14 जुलाई 2026
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दिल्ली साइबर फ्रॉड: 'ब्लू डार्ट' के नाम पर ₹2.47 लाख की ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार

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दिल्ली साइबर फ्रॉड: 'ब्लू डार्ट' के नाम पर ₹2.47 लाख की ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार

सारांश

'ब्लू डार्ट' कूरियर एग्जीक्यूटिव बनकर की गई इस ठगी में कॉल फॉरवर्डिंग के ज़रिए OTP चुराया गया और ₹2.47 लाख उड़ाए गए। दिल्ली साइबर पुलिस ने चार राज्यों में छापेमारी कर चार आरोपियों को दबोचा — यह मामला म्यूल अकाउंट नेटवर्क के बढ़ते खतरे को उजागर करता है।

मुख्य बातें

नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 'ब्लू डार्ट' के नाम पर हुई ₹2.47 लाख की साइबर ठगी का पर्दाफाश किया।
पीड़ित सतेंद्र , दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर , ने 16 जून को शिकायत दर्ज कराई थी।
ठगों ने कॉल और मैसेज फॉरवर्डिंग सक्रिय करवाकर बैंकिंग OTP हासिल किए और खाते से रकम निकाली।
अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू , जिमी बथला , अब्दुल वदूद और अनिकेत वर्मा — उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार।
आरोपी ने ₹50,000 में बैंक खाता खोला; खाता ₹1,00,000 में बेचा गया और अंततः टेलीग्राम के ज़रिए साइबर फ्रॉडस्टर्स को सौंपा गया।
सिंडिकेट के शेष सदस्यों की पहचान के लिए जांच जारी है।

नई दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने 14 जुलाई 2026 को 'ब्लू डार्ट' कूरियर कंपनी का नाम लेकर की गई ₹2.47 लाख की साइबर धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मो. अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू, जिमी बथला, अब्दुल वदूद और अनिकेत वर्मा के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर साइबर अपराध से प्राप्त रकम को ठिकाने लगाने के लिए 'म्यूल बैंक अकाउंट' संचालित कर रहे थे।

मुख्य घटनाक्रम

शिकायतकर्ता सतेंद्र, जो नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के बाबरपुर निवासी और दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर हैं, को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को 'ब्लू डार्ट' कूरियर एग्जीक्यूटिव बताया। पुलिस के अनुसार, उस व्यक्ति ने सतेंद्र को एक विशेष नंबर डायल करवाकर उनके मोबाइल पर कॉल और मैसेज फॉरवर्डिंग सक्रिय करवा दी। इसके परिणामस्वरूप बैंकिंग ओटीपी सहित सभी इनकमिंग कॉल और एसएमएस धोखेबाजों के नियंत्रण वाले नंबरों पर डायवर्ट हो गए, जिससे वे शिकायतकर्ता के खाते से ₹2.47 लाख निकालने में सफल रहे। सतेंद्र ने 16 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जांच की प्रक्रिया

साइबर पुलिस टीम ने वित्तीय विश्लेषण, तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के माध्यम से मनी ट्रेल खंगाला। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम का ₹80,000 का हिस्सा आरोपी मो. अरबाज दानियाल के नैनीताल बैंक खाते में जमा हुआ था। पुलिस ने पाया कि यह खाता जानबूझकर साइबर फ्रॉड की रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए 'म्यूल अकाउंट' के रूप में खोला गया था।

तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग रिकॉर्ड और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर काशीपुर (उत्तराखंड) तथा मिर्जापुर, लखनऊ व सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) में म्यूल अकाउंट संचालित करने वाले लाभार्थियों की पहचान की गई।

गिरफ्तारियाँ कैसे हुईं

साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के इंस्पेक्टर राहुल कुमार की देखरेख में टीम ने उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर तथा उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मिर्जापुर और सुल्तानपुर में एक साथ छापेमारी की। 11 जुलाई को मो. अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू और जिमी बथला को काशीपुर, उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मो. अरबाज ने बताया कि उसने जिमी बथला के कहने पर ₹50,000 के बदले बैंक खाता खुलवाया था, जिसे बाद में जिमी ने अब्दुल वदूद को ₹1,00,000 में बेच दिया।

जिमी बथला की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान जांच आगे बढ़ी और मिर्जापुर से अब्दुल वदूद तथा सुल्तानपुर से अनिकेत वर्मा को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अनिकेत वर्मा ने नैनीताल बैंक खाते की जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से काम करने वाले साइबर फ्रॉडस्टर्स को बेच दी थी।

आगे की जांच

पुलिस के अनुसार, इस सिंडिकेट के शेष सदस्यों की पहचान करने और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाने के लिए जांच जारी है। यह मामला उस बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है जिसमें साइबर ठग कूरियर कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं और म्यूल अकाउंट के जरिए रकम को कई राज्यों में ट्रांसफर करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि साइबर अपराधी अपनी सोशल इंजीनियरिंग तकनीकें परिष्कृत कर रहे हैं। म्यूल अकाउंट नेटवर्क का कई राज्यों में फैला होना और टेलीग्राम के ज़रिए संचालन यह बताता है कि ये सिंडिकेट अब संगठित और तकनीक-सक्षम हो चुके हैं। बिना व्यापक डिजिटल साक्षरता अभियान और बैंकों की ओर से रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन के, ऐसी गिरफ्तारियाँ समस्या का समाधान नहीं, केवल लक्षण-उपचार हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में 'ब्लू डार्ट' के नाम पर हुई साइबर ठगी क्या है?
इस मामले में ठगों ने खुद को 'ब्लू डार्ट' कूरियर एग्जीक्यूटिव बताकर दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर सतेंद्र को फोन किया और उन्हें कॉल व मैसेज फॉरवर्डिंग सक्रिय करने के लिए मना लिया। इससे बैंकिंग OTP सहित सभी संदेश ठगों के नंबर पर डायवर्ट हो गए और उनके खाते से ₹2.47 लाख निकाल लिए गए।
म्यूल बैंक अकाउंट क्या होता है और इस मामले में इसका क्या रोल था?
म्यूल बैंक अकाउंट वे खाते होते हैं जो साइबर अपराधी ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए दूसरों के नाम पर खुलवाते हैं। इस मामले में मो. अरबाज दानियाल ने ₹50,000 के बदले अपना नैनीताल बैंक खाता खुलवाया, जिसे बाद में ₹1,00,000 में बेचा गया और अंततः टेलीग्राम के ज़रिए साइबर फ्रॉडस्टर्स को सौंप दिया गया।
इस साइबर धोखाधड़ी में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कहाँ से?
कुल चार आरोपी गिरफ्तार हुए — मो. अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू और जिमी बथला को 11 जुलाई को काशीपुर (उत्तराखंड) से, जबकि अब्दुल वदूद को मिर्जापुर और अनिकेत वर्मा को सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया।
कॉल फॉरवर्डिंग साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने मोबाइल से कोई विशेष कोड डायल न करें, क्योंकि ये कोड कॉल और मैसेज फॉरवर्डिंग सक्रिय कर सकते हैं। कूरियर या बैंक संबंधी किसी भी जानकारी के लिए हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन नंबर से संपर्क करें।
इस मामले में आगे की जांच कहाँ तक पहुँची है?
पुलिस के अनुसार, चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सिंडिकेट के शेष सदस्यों की पहचान और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाने के लिए जांच जारी है। इंस्पेक्टर राहुल कुमार की देखरेख में टीम आगे की कार्रवाई कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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