक की, जिसमें सभी जिलों के एसपी और सभी रेंज के आईजीपी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में लंबित मामले, पंचायत चुनाव तैयारी, महिला अपराध और नशा तस्करी सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
राजस्थान में लंबित पुलिस मामलों पर डीजीपी ने क्या निर्देश दिए?
डीजीपी ने एसपी को एक वर्ष से अधिक लंबित मामलों की और रेंज आईजी को तीन वर्ष से अधिक लंबित मामलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। पुराने मामलों, लंबित चार्जशीट और अंतिम रिपोर्टों के निपटारे में तेज़ी लाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
राजस्थान पुलिस में बॉडी कैमरे अनिवार्य क्यों किए गए?
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता को बढ़ावा देने के लिए पुलिसकर्मियों को चेकपॉइंट कार्रवाई के दौरान बॉडी कैमरे अनिवार्य रूप से पहनने का निर्देश दिया। यह कदम हाल की उन घटनाओं के मद्देनज़र उठाया गया है जिनमें पुलिसकर्मियों पर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगे।
पंचायती राज चुनावों के मद्देनज़र राजस्थान पुलिस ने क्या तैयारी की है?
डीजीपी ने सभी जिलों को व्यापक पुलिस तैनाती की योजना बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा असामाजिक तत्वों की पहचान कर एहतियाती कार्रवाई, नियमित गश्त बढ़ाने और प्रभावी नाकाबंदी सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया है।
राजस्थान में महिला अपराध और एनडीपीएस मामलों पर डीजीपी का क्या रुख है?
जिन जिलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, उन्हें मूल कारणों की जाँच कर ठोस रणनीति बनाने का निर्देश दिया गया। जहाँ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामले तुलनात्मक रूप से कम दर्ज हुए, वहाँ नशीले पदार्थों के विरुद्ध प्रवर्तन गतिविधियाँ तेज़ करने को कहा गया।
राष्ट्र प्रेस
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