जीणमाता शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि: मां शैलपुत्री के रूप में विशेष शृंगार, लख्खी मेले का आगाज
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के सीकर जिले स्थित प्राचीन एवं प्रसिद्ध शक्तिपीठ जीणमाताजी मंदिर में 11 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ हो गया। पहले दिन मां जीण भवानी को शैलपुत्री के रूप में विशेष शृंगार से सजाया गया, जिसके लिए जयपुर से विशेष पोशाक और कोलकाता से चटक लाल रंग का जरी बेस विशेष रूप से मंगाया गया। नवरात्रि के साथ ही परंपरागत लख्खी मेले का भी शुभारंभ हो गया है, जहाँ देशभर से लाखों श्रद्धालु कुलदेवी के दर्शन और मनौती के लिए उमड़ रहे हैं।
भव्य पूजा-अर्चना और कलश स्थापना
मंदिर के पुजारी भवानी शंकर ने बताया कि तड़के 4 बजे मंगला आरती के साथ श्रद्धालुओं का आगमन आरंभ हो गया था। सुबह 8 बजे माता का विशेष शृंगार किया गया, जिसमें जयपुर से मंगाई गई विशेष पोशाक और कोलकाता से आए चटक लाल रंग के जरी बेस का उपयोग हुआ।
उन्होंने बताया कि 21 पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना की गई और माता को पंचामृत से स्नान कराया गया। महाआरती के पश्चात मां को फलों का भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।
जनप्रतिनिधि और श्रद्धालुओं का उत्साह
खंडेला विधायक सुभाष मील ने भी माता के दरबार में शीश नवाया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना और पूजा-अर्चना कर माता के दर्शन किए और पूरे क्षेत्र की जनता के जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की।
इंदौर से पधारीं एक श्रद्धालु ने अपनी आस्था साझा करते हुए कहा कि जीणमाता उनकी कुलदेवी हैं और परिवार में जन्म से लेकर हर शुभ अवसर पर माता का आशीर्वाद लिया जाता है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से यहाँ आ रही हैं और उनकी हर पीढ़ी इस धाम तक पहुँचती है।
जीणमाता धाम का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
प्राचीन जीणमाता मंदिर सीकर जिले के जीणमाताजी गांव में अरावली पर्वतमाला की तीन पहाड़ियों के बीच स्थित है। यह शक्तिपीठ जीण और हर्ष — दोनों भाई-बहन के अटूट प्रेम की प्रतीक के रूप में भी जानी जाती है। मान्यता है कि मां जीण भवानी के दर्शन मात्र से कठिन से कठिन रोग भी दूर हो जाते हैं।
गौरतलब है कि यह मंदिर पूरे भारत में शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है और प्रतिवर्ष नवरात्रि के अवसर पर यहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु सिर पर जलते कोयले की सिगड़ी रखकर अथवा पैदल ही माता की ध्वजा लेकर धाम तक पहुँचने की परंपरा निभाते हैं।
नवरात्रि में विशेष सजावट और लख्खी मेला
नवरात्रि पर्व के दौरान माता की प्रतिमा को कोलकाता और कन्नौज सहित देश के विभिन्न हिस्सों से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों और विशेष पोशाक से सजाया जाता है। लख्खी मेले के दौरान पूरे देश के श्रद्धालु जीण धाम पहुँचकर माता के दरबार में मनौती माँगते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।
इस वर्ष भी मेले में अपार जनसैलाब उमड़ने की उम्मीद है और प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी।