क्या राजसमंद का सरकारी छात्रावास जनजाति बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ा रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- राजसमंद का सरकारी छात्रावास शिक्षा और संस्कृति का एक अद्भुत केंद्र है।
- छात्राएं एक-दूसरे की संस्कृति का आदान-प्रदान कर रही हैं।
- छात्रावास में आयोजित गतिविधियां आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में सहायक हैं।
- छात्राओं की वार्डन का सहयोग उन्हें सुरक्षा और अपनापन प्रदान करता है।
- यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
राजसमंद, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित चंद्रदीप कॉलोनी का राजकीय जनजाति बालिका आवासीय महाविद्यालय वर्तमान में केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच भी बन गया है। यहां रह रही आदिवासी अंचल की छात्राएं न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त कर रही हैं, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और अपनाने का भी अवसर प्राप्त कर रही हैं।
भारत में संस्कृति का आदान-प्रदान एक प्राचीन परंपरा है। जब विभिन्न प्रांतों के लोग एक-दूसरे की कला, नृत्य, संगीत और रहन-सहन से परिचित होते हैं, तो आपसी समझ और सौहार्द बढ़ता है। यही परंपरा राजसमंद के इस सरकारी छात्रावास में भी दिखाई दे रही है। महाविद्यालय में पढ़ाई करने वाली छात्राएं सप्ताहभर की पढ़ाई और दिनचर्या की थकान को दूर करने के लिए शनिवार और रविवार को लोक नृत्य, गीत-संगीत और खेलकूद जैसी गतिविधियों में भाग लेती हैं।
आदिवासी क्षेत्र से आई छात्राएं अपने पारंपरिक लोक नृत्य और गीत अन्य छात्राओं को सिखाती हैं, वहीं दूसरी ओर वे नई संस्कृतियों और कलाओं के बारे में भी सीख रही हैं। यह प्रक्रिया केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे छात्राओं का मानसिक और शारीरिक विकास भी हो रहा है। लोक नृत्य के माध्यम से जहां शरीर स्वस्थ रहता है, वहीं सामूहिक गतिविधियों से मन भी प्रसन्न और तनावमुक्त होता है।
छात्रावास में आयोजित खेलकूद और गीत गायन प्रतियोगिताएं आपसी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ टीम भावना को भी बढ़ावा देती हैं। इन सभी गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव छात्राओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
इस पूरे उपक्रम में छात्रावास की वार्डन प्रतिभा त्रिवेदी की भूमिका भी उल्लेखनीय है। वे छात्राओं के साथ एक अभिभावक और परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार करती हैं, जिससे बच्चियों को अपनापन और सुरक्षा का एहसास होता है। संगीत की धुनों पर नाचती-गाती ये छात्राएं अब इस छात्रावास को अपना दूसरा घर मानने लगी हैं।
राजसमंद के इस सरकारी छात्रावास में संस्कृति के आदान-प्रदान की यह अनूठी पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक समृद्धि भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
छात्रावास की वार्डन प्रतिभा त्रिवेदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यहां पर अभी 65 बच्चे हैं और 75 की सीट है। पूरे सप्ताह की थकान मिटाने के लिए शनिवार को खेल का आयोजन किया जाता है। कई तरह के कोर्स भी चलाए जाते हैं, जिसमें उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है।
छात्रा चंपा कुमारी ने बताया कि हमें यहां बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कार्यक्रम में सभी छात्राएं एक साथ रहती हैं, जिससे हमें बहुत अच्छा लगता है।
छात्रा कस्तूरी गरासिया ने बताया कि हम 2 साल से यहां पर हैं। यहां पर हमारा काफी ध्यान रखा जाता है। हर शनिवार को कार्यक्रम और खेल का आयोजन होता है जिससे हमें बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है।