राजीव बिंदल ने कहा: नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सारांश
Key Takeaways
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए है।
- इससे संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
- केंद्र सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।
- स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार हो रहा है।
- महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महत्वपूर्ण है।
धर्मशाला, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
बिंदल ने एक सभा में कहा, "भारत में महिला सशक्तिकरण की सोच में एक बड़ा परिवर्तन आया है। पहले यह केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित था, लेकिन अब महिलाओं के माध्यम से समाज और देश को सुदृढ़ करने पर जोर दिया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि होगी। इससे नीति निर्माण में संतुलन, संवेदनशीलता और समावेशिता का समावेश होगा।
केंद्र सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, बिंदल ने कहा कि महिलाओं को जीवन के प्रत्येक चरण में सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक 'लाइफसाइकिल दृष्टिकोण' अपनाया गया है।
उन्होंने बताया कि 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के तहत 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है और उनके खातों में सीधे 20,101 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। पोषण 2.0 के तहत लगभग 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र हर दिन लगभग 9 करोड़ लोगों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। वहीं, 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के कारण जन्म के समय लिंगानुपात में भी सुधार हुआ है।
राज्य भाजपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि 'मिशन शक्ति' के अंतर्गत 926 वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को एक ही स्थान पर कानूनी, चिकित्सा और मानसिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही, '181' महिला हेल्पलाइन ने देशभर में लगभग 99 लाख महिलाओं की सहायता की है।
आर्थिक सशक्तिकरण पर बिंदल ने बताया कि 'प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' के तहत लगभग 68 प्रतिशत ऋण महिलाओं को दिए गए हैं। इस योजना के तहत महिला उद्यमियों को 14.72 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी गई है।
उन्होंने कहा कि 10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जिनमें से 3 करोड़ से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का उल्लेख करते हुए, बिंदल ने बताया कि मातृ मृत्यु दर 2014 में 130 थी, जो 2023 में घटकर 88 हो गई है। वहीं 'मिशन इंद्रधनुष' के माध्यम से शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है। बिंदल ने कहा कि माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन बढ़ा है और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।