क्या राजस्थान के राज्यपाल ने पूर्व मंत्री महेश जोशी पर केस चलाने की मंजूरी दी?
सारांश
Key Takeaways
- राज्यपाल ने महेश जोशी पर केस चलाने की मंजूरी दी।
- यह मामला जल जीवन मिशन योजना से जुड़ा है।
- कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध मानती है।
- ईडी ने कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है।
- विशेष अदालत में मुकदमे की कार्यवाही शुरू होगी।
जयपुर, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कांग्रेस के नेता और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी है। राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया।
यह मामला जल जीवन मिशन योजना में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जिसमें करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले ही महेश जोशी को गिरफ्तार किया था और जांच में प्रथम दृष्टा अपराध सिद्ध होने पर राज्यपाल से केस चलाने की स्वीकृति मांगी थी। राज्यपाल ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 (बीएनएसएस 2023 की धारा 218 के अनुसार) के तहत स्वीकृति प्रदान की है।
इसके अंतर्गत महेश जोशी के खिलाफ पीएमएलए की धारा 3 और उससे जुड़ी धारा 4 के अलावा अन्य तथ्यों पर जो भी अपराध बनते हैं, उनके लिए सक्षम अदालत में मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है। ईडी का आरोप है कि योजना के तहत टेंडर देने और अनियमितताओं को छिपाने के लिए रिश्वत ली गई, जिसके पैसे को धन शोधन के जरिए वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
महेश जोशी पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रह चुके हैं। ईडी ने इस मामले में कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है और संपत्तियों को जब्त किया है। राज्यपाल के इस निर्णय से जांच को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है और अब विशेष अदालत में मुकदमे की कार्यवाही शुरू होगी।
यह घटना राजस्थान की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकि जांच एजेंसी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई बता रही है। मामले की सुनवाई अब आगे बढ़ेगी और अदालत में सबूतों के आधार पर अंतिम निर्णय होगा।