14 अक्टूबर 2026
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गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों को शामिल करने की माँग, FSUI ने PM मोदी को लिखा पत्र

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गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों को शामिल करने की माँग, FSUI ने PM मोदी को लिखा पत्र

सारांश

फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने PM मोदी को पत्र लिखकर गणतंत्र दिवस परेड में नाविकों को जगह और शहीद नाविकों के परिजनों को वीरता सम्मान देने की माँग की — एक ऐसे समुदाय के लिए जो वैश्विक 90% व्यापार की जीवनरेखा है, पर राष्ट्रीय मंच पर अब तक अदृश्य रहा है।

मुख्य बातें

FSUI महासचिव मनोज यादव ने 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों को शामिल करने की माँग की।
दुनिया के 90% से अधिक व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है, जिसमें भारतीय नाविकों की केंद्रीय भूमिका है।
फारस की खाड़ी , लाल सागर और काला सागर में ड्यूटी के दौरान कई भारतीय नाविकों की जान गई है।
FSUI ने शहीद नाविकों के परिवारों को बहादुरी पुरस्कार या उपयुक्त राष्ट्रीय वीरता सम्मान देने की अपील की है।
यह पहल कैप्टन विजय राज पाठक के प्रयासों और देशभर के नाविकों की सामूहिक माँग पर आधारित है।

फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों (सीफेरर्स) के एक विशेष दल को शामिल करने की माँग की है। साथ ही, फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले नाविकों के परिजनों को राष्ट्रीय सम्मान देने की अपील भी की गई है।

माँग की पृष्ठभूमि

FSUI के अनुसार, यह पहल कैप्टन विजय राज पाठक के विशेष प्रयासों और देशभर के नाविकों की सामूहिक माँग पर की गई है। संगठन का कहना है कि भारतीय नाविकों को देश की 'दूसरी रक्षा पंक्ति' के रूप में मान्यता प्राप्त है, और उनके योगदान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलना चाहिए।

गौरतलब है कि दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है और भारतीय नाविक वैश्विक जहाजरानी उद्योग में बड़ी संख्या में सेवाएँ दे रहे हैं। आज़ादी से पहले और बाद में भी इन नाविकों ने देश की आर्थिक एवं सामरिक ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।

कोविड-19 और युद्धक्षेत्रों में योगदान

FSUI ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नाविकों की असाधारण भूमिका का उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, जब दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखलाएँ चरमरा रही थीं, तब भी भारतीय नाविकों ने कठिन परिस्थितियों में दवाइयों, ज़रूरी सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की।

इसके अलावा, पत्र में बताया गया है कि पिछले कुछ महीनों में फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे संवेदनशील एवं जोखिम भरे समुद्री क्षेत्रों में काम करते हुए कई भारतीय नाविकों ने अपनी जान गँवाई है। ये व्यापारिक मार्ग वैश्विक आर्थिक गतिविधि की रीढ़ हैं।

FSUI की दो प्रमुख माँगें

संगठन ने प्रधानमंत्री के समक्ष दो ठोस माँगें रखी हैं। पहली, आगामी गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों के एक प्रतिनिधि दल को मार्च करने का अवसर दिया जाए। दूसरी, उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में सेवा के दौरान शहीद होने वाले नाविकों के परिवारों को बहादुरी पुरस्कार या अन्य उपयुक्त राष्ट्रीय वीरता सम्मान प्रदान किए जाएँ।

FSUI का तर्क है कि भारतीय नाविक प्रशिक्षित, अनुशासित और संगठित कार्यबल हैं। परेड में उनकी भागीदारी से देश की ओर से उनके प्रति आभार और सम्मान का स्पष्ट संदेश जाएगा।

आगे की राह

FSUI ने कहा है कि यदि सरकार को इस संबंध में किसी अतिरिक्त जानकारी या सहयोग की आवश्यकता होगी, तो संगठन उसे उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और संबंधित मंत्रालय इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या भारतीय नाविकों को 26 जनवरी 2027 की परेड में ऐतिहासिक स्थान मिल पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राष्ट्रीय सम्मान के किसी भी औपचारिक ढाँचे में लगभग अनुपस्थित है। FSUI की माँग प्रतीकात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण है, परंतु असली सवाल यह है कि क्या सरकार केवल परेड की भागीदारी तक सीमित रहेगी, या समुद्री बीमा, परिवार कल्याण और जोखिम क्षेत्र भत्ते जैसे ठोस नीतिगत सुधारों की ओर भी कदम बढ़ाएगी। कोविड और लाल सागर संकट ने यह साबित किया है कि इन नाविकों का बलिदान सैन्य जोखिम से कम नहीं — फिर भी उनके लिए कोई औपचारिक राष्ट्रीय स्मारक या सम्मान प्रणाली नहीं है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FSUI ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने PM मोदी को पत्र लिखकर गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों को शामिल करने और जोखिम वाले क्षेत्रों में जान गँवाने वाले नाविकों के परिजनों को राष्ट्रीय सम्मान देने की माँग की है। यह पहल कैप्टन विजय राज पाठक के प्रयासों और देशभर के नाविकों की माँग पर आधारित है।
भारतीय नाविकों को 'दूसरी रक्षा पंक्ति' क्यों कहा जाता है?
भारतीय नाविक वैश्विक समुद्री व्यापार को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, क्योंकि दुनिया का 90% से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। आजादी से पहले और बाद में उन्होंने देश की आर्थिक व सामरिक जरूरतों को पूरा किया है, इसलिए उन्हें देश की 'दूसरी रक्षा पंक्ति' की मान्यता मिली हुई है।
FSUI ने किन दो प्रमुख माँगें रखी हैं?
FSUI ने दो माँगें रखी हैं — पहली, गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों के एक प्रतिनिधि दल को मार्च करने का अवसर दिया जाए। दूसरी, फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले नाविकों के परिजनों को बहादुरी पुरस्कार या वीरता सम्मान प्रदान किए जाएँ।
कोविड-19 के दौरान भारतीय नाविकों ने क्या किया?
कोविड-19 महामारी के दौरान जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ चरमरा रही थीं, भारतीय नाविकों ने कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए दवाइयों, जरूरी सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की। FSUI ने इसे पत्र में विशेष रूप से उल्लेखित कर उनके बलिदान की आधिकारिक मान्यता की माँग की है।
क्या भारतीय नाविक पहले कभी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए हैं?
FSUI के पत्र से यह स्पष्ट होता है कि अब तक भारतीय नाविकों को गणतंत्र दिवस परेड में औपचारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है। संगठन की माँग है कि इस कमी को दूर किया जाए और उनके योगदान को राष्ट्रीय मंच पर उचित सम्मान मिले।
राष्ट्र प्रेस
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