सीएम भजनलाल शर्मा का सख्त संदेश: 3 पुलिस-जेल अधिकारियों पर कार्रवाई, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 14 जुलाई 2026 को राज्य में कानून व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के दो अधिकारियों और राजस्थान जेल सेवा के एक अधिकारी के विरुद्ध आधिकारिक कर्तव्यों में अनियमितता एवं लापरवाही के आरोप में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी। यह निर्णय सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महिला सुधार गृह मामला: डिप्टी सुपरिटेंडेंट सस्पेंड
जयपुर के महिला सुधार गृह में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज बिश्नोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनका तबादला जयपुर हेडक्वार्टर से भरतपुर कर दिया गया है।
उनके विरुद्ध आरोप था कि उन्होंने एक महिला कैदी को अपने साथ रखा और उसे सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने दिया। इसके अतिरिक्त, उन पर पैसे के बदले कैदियों को अनधिकृत सुविधाएँ उपलब्ध कराने का भी आरोप है। गौरतलब है कि जेल परिसर में इस प्रकार की मिलीभगत की शिकायतें राज्य में पहले भी सामने आ चुकी हैं।
साइबर क्राइम अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) डेरावर सिंह के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दी है।
डीग जिले के कामन पुलिस स्टेशन में स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के पद पर कार्यरत रहते हुए वे अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाह पाए गए। एक हत्या के मामले की जाँच के दौरान उन्होंने कथित तौर पर आठ में से सात आरोपियों को बचाने का प्रयास किया और केवल एक आरोपी को ही जिम्मेदार ठहराया — जो जाँच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रेत माफिया मामला: RPS अधिकारी के विरुद्ध जाँच रिपोर्ट स्वीकृत
मुख्यमंत्री ने RPS अधिकारी लाभूराम बिश्नोई के विरुद्ध विभागीय जाँच रिपोर्ट को स्वीकृति देते हुए उन पर लगे आरोपों को सही माना है।
जाँच में पाया गया कि सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में बनास नदी क्षेत्र में रेत माफिया द्वारा किए जा रहे अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देशों का वे पालन करने में विफल रहे। उनकी इस लापरवाही के चलते कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी, पुलिसकर्मियों और स्वयं अधिकारी की जान को भी खतरा उत्पन्न हुआ, और ऑपरेशन के दौरान संबंधित विभागों के साथ समन्वय की कमी भी सामने आई।
सरकार का रुख: जवाबदेही और अनुशासन
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ये फैसले सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, अनुशासन और कुशलता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाइयाँ तभी प्रभावी होती हैं जब इन्हें व्यवस्थागत सुधारों के साथ जोड़ा जाए। आगे की कार्रवाई और विभागीय प्रक्रियाओं का परिणाम यह तय करेगा कि यह कदम केवल संकेत है या वास्तविक बदलाव की शुरुआत।