गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों को शामिल करने की माँग, FSUI ने PM मोदी को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों (सीफेरर्स) के एक विशेष दल को शामिल करने की माँग की है। साथ ही, फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले नाविकों के परिजनों को राष्ट्रीय सम्मान देने की अपील भी की गई है।
माँग की पृष्ठभूमि
FSUI के अनुसार, यह पहल कैप्टन विजय राज पाठक के विशेष प्रयासों और देशभर के नाविकों की सामूहिक माँग पर की गई है। संगठन का कहना है कि भारतीय नाविकों को देश की 'दूसरी रक्षा पंक्ति' के रूप में मान्यता प्राप्त है, और उनके योगदान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है और भारतीय नाविक वैश्विक जहाजरानी उद्योग में बड़ी संख्या में सेवाएँ दे रहे हैं। आज़ादी से पहले और बाद में भी इन नाविकों ने देश की आर्थिक एवं सामरिक ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।
कोविड-19 और युद्धक्षेत्रों में योगदान
FSUI ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नाविकों की असाधारण भूमिका का उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, जब दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखलाएँ चरमरा रही थीं, तब भी भारतीय नाविकों ने कठिन परिस्थितियों में दवाइयों, ज़रूरी सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की।
इसके अलावा, पत्र में बताया गया है कि पिछले कुछ महीनों में फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे संवेदनशील एवं जोखिम भरे समुद्री क्षेत्रों में काम करते हुए कई भारतीय नाविकों ने अपनी जान गँवाई है। ये व्यापारिक मार्ग वैश्विक आर्थिक गतिविधि की रीढ़ हैं।
FSUI की दो प्रमुख माँगें
संगठन ने प्रधानमंत्री के समक्ष दो ठोस माँगें रखी हैं। पहली, आगामी गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों के एक प्रतिनिधि दल को मार्च करने का अवसर दिया जाए। दूसरी, उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में सेवा के दौरान शहीद होने वाले नाविकों के परिवारों को बहादुरी पुरस्कार या अन्य उपयुक्त राष्ट्रीय वीरता सम्मान प्रदान किए जाएँ।
FSUI का तर्क है कि भारतीय नाविक प्रशिक्षित, अनुशासित और संगठित कार्यबल हैं। परेड में उनकी भागीदारी से देश की ओर से उनके प्रति आभार और सम्मान का स्पष्ट संदेश जाएगा।
आगे की राह
FSUI ने कहा है कि यदि सरकार को इस संबंध में किसी अतिरिक्त जानकारी या सहयोग की आवश्यकता होगी, तो संगठन उसे उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और संबंधित मंत्रालय इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या भारतीय नाविकों को 26 जनवरी 2027 की परेड में ऐतिहासिक स्थान मिल पाएगा।