9 अक्टूबर 2026
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रेजीनगर उपचुनाव: अभिषेक बनर्जी के वोट-आंकड़ों के दावे को चुनाव आयोग ने खारिज किया

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रेजीनगर उपचुनाव: अभिषेक बनर्जी के वोट-आंकड़ों के दावे को चुनाव आयोग ने खारिज किया

सारांश

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रेजीनगर उपचुनाव में बूथ 109 पर मतदाताओं से अधिक वोट मिलने का दावा किया, लेकिन मुर्शिदाबाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने आँकड़े सार्वजनिक कर इसे गलत ठहराया — पंजीकृत मतदाता 772 नहीं, 1,109 थे।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि बूथ 109 पर BJP उम्मीदवार को 909 वोट मिले, जबकि पंजीकृत मतदाता केवल 772 थे।
मुर्शिदाबाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उस बूथ पर वास्तविक पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 1,109 थी और कुल 972 वोट पड़े।
पश्चिम बंगाल CEO कार्यालय ने SIR के दौरान मतदाता नाम हटाने से चुनाव प्रभावित होने के दावे को भी खारिज किया।
SIR प्रक्रिया संविधान अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत संपन्न हुई, जिसमें दो स्तरों पर अपील का प्रावधान है।
रेजीनगर उपचुनाव में BJP के सखाराव सरकार की जीत के बाद यह विवाद उत्पन्न हुआ।

चुनाव आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव में एक मतदान केंद्र पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विजयी उम्मीदवार सखाराव सरकार को वहाँ पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या से अधिक वोट मिले। मुर्शिदाबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी ने आधिकारिक आँकड़े सार्वजनिक करते हुए इस दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत ठहराया।

अभिषेक बनर्जी का दावा क्या था

अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 109 पर BJP उम्मीदवार को 909 वोट मिले, जबकि उस केंद्र पर पंजीकृत मतदाताओं की संख्या केवल 772 थी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि किसी एक पार्टी को एक केंद्र पर कुल मतदाताओं से अधिक वोट कैसे मिल सकते हैं। अपनी पोस्ट में उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि उत्तर कोरिया के लिए भी इस चुनावी गणित को समझाना मुश्किल होगा।

जिला निर्वाचन अधिकारी का स्पष्टीकरण

बनर्जी की पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद मुर्शिदाबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक आँकड़े जारी किए। अधिकारी के अनुसार, मतदान केंद्र संख्या 109 की मतदाता सूची में कुल 1,109 पंजीकृत मतदाता थे — न कि 772 जैसा दावा किया गया था। उस केंद्र पर सभी उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 972 वोट पड़े, जो पंजीकृत मतदाताओं की संख्या से कम है। इस स्पष्टीकरण के बाद बनर्जी के दावे की बुनियाद ही कमज़ोर पड़ गई।

एसआईआर पर दूसरे दावे को भी नकारा

इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एक अन्य सोशल मीडिया दावे को भी खारिज किया। 'डीकोडर' नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में आरोप लगाया गया था कि SIR के दौरान नाम हटाने से इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए इसे सबक के रूप में देखा जाना चाहिए।

CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत निर्धारित मानकों एवं सुरक्षा उपायों के अनुरूप संपन्न की गई। कार्यालय ने कहा कि इसका उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है

CEO कार्यालय के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम निर्धारित प्रक्रिया के बिना नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए नोटिस जारी करना, सुनवाई का अवसर देना और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से कारणों सहित आदेश पारित करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त संबंधित फैसलों के विरुद्ध दो स्तरों पर अपील की व्यवस्था भी उपलब्ध है। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के चुनावी आँकड़े SIR के कारण किसी खास राजनीतिक दल को नुकसान पहुँचने के दावे का समर्थन नहीं करते।

आगे क्या होगा

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है और आगामी विधानसभा चुनावों की आहट महसूस की जा रही है। गौरतलब है कि रेजीनगर सीट पर BJP के सखाराव सरकार की जीत ने विपक्षी खेमे में हलचल मचाई है। चुनाव आयोग का यह त्वरित खंडन सोशल मीडिया पर फैल रही चुनावी गलत सूचना के विरुद्ध संस्थागत जवाबदेही का संकेत है, हालाँकि राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

109 का अंतर कोई मामूली टाइपो नहीं, बल्कि एक तिहाई से अधिक मतदाताओं की 'अनुपस्थिति' है — इतनी बड़ी गलती पर TMC ने अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। यह घटना उस बड़े पैटर्न की भी याद दिलाती है जिसमें हारने वाले दल चुनाव के तुरंत बाद प्रक्रियागत आरोपों का सहारा लेते हैं, जो संस्थाओं में जन-विश्वास को कमज़ोर करता है। चुनाव आयोग की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन ऐसे दावों की जवाबदेही तय करने का कोई तंत्र अभी तक स्थापित नहीं है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी ने रेजीनगर उपचुनाव में क्या दावा किया था?
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 109 पर BJP उम्मीदवार को 909 वोट मिले, जबकि वहाँ पंजीकृत मतदाताओं की संख्या केवल 772 थी। उन्होंने इसे चुनावी धाँधली का प्रमाण बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाए।
चुनाव आयोग ने इस दावे को कैसे खारिज किया?
मुर्शिदाबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी ने आधिकारिक आँकड़े जारी कर स्पष्ट किया कि बूथ 109 पर पंजीकृत मतदाताओं की वास्तविक संख्या 1,109 थी और कुल मिलाकर 972 वोट पड़े — जो पंजीकृत संख्या से कम है। इससे बनर्जी के दावे का आधार ही गलत साबित हो गया।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों उठा?
SIR मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली समीक्षा प्रक्रिया है। 'डीकोडर' नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने दावा किया कि SIR के दौरान नाम हटाने से पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे प्रभावित हुए, जिसे CEO कार्यालय ने आँकड़ों के आधार पर खारिज कर दिया।
मतदाता सूची से नाम हटाने की कानूनी प्रक्रिया क्या है?
CEO कार्यालय के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम हटाने के लिए नोटिस जारी करना, सुनवाई का अवसर देना और ERO द्वारा कारणों सहित आदेश पारित करना अनिवार्य है। इसके अलावा संबंधित फैसलों के विरुद्ध दो स्तरों पर अपील का प्रावधान भी है।
रेजीनगर उपचुनाव का परिणाम क्या रहा?
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में BJP के उम्मीदवार सखाराव सरकार विजयी रहे। इसी जीत के बाद TMC ने मतगणना के आँकड़ों पर सवाल उठाए थे।
राष्ट्र प्रेस
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