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झारखंड के रामगढ़ में हाथियों ने मचाया आतंक, तीन लोगों की हुई मौत

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झारखंड के रामगढ़ में हाथियों ने मचाया आतंक, तीन लोगों की हुई मौत

सारांश

झारखंड के रामगढ़ में जंगली हाथियों के हमले में तीन लोग मारे गए। इस घटना ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश पैदा कर दिया है। क्या वन विभाग अपनी जिम्मेदारियों में लापरवाह है?

मुख्य बातें

तीन लोगों की मृत्यु हुई हाथियों के हमले में घटना से क्षेत्र में भय और आक्रोश वन विभाग पर लापरवाही का आरोप मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलेगा हाथियों के साथ संघर्ष में बढ़ोतरी

रामगढ़, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड क्षेत्र में एक जंगली हाथियों के समूह ने शुक्रवार सुबह तीन लोगों को कुचलकर मार डाला। मृतकों में ईंट भट्ठा में काम करने वाले दो श्रमिक और एक वृद्ध ग्रामीण शामिल हैं।

इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भय और वन विभाग के प्रति गुस्से का माहौल पैदा हो गया है। पहली घटना बांदा गांव की है, जहां तड़के सुबह लगभग चार बजे ईंट भट्ठा में काम करने वाले दो श्रमिक, धीरज भुइयां और जुगल भुइयां, शौच के लिए निकले थे। इसी दौरान, हाथियों के समूह ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और उन्हें कुचल दिया। धीरज, जो पतरातू के तालाटांड़ का निवासी था, और जुगल, जो रामगढ़ के कुजू का निवासी था।

दूसरी घटना मुरपा गांव में हुई, जहां 80 वर्षीय रामदेव साव सुबह-सुबह महुआ चुनने के लिए घर से निकले थे। हाथियों ने उन पर हमला कर दिया और कुचलकर उनकी जान ले ली। जानकारी के अनुसार, 12 हाथियों का यह समूह बोकारो के जंगलों से होते हुए रामगढ़ जिले के रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचा है। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

बांदा पंचायत के मुखिया कुलदीप तिवारी ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि हाथियों के आने की सूचना पहले ही दी गई थी, लेकिन रिहायशी क्षेत्रों से उन्हें खदेड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

झारखंड में हाथियों और मानवों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले सप्ताह कोडरमा के मरकच्चो में हाथियों के हमले में तीन लोग मारे गए थे। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले 50 दिनों में हाथियों के हमलों में 28 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे समुदाय में वन विभाग की लापरवाही के प्रति गुस्सा भी है। यह स्पष्ट है कि हाथियों के आवागमन की सूचना के बावजूद उचित कदम नहीं उठाए गए।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस घटना में कितने लोग मारे गए?
इस घटना में कुल तीन लोग मारे गए हैं।
क्या सरकार मृतकों के परिवारों को मुआवजा देगी?
हाँ, प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
हाथियों का यह झुंड कहाँ से आया?
यह हाथियों का झुंड बोकारो के जंगलों से होता हुआ रामगढ़ जिले में आया है।
क्या वन विभाग ने घटना के बाद कोई कार्रवाई की?
हाँ, वन विभाग और पुलिस घटना के बाद मौके पर पहुंचे और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
क्या हाथियों और मानवों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है?
जी हाँ, झारखंड में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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