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अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का एटीएंडसी लॉस घटकर 4.46%, बिजली चोरी पर 36,720 छापों का असर

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अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का एटीएंडसी लॉस घटकर 4.46%, बिजली चोरी पर 36,720 छापों का असर

सारांश

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 36,720 छापे मारकर और 486 एफआईआर दर्ज कर एटीएंडसी लॉस को 4.7% से घटाकर 4.46% पर ला दिया। ₹43.39 करोड़ की चोरी पकड़ी गई और कंपनी अब देश के सबसे कुशल डिस्कॉम में शामिल है।

मुख्य बातें

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का एटीएंडसी लॉस वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 4.46% हुआ, जो पिछले वर्ष 4.7% था।
वर्ष भर में 36,720 छापे मारे गए, 486 एफआईआर दर्ज हुईं और 5,897 बिजली चोरी के मामले सामने आए।
जाँच में 1.98 करोड़ यूनिट बिजली चोरी का पता चला, अनुमानित मूल्य ₹43.39 करोड़ ।
छापेमारी में 79.25 टन अवैध तार और उपकरण जब्त; विशेष समय-स्लॉट छापों में 40% वृद्धि।
सबसे बड़ा मामला मलाड (पश्चिम) में ₹1.63 करोड़ की चोरी का, जो 7 नवंबर 2025 को पकड़ी गई।
बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत दोषी को तीन साल तक जेल और जुर्माने का प्रावधान।

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने वित्त वर्ष 2025-26 में बिजली चोरी के विरुद्ध चलाए गए व्यापक अभियान के बल पर अपना एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) लॉस घटाकर 4.46 प्रतिशत पर ला दिया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.7 प्रतिशत से कम है। कंपनी द्वारा मंगलवार, 14 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस उपलब्धि के साथ अदाणी इलेक्ट्रिसिटी अब देश के सबसे कम एटीएंडसी लॉस वाले बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की श्रेणी में शामिल हो गई है।

अभियान का दायरा और कार्रवाई

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की सतर्कता टीम ने 36,720 बड़े पैमाने के छापे मारे और बिजली चोरी के आरोपियों के खिलाफ 486 एफआईआर दर्ज कराई। इस अवधि में सुबह तड़के, देर शाम और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में की गई विशेष छापेमारी में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, जिससे चोरी के मामलों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी।

अभियान के दौरान कुल 5,897 बिजली चोरी के मामले दर्ज किए गए। जब्ती में 79.25 टन अवैध बिजली के तार और अन्य उपकरण शामिल रहे। जाँच में करीब 1.98 करोड़ यूनिट बिजली चोरी का पता चला, जिसकी अनुमानित कीमत ₹43.39 करोड़ आँकी गई।

बड़े मामलों का खुलासा

कंपनी की सतर्कता टीम ने 7 नवंबर 2025 को मलाड (पश्चिम) स्थित स्वास्तिक कंपाउंड, चिंचोली बंदर रोड पर मोल्डिंग गतिविधियों के लिए सीधे बिजली कनेक्शन के ज़रिए ₹1.63 करोड़ की बिजली चोरी का खुलासा किया। इसी क्रम में 4 जुलाई 2025 को गोरेगांव (पश्चिम) के मोतीलाल नगर में एक मोल्डिंग यूनिट में ₹80 लाख की बिजली चोरी पकड़ी गई।

इसके अतिरिक्त, जून 2025 में मलाड (पूर्व) में मोल्डिंग गतिविधि के लिए सीधी बिजली आपूर्ति का उपयोग कर ₹48.73 लाख की बिजली चोरी का मामला भी दर्ज किया गया। गौरतलब है कि तीनों बड़े मामले मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में औद्योगिक इकाइयों से जुड़े हैं।

उपभोक्ताओं और नेटवर्क पर असर

कंपनी के अनुसार, 0.24 प्रतिशत की यह कमी ईमानदारी से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ घटाएगी और वितरण प्रणाली की कार्यक्षमता में सुधार लाएगी। अधिक बिजली माँग वाले क्षेत्रों, विशेषकर झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में, चोरी के कारण मौजूदा नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जगह की कमी से नया नेटवर्क विकसित करना कठिन होता है, जिससे केबल और ट्रांसफॉर्मर बार-बार खराब होते हैं और रखरखाव की लागत बढ़ जाती है।

कानूनी प्रावधान और पुलिस सहयोग

कंपनी ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी गैर-जमानती अपराध है। बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत दोषी साबित होने पर आरोपी को जुर्माना, तीन साल तक की जेल या दोनों सजा हो सकती है। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर नियमित संयुक्त अभियान चलाती है, जिसमें आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उपकरण भी जब्त किए जाते हैं।

कंपनी का रुख और आगे की योजना

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी के एक प्रवक्ता ने कहा, 'बिजली चोरी का सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम इस वर्ष भी विशेष क्षेत्रों में अभियान और तेज करेंगे, ताकि एटीएंडसी लॉस को और कम किया जा सके।' प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सख्त कार्रवाई से न केवल नेटवर्क की सुरक्षा होती है, बल्कि प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में भी मदद मिलती है। आने वाले महीनों में अभियान की तीव्रता और बढ़ाए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सुधार टिकाऊ है या केवल छापेमारी की तीव्रता का अस्थायी परिणाम। देश के अधिकांश सरकारी डिस्कॉम अभी भी 15-25% के एटीएंडसी लॉस से जूझ रहे हैं, ऐसे में निजी वितरण कंपनियों का यह प्रदर्शन नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक संदर्भ बनता है। हालाँकि, मुंबई जैसे घने शहरी क्षेत्र में छापेमारी अपेक्षाकृत आसान है; ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इस मॉडल की प्रतिकृति कहीं अधिक जटिल होगी। बिना स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार के, दीर्घकालिक लॉस में कमी की सीमा सीमित रह सकती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का एटीएंडसी लॉस क्या होता है और यह क्यों मायने रखता है?
एटीएंडसी (एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल) लॉस वह प्रतिशत है जो बिजली उत्पादन और वास्तविक वसूली के बीच के अंतर को दर्शाता है — इसमें तकनीकी नुकसान और बिजली चोरी दोनों शामिल हैं। यह जितना कम होगा, उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ उतना कम होगा और वितरण कंपनी की वित्तीय सेहत उतनी बेहतर होगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कितनी बिजली चोरी पकड़ी?
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 1.98 करोड़ यूनिट बिजली चोरी का पता लगाया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹43.39 करोड़ है। इस दौरान 5,897 मामले दर्ज हुए और 79.25 टन अवैध तार व उपकरण जब्त किए गए।
बिजली चोरी पर कानूनी कार्रवाई क्या होती है?
बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली चोरी एक गैर-जमानती अपराध है। दोषी साबित होने पर आरोपी को जुर्माना, तीन साल तक की जेल, या दोनों सजा हो सकती है। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने इस वित्त वर्ष में 486 एफआईआर दर्ज कराई हैं।
मुंबई में बिजली चोरी के सबसे बड़े मामले कौन-से सामने आए?
सबसे बड़ा मामला 7 नवंबर 2025 को मलाड (पश्चिम) के स्वास्तिक कंपाउंड में पकड़ा गया, जहाँ ₹1.63 करोड़ की चोरी हुई थी। इसके अलावा 4 जुलाई 2025 को गोरेगांव (पश्चिम) में ₹80 लाख और जून 2025 में मलाड (पूर्व) में ₹48.73 लाख की चोरी के मामले भी सामने आए — सभी मोल्डिंग इकाइयों से जुड़े थे।
अदाणी इलेक्ट्रिसिटी का एटीएंडसी लॉस देश के अन्य डिस्कॉम की तुलना में कैसा है?
कंपनी के बयान के अनुसार, 4.46% के एटीएंडसी लॉस के साथ अदाणी इलेक्ट्रिसिटी अब देश के सबसे कम लॉस वाले बिजली वितरण कंपनियों में शामिल हो गई है। देश के अधिकांश सरकारी डिस्कॉम का एटीएंडसी लॉस इससे कहीं अधिक है, जो निजी वितरण मॉडल की तुलनात्मक दक्षता को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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