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क्या गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा की झांकी दिखाएंगे संजय लीला भंसाली?

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क्या गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा की झांकी दिखाएंगे संजय लीला भंसाली?

सारांश

इस गणतंत्र दिवस पर, भारतीय सिनेमा को मिलने वाले सम्मान पर चर्चा चल रही है। संजय लीला भंसाली की झांकी का प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न केवल भारतीय सिनेमा की पहचान को बढ़ावा देगा, बल्कि दर्शकों के लिए भी एक यादगार अनुभव होगा। जानें इस पहल के पीछे की कहानी और इसका महत्व!

मुख्य बातें

गणतंत्र दिवस पर भारतीय सिनेमा को विशेष सम्मान मिल रहा है।
संजय लीला भंसाली द्वारा झांकी का प्रदर्शन भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करेगा।
इस पहल से सांस्कृतिक धरोहर की पहचान मजबूत होगी।
आईएफटीडीए ने प्रधानमंत्री को आभार व्यक्त किया है।
झांकी दर्शकों को एक यादगार अनुभव प्रदान करेगी।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस पर हर वर्ष कर्तव्य पथ पर निकलने वाली झांकियां देश के विविधता, इतिहास और रचनात्मकता को दर्शाती हैं। इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर भारतीय सिनेमा को मिल रहा सम्मान विशेष रूप से चर्चा का विषय है। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक संजय लीला भंसाली की ओर से भारतीय सिनेमा पर आधारित झांकी की प्रस्तुति को लेकर अब फिल्म इंडस्ट्री की एक प्रमुख संस्था ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया है।

इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (आईएफटीडीए) ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा, 'भारतीय फिल्म उद्योग इस बात से गर्वित है कि संजय लीला भंसाली जैसे प्रतिष्ठित निर्देशक को गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। वह कर्तव्य पथ पर सदाबहार फिल्मों पर आधारित एक विशेष झांकी प्रस्तुत करेंगे।'

आईएफटीडीए ने पत्र में भंसाली को भारतीय सिनेमा के शोमैन और मास्टर ऑफ क्राफ्ट के तौर पर संबोधित करते हुए कहा, 'भंसाली की फिल्मों की भव्यता, उनकी कहानी कहने की शैली और किरदारों की गहराई भारतीय सिनेमा की पहचान बन चुकी है। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय मंच पर उनकी फिल्मों से प्रेरित झांकी का प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व की बात है।'

पत्र में आगे लिखा गया, 'यह झांकी दर्शकों के लिए यादगार होगी। इससे न सिर्फ परेड देखने वाले लोगों का मनोरंजन बढ़ेगा, बल्कि परेड में भाग लेने वालों में भी नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा। भारतीय सिनेमा की यह प्रस्तुति देश की सांस्कृतिक शक्ति को मजबूती से सामने लाएगी।'

संस्था ने इस पहल के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएफडीसी) का भी आभार व्यक्त किया है। पत्र में कहा गया, 'इन संस्थानों के सहयोग और पहल के बिना इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुति संभव नहीं होती। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार भारतीय सिनेमा को केवल मनोरंजन के माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देख रही है।'

आईएफटीडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना करते हुए पत्र में कहा, 'प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच के कारण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है। फिल्म जगत इस पहल के लिए प्रधानमंत्री का आभारी रहेगा और इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में देखा जाएगा।'

पत्र के अंत में आईएफटीडीए ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा, 'गणतंत्र दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सिनेमा को यह स्थान देना फिल्म इंडस्ट्री के लिए सम्मान की बात है। संजय लीला भंसाली की झांकी न केवल भारतीय फिल्मों की कला और सौंदर्य को दर्शाएगी, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।'

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी इसे मान्यता देगी। आईएफटीडीए का प्रधानमंत्री को आभार पत्र स्पष्ट करता है कि सरकार फिल्म उद्योग को एक गंभीरता से ले रही है, जो हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता को और भी मजबूत बनाएगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणतंत्र दिवस पर झांकी का महत्व क्या है?
गणतंत्र दिवस पर झांकियां देश की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती हैं। यह अवसर उन क्षेत्रों को मान्यता देता है जो हमारे समाज की पहचान हैं।
संजय लीला भंसाली की झांकी में क्या खास होगा?
भंसाली की झांकी भारतीय सिनेमा की भव्यता और उनकी कहानी कहने की शैली को दर्शाएगी, जो दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बनेगा।
आईएफटीडीए का इस पहल में क्या योगदान है?
आईएफटीडीए ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भारतीय सिनेमा को मान्यता देने के लिए आभार व्यक्त किया है, जिससे यह पहल और भी महत्वपूर्ण बन गई है।
राष्ट्र प्रेस
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