14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: 103 अधिकारी निलंबित, 6 बर्खास्त, 11 की पेंशन स्थायी रूप से रोकी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: 103 अधिकारी निलंबित, 6 बर्खास्त, 11 की पेंशन स्थायी रूप से रोकी

सारांश

राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार ने एक साथ 103 अधिकारी निलंबित, 6 बर्खास्त और 11 की पेंशन रोककर यह साफ कर दिया है कि 'जीरो टॉलरेंस' महज नारा नहीं है। 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति और धारा 17-ए के तहत 37 मामलों की जाँच इसे राज्य की अब तक की सबसे व्यापक भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाई बनाती है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 29 मई 2026 को 103 अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया, जिनमें एक आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया; 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की 100% पेंशन स्थायी रूप से रोकी गई।
रिश्वतखोरी, ट्रैप ऑपरेशन और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में अभियोजन की मंजूरी दी गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अतिरिक्त मामलों में जाँच शुरू।
अलवर पीएचईडी प्रयोगशाला के रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को पेयजल जाँच में फर्जी रिपोर्ट देने पर सेवामुक्त किया गया।
बर्खास्त अधिकारी भीलवाड़ा, झुंझुनू, भरतपुर, डूंगरपुर, दौसा और अलवर जिलों से हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने 29 मई 2026 को भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे व्यापक विभागीय कार्रवाई करते हुए 103 अधिकारियों को निलंबित कर दिया — जिनमें एक आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। इसके साथ ही 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया और 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई, क्योंकि उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार व कदाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सरकार ने रिश्वतखोरी, ट्रैप ऑपरेशन, सरकारी पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में अभियोजन की मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के अंतर्गत 37 अन्य मामलों में भी विधिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सुशासन को लेकर जनता की अपेक्षाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

बर्खास्त अधिकारियों का विवरण

सेवा से हटाए गए अधिकारियों में भरत प्रकाश मेघवाल (तत्कालीन विकास अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, सुवाणा-भीलवाड़ा), राजेश कुमार नैनावत (तत्कालीन उपनिदेशक, कृषि विभाग, झुंझुनू), महावीर सिंह आसीवाल (तत्कालीन सहायक आयुक्त, वित्त एवं कराधान विभाग, भरतपुर), डॉ. राम मोहन सिंह चौहान (सीएचसी बिछीवाड़ा, डूंगरपुर), डॉ. मुरलीधर शर्मा (सीएचसी रामगढ़ पचवारा, दौसा) और डॉ. मनोहर लाल (सीएचसी रामगढ़, अलवर) शामिल हैं।

इसके अलावा, अलवर स्थित पीएचईडी प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को पेयजल गुणवत्ता जाँच में फर्जी रिपोर्ट देने के आरोपों के बाद सेवामुक्त किया गया। एसजेएम-4 कोटा के पूर्व एपीपी हरि सिंह मीणा को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद सेवा से हटाया गया।

पेंशन रोके गए सेवानिवृत्त अधिकारी

भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की 100 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है। इनमें बनवारी लाल मीणा (आरएएस), देवेंद्र सिंह ढिल्लो (आरएएस), महेंद्र सिंह (आरपीएस) सहित चिकित्सा, सार्वजनिक निर्माण और प्रशासनिक विभागों के कई पूर्व अधिकारी शामिल हैं।

पेंशन रोके गए अन्य अधिकारियों में देशराज नूनिया (तत्कालीन अधिशासी अभियंता, आईजीएनपी मोहनगढ़, जैसलमेर), देवी सिंह (तत्कालीन एसडीएम, डीग), डॉ. पवन कुमार जैन (तत्कालीन बीसीएमओ, लालसोट), मायालाल सैनी (तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी अलवर), राकेश चौहान (तत्कालीन एईएन, पीएचईडी अलवर), गोपाल लाल कुमावत (तत्कालीन लेखा अधिकारी, राजस्थान जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड, जयपुर), राकेश सिंह (तत्कालीन एईएन, पीएचईडी नीमराणा), प्रदीप कुमार (तत्कालीन जेईएन, पीएचईडी नीमराणा), विशाल सक्सेना (तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी शाहपुरा) और महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन एसीई, विशेष परियोजनाएं, अजमेर) शामिल हैं। गौरतलब है कि डॉ. विलास राव गुलहाने (तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, झालावाड़) को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।

सरकार का रुख और संदेश

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी, संवेदनशील और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन राजस्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी सार्वजनिक धन के गबन या पद के दुरुपयोग का दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नौकरी से बर्खास्तगी और सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करने सहित सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद न्यायालयीन प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। धारा 17-ए के तहत चल रहे 37 मामलों की जाँच भी समानांतर रूप से जारी है। राज्य सरकार की यह कार्रवाई 'जीरो टॉलरेंस' नीति के क्रियान्वयन की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जो आने वाले महीनों में और अधिक विभागीय समीक्षाओं का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी अभियोजन की गति होगी — राजस्थान में भ्रष्टाचार के मामले दशकों तक न्यायालयों में लंबित रहने का इतिहास रखते हैं। धारा 17-ए के तहत केवल 37 मामलों में जाँच और 108 में अभियोजन स्वीकृति का अनुपात बताता है कि बड़ी संख्या में मामले अभी भी प्रशासनिक स्तर पर ही हैं, न कि न्यायिक। पेंशन रोकना एक प्रभावी निवारक उपाय है, परंतु यह तभी अर्थपूर्ण होगा जब सम्पत्ति की वसूली और दोषसिद्धि की दर भी सार्वजनिक की जाए। 'जीरो टॉलरेंस' नीति की विश्वसनीयता उसके घोषणाओं में नहीं, बल्कि अगले 12 महीनों में न्यायालयी परिणामों में मापी जाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में 103 अधिकारियों को निलंबित क्यों किया गया?
राजस्थान सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' भ्रष्टाचार-विरोधी नीति के तहत रिश्वतखोरी, सरकारी पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति जैसे आरोपों में दोषी पाए जाने पर 103 अधिकारियों को निलंबित किया गया। इनमें एक आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
किन 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया?
बर्खास्त अधिकारियों में भरत प्रकाश मेघवाल (पीडब्ल्यूडी, भीलवाड़ा), राजेश कुमार नैनावत (कृषि विभाग, झुंझुनू), महावीर सिंह आसीवाल (वित्त एवं कराधान, भरतपुर), डॉ. राम मोहन सिंह चौहान (डूंगरपुर), डॉ. मुरलीधर शर्मा (दौसा) और डॉ. मनोहर लाल (अलवर) शामिल हैं। इन सभी को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तुरंत सेवामुक्त किया गया।
सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन क्यों रोकी गई?
भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप सिद्ध होने के बाद 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की 100 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है। इनमें आरएएस और आरपीएस अधिकारियों के साथ-साथ चिकित्सा, पीएचईडी और प्रशासनिक विभागों के पूर्व अधिकारी शामिल हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए क्या है और इसका उपयोग क्यों किया गया?
धारा 17-ए के तहत किसी लोक सेवक के विरुद्ध जाँच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है, जो उच्च पदस्थ अधिकारियों को अनुचित जाँच से सुरक्षा देती है। राजस्थान सरकार ने 37 मामलों में यह स्वीकृति देकर उन वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई का रास्ता खोला है जिनके विरुद्ध पहले प्रक्रियागत अड़चनें थीं।
इस कार्रवाई से आम जनता को क्या फर्क पड़ेगा?
पेयजल जाँच में फर्जी रिपोर्ट देने वाले रसायनज्ञ और सार्वजनिक निर्माण विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई सीधे जन-सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी है। सरकार के अनुसार, 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति से भ्रष्टाचार के मामलों की न्यायालयीन सुनवाई तेज होगी, जिससे दीर्घकालिक जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले