राजस्थान में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: 103 अधिकारी निलंबित, 6 बर्खास्त, 11 की पेंशन स्थायी रूप से रोकी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने 29 मई 2026 को भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे व्यापक विभागीय कार्रवाई करते हुए 103 अधिकारियों को निलंबित कर दिया — जिनमें एक आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। इसके साथ ही 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया और 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई, क्योंकि उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार व कदाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सरकार ने रिश्वतखोरी, ट्रैप ऑपरेशन, सरकारी पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में अभियोजन की मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के अंतर्गत 37 अन्य मामलों में भी विधिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सुशासन को लेकर जनता की अपेक्षाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
बर्खास्त अधिकारियों का विवरण
सेवा से हटाए गए अधिकारियों में भरत प्रकाश मेघवाल (तत्कालीन विकास अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, सुवाणा-भीलवाड़ा), राजेश कुमार नैनावत (तत्कालीन उपनिदेशक, कृषि विभाग, झुंझुनू), महावीर सिंह आसीवाल (तत्कालीन सहायक आयुक्त, वित्त एवं कराधान विभाग, भरतपुर), डॉ. राम मोहन सिंह चौहान (सीएचसी बिछीवाड़ा, डूंगरपुर), डॉ. मुरलीधर शर्मा (सीएचसी रामगढ़ पचवारा, दौसा) और डॉ. मनोहर लाल (सीएचसी रामगढ़, अलवर) शामिल हैं।
इसके अलावा, अलवर स्थित पीएचईडी प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को पेयजल गुणवत्ता जाँच में फर्जी रिपोर्ट देने के आरोपों के बाद सेवामुक्त किया गया। एसजेएम-4 कोटा के पूर्व एपीपी हरि सिंह मीणा को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद सेवा से हटाया गया।
पेंशन रोके गए सेवानिवृत्त अधिकारी
भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की 100 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है। इनमें बनवारी लाल मीणा (आरएएस), देवेंद्र सिंह ढिल्लो (आरएएस), महेंद्र सिंह (आरपीएस) सहित चिकित्सा, सार्वजनिक निर्माण और प्रशासनिक विभागों के कई पूर्व अधिकारी शामिल हैं।
पेंशन रोके गए अन्य अधिकारियों में देशराज नूनिया (तत्कालीन अधिशासी अभियंता, आईजीएनपी मोहनगढ़, जैसलमेर), देवी सिंह (तत्कालीन एसडीएम, डीग), डॉ. पवन कुमार जैन (तत्कालीन बीसीएमओ, लालसोट), मायालाल सैनी (तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी अलवर), राकेश चौहान (तत्कालीन एईएन, पीएचईडी अलवर), गोपाल लाल कुमावत (तत्कालीन लेखा अधिकारी, राजस्थान जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड, जयपुर), राकेश सिंह (तत्कालीन एईएन, पीएचईडी नीमराणा), प्रदीप कुमार (तत्कालीन जेईएन, पीएचईडी नीमराणा), विशाल सक्सेना (तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी शाहपुरा) और महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन एसीई, विशेष परियोजनाएं, अजमेर) शामिल हैं। गौरतलब है कि डॉ. विलास राव गुलहाने (तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, झालावाड़) को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।
सरकार का रुख और संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी, संवेदनशील और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन राजस्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी सार्वजनिक धन के गबन या पद के दुरुपयोग का दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नौकरी से बर्खास्तगी और सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करने सहित सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद न्यायालयीन प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। धारा 17-ए के तहत चल रहे 37 मामलों की जाँच भी समानांतर रूप से जारी है। राज्य सरकार की यह कार्रवाई 'जीरो टॉलरेंस' नीति के क्रियान्वयन की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जो आने वाले महीनों में और अधिक विभागीय समीक्षाओं का संकेत देती है।