14 जुलाई 2026
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सीएम भजनलाल शर्मा का सख्त संदेश: 3 पुलिस-जेल अधिकारियों पर कार्रवाई, लापरवाही बर्दाश्त नहीं

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सीएम भजनलाल शर्मा का सख्त संदेश: 3 पुलिस-जेल अधिकारियों पर कार्रवाई, लापरवाही बर्दाश्त नहीं

सारांश

राजस्थान में सीएम भजनलाल शर्मा ने एक साथ तीन अधिकारियों पर गाज गिराई — जेल में अनियमितता, हत्याकांड में पक्षपाती जाँच और रेत माफिया से मिलीभगत के आरोपों में। यह कार्रवाई राज्य सरकार की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति का व्यावहारिक प्रदर्शन है।

मुख्य बातें

सीएम भजनलाल शर्मा ने 14 जुलाई 2026 को RPS के 2 और राजस्थान जेल सेवा के 1 अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई को मंजूरी दी।
जयपुर महिला सुधार गृह की डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज बिश्नोई को तत्काल निलंबित कर भरतपुर स्थानांतरित किया गया।
जोधपुर के ACP (साइबर क्राइम) डेरावर सिंह पर नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई; हत्या मामले में 8 में से 7 आरोपियों को बचाने का आरोप।
RPS अधिकारी लाभूराम बिश्नोई पर बनास नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन के विरुद्ध कार्रवाई न करने की विभागीय जाँच में दोष सिद्ध।
लापरवाही के कारण सवाई माधोपुर में पुलिसकर्मियों की जान को भी खतरा उत्पन्न हुआ था।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 14 जुलाई 2026 को राज्य में कानून व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के दो अधिकारियों और राजस्थान जेल सेवा के एक अधिकारी के विरुद्ध आधिकारिक कर्तव्यों में अनियमितता एवं लापरवाही के आरोप में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी। यह निर्णय सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

महिला सुधार गृह मामला: डिप्टी सुपरिटेंडेंट सस्पेंड

जयपुर के महिला सुधार गृह में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज बिश्नोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनका तबादला जयपुर हेडक्वार्टर से भरतपुर कर दिया गया है।

उनके विरुद्ध आरोप था कि उन्होंने एक महिला कैदी को अपने साथ रखा और उसे सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने दिया। इसके अतिरिक्त, उन पर पैसे के बदले कैदियों को अनधिकृत सुविधाएँ उपलब्ध कराने का भी आरोप है। गौरतलब है कि जेल परिसर में इस प्रकार की मिलीभगत की शिकायतें राज्य में पहले भी सामने आ चुकी हैं।

साइबर क्राइम अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) डेरावर सिंह के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दी है।

डीग जिले के कामन पुलिस स्टेशन में स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के पद पर कार्यरत रहते हुए वे अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाह पाए गए। एक हत्या के मामले की जाँच के दौरान उन्होंने कथित तौर पर आठ में से सात आरोपियों को बचाने का प्रयास किया और केवल एक आरोपी को ही जिम्मेदार ठहराया — जो जाँच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

रेत माफिया मामला: RPS अधिकारी के विरुद्ध जाँच रिपोर्ट स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने RPS अधिकारी लाभूराम बिश्नोई के विरुद्ध विभागीय जाँच रिपोर्ट को स्वीकृति देते हुए उन पर लगे आरोपों को सही माना है।

जाँच में पाया गया कि सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में बनास नदी क्षेत्र में रेत माफिया द्वारा किए जा रहे अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देशों का वे पालन करने में विफल रहे। उनकी इस लापरवाही के चलते कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी, पुलिसकर्मियों और स्वयं अधिकारी की जान को भी खतरा उत्पन्न हुआ, और ऑपरेशन के दौरान संबंधित विभागों के साथ समन्वय की कमी भी सामने आई।

सरकार का रुख: जवाबदेही और अनुशासन

यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ये फैसले सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, अनुशासन और कुशलता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाइयाँ तभी प्रभावी होती हैं जब इन्हें व्यवस्थागत सुधारों के साथ जोड़ा जाए। आगे की कार्रवाई और विभागीय प्रक्रियाओं का परिणाम यह तय करेगा कि यह कदम केवल संकेत है या वास्तविक बदलाव की शुरुआत।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि विभागीय जाँच प्रक्रियाएँ कितनी जल्दी और निष्पक्षता से पूरी होती हैं। राजस्थान में रेत माफिया और जेल अनियमितताओं की शिकायतें नई नहीं हैं — ये वर्षों से व्यवस्थागत समस्या रही हैं। केवल निलंबन और जाँच आदेश पर्याप्त नहीं; जब तक दोषसिद्धि और सेवा-समाप्ति तक की कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह 'ज़ीरो टॉलरेंस' की बजाय 'सीमित सहनशीलता' ही कहलाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम भजनलाल शर्मा ने किन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मंजूरी दी?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 14 जुलाई 2026 को तीन अधिकारियों पर कार्रवाई को मंजूरी दी — जयपुर महिला सुधार गृह की डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज बिश्नोई (निलंबन), जोधपुर के ACP डेरावर सिंह (अनुशासनात्मक कार्रवाई), और RPS अधिकारी लाभूराम बिश्नोई (विभागीय जाँच में दोष सिद्ध)।
सरोज बिश्नोई को क्यों सस्पेंड किया गया?
जयपुर महिला सुधार गृह में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज बिश्नोई पर आरोप था कि उन्होंने एक महिला कैदी को अपने साथ रखकर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने दिया और पैसे के बदले कैदियों को अनधिकृत सुविधाएँ प्रदान कीं। इन आरोपों के आधार पर उन्हें तत्काल निलंबित कर भरतपुर स्थानांतरित किया गया।
डेरावर सिंह के विरुद्ध क्या आरोप हैं?
जोधपुर के ACP (साइबर क्राइम) डेरावर सिंह पर आरोप है कि डीग जिले के कामन पुलिस स्टेशन में SHO रहते हुए एक हत्या मामले की जाँच में उन्होंने कथित तौर पर आठ में से सात आरोपियों को बचाने की कोशिश की। इस लापरवाही के लिए राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
लाभूराम बिश्नोई मामले में क्या पाया गया?
विभागीय जाँच में पाया गया कि RPS अधिकारी लाभूराम बिश्नोई सवाई माधोपुर जिले में बनास नदी क्षेत्र में रेत माफिया के अवैध खनन के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देशों का पालन करने में विफल रहे। इस लापरवाही से कानून-व्यवस्था बिगड़ी और पुलिसकर्मियों की जान को भी खतरा उत्पन्न हुआ।
इन कार्रवाइयों का राजस्थान पुलिस पर क्या असर होगा?
ये कार्रवाइयाँ राज्य सरकार की जवाबदेही नीति का हिस्सा हैं और पुलिस व जेल तंत्र में अनुशासन का संदेश देती हैं। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक सुधार के लिए व्यवस्थागत बदलाव और त्वरित विभागीय प्रक्रियाएँ भी आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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