क्या पीएम मोदी के लिए अभद्र टिप्पणी निंदनीय नहीं है? : राशिद अल्वी

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क्या पीएम मोदी के लिए अभद्र टिप्पणी निंदनीय नहीं है? : राशिद अल्वी

सारांश

बिहार के दरभंगा में पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा निंदनीय है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मुद्दे की गहरी जांच की मांग की गई है।

मुख्य बातें

कानूनी कार्रवाई की मांग भाषाई संयम का महत्व राजनीतिक संवाद की जिम्मेदारी जनता का गुस्सा और उसके कारण अतीत की टिप्पणियाँ का संदर्भ

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों के उपयोग को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा न केवल निंदनीय है, बल्कि इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

राशिद अल्वी ने स्पष्ट किया कि न तो कांग्रेस पार्टी और न ही कोई समझदार व्यक्ति ऐसी शब्दावली का समर्थन कर सकता है। उन्होंने मामले की गहरी जांच की मांग की ताकि सच सामने आए।

उन्होंने कहा, “किसी को भी, चाहे वह प्रधानमंत्री हों, राहुल गांधी हों या अन्य कोई, उनके खिलाफ अपशब्दों का उपयोग करने का अधिकार नहीं है। यह गलत है और इसे सहन नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने स्वीकार किया कि जनता में सरकार के खिलाफ गुस्सा हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी नेता के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करे।

राशिद अल्वी ने कहा कि भाजपा नेताओं ने अतीत में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और यहाँ तक कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की हैं, जिसका प्रतिक्रिया भी देखने को मिलता है। इस तरह के अपशब्द किसी भी राजनीतिक दल के अंदर, किसी भी नेता को शोभा नहीं देते हैं और यह जिम्मेदारी सभी राजनीतिक दलों की है कि वे अपने कार्यकर्ताओं को इस तरह की शब्दावली का प्रयोग करने से रोकें। लेकिन यह सही है कि इसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी ने की थी।

वहीं, संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपे जाने को लेकर राशिद अल्वी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं इन दावों पर पूरी तरह यकीन नहीं कर सकता। यह रिपोर्ट गोपनीय है और जब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया जाता, सच्चाई का पता नहीं चल सकता। इसे कैबिनेट में रखा जाएगा और उसके बाद ही जनता के सामने पेश किया जाएगा। लेकिन मैं संभल को अच्छी तरह जानता हूं, वहाँ के हिंदू और मुसलमान शांतिप्रिय लोग हैं।

उन्होंने कहा, “जिस तरीके से उत्तर प्रदेश में सरकार है, रिपोर्ट पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता है। आप कैसे कह सकते हैं कि किसकी आबादी घटी, किसकी बढ़ी। क्या आपने जनगणना की है? क्या आप पूरे जिले में लोगों तक पहुंचे हैं? कमरे के अंदर बैठकर, लोगों से बात करके या ब्यूरोक्रेसी से बात करके आप इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकते। जनगणना होने वाली है। 2027 में जनगणना की रिपोर्ट आएगी, तब सही स्थिति सामने आएगी।

अल्वी ने कहा कि 1943 के कानून के तहत धार्मिक स्थलों की स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, भाजपा द्वारा मथुरा, बनारस और अब संभल में विवाद खड़ा करने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने आगे अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के संदर्भ में कहा कि देखिए, भारत कभी किसी के दबाव में फैसले नहीं करता। लेकिन जो टैरिफ बढ़ा है, वह भारत सरकार की गलत विदेश नीति का परिणाम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को संयमित भाषा का प्रयोग करने की सलाह दें। अभद्र भाषा का उपयोग केवल राजनीतिक संवाद को खराब करता है। हमें एक जिम्मेदार लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राशिद अल्वी ने कानूनी कार्रवाई की मांग की?
जी हां, राशिद अल्वी ने कहा कि ऐसी भाषा न केवल निंदनीय है, बल्कि इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
क्यों राशिद अल्वी ने इस मामले की जांच की मांग की?
उन्होंने कहा कि इस मामले की गहन जांच की जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए।
राष्ट्र प्रेस
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