शारदीय नवरात्र 2026: रजरप्पा छिन्नमस्तिका धाम में पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब, छह राज्यों से पहुंचे साधक
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के ऐतिहासिक शक्तिपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में शारदीय नवरात्र 2026 के पहले दिन रविवार, 11 अक्टूबर को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों से हजारों भक्त माता के दर्शन और नवरात्र उपासना के लिए यहाँ पहुँचे, जिनमें तांत्रिक साधना के लिए आए साधक-उपासक भी शामिल थे।
किन राज्यों से आए श्रद्धालु
झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से बड़ी संख्या में साधक-उपासक रजरप्पा पहुँचे। मान्यताओं के अनुसार यह शक्तिपीठ असम के प्रख्यात कामाख्या मंदिर के बाद देश का दूसरा सबसे जागृत और रहस्यमयी तांत्रिक शक्तिस्थल माना जाता है, जो इसे तांत्रिक साधकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
धाम का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
यह पावन स्थल दामोदर और भैरवी (भोरही) नदियों के नैसर्गिक संगम तट पर अवस्थित है। धार्मिक दृष्टि से इस संगम की विशिष्ट मान्यता है — दामोदर नदी पुरुष स्वरूप (नद) के रूप में प्रवाहित होती है और भैरवी से मिलकर 'काम' और 'रति' के प्रतीक का सृजन करती है।
मंदिर के मुख्य पुजारी शुभाशीष पंडा के अनुसार, इसी त्रिकोण संगम पर योनि यंत्र की आधारशिला पर लगभग छः हजार साल पुराना मां छिन्नमस्तिका का मुख्य मंदिर स्थापित है। सनातन धर्म की दस महाविद्याओं में से एक मां छिन्नमस्तिका का यह स्वरूप अत्यंत रौद्र और शक्तिशाली माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में उत्तरी दीवार के पास रखे शिलाखंड पर दक्षिणमुखी मां छिन्नमस्तिका की दुर्लभ प्रतिमा उत्कीर्ण है, जिसमें देवी अपना कटा मस्तक स्वयं अपने हाथों में धारण किए हुई हैं।
विस्तृत आध्यात्मिक परिसर
रजरप्पा धाम केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है — यह एक विस्तृत आध्यात्मिक परिसर है। यहाँ महाकाली मंदिर, सूर्य मंदिर, दस महाविद्या मंदिर (अष्ट मंदिर), बाबा धाम मंदिर, बजरंगबली मंदिर, शंकर मंदिर और विराट रूप मंदिर सहित कुल सात प्रमुख मंदिर स्थित हैं। नवरात्र के पहले दिन इन सभी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और घटस्थापना के अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न किए गए।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर न्यास समिति और जिला प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के घाटों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। गौरतलब है कि नवरात्र के नौ दिनों में यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुँच जाती है, जिससे यह आयोजन प्रशासन के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है।
आने वाले नौ दिनों में रजरप्पा धाम में श्रद्धा और साधना का यह सिलसिला और गहरा होने की उम्मीद है।