क्या गणतंत्र दिवस परेड में त्रि-सेवा की झांकी ‘ऑपरेशन सिंदूर संयुक्तता से विजय’ दिखेगी?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की त्रि-सेवा झांकी आत्मनिर्भरता और सैन्य शक्ति का प्रतीक है।
- ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है।
- थलसेना, नौसेना और वायुसेना का बेहतर तालमेल दर्शाता है।
- स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब कई मामलों में आगे निकल चुकी हैं।
- यह झांकी भारत की रणनीतिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करती है।
नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा झांकी एक प्रमुख आकर्षण बनेगी। कर्तव्य पथ पर भारतीय सशस्त्र बलों की झांकी ‘ऑपरेशन सिंदूर: जॉइंटनेस के माध्यम से विजय’ को प्रदर्शित करेगी। यह झांकी भारत की विकसित होती सैन्य सोच का एक सशक्त और प्रभावी प्रदर्शन है।
इसमें यह दर्शाया जाएगा कि सटीक हमला, तीनों सेनाओं का तालमेल और स्वदेशी ताकत जीत का सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब निर्णायक, संयुक्त और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति के तहत मजबूती से खड़ा है। उल्लेखनीय है कि भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पिछले वर्ष पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुल नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। ऑपरेशन सिंदूर आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत को भी प्रदर्शित करता है।
झांकी में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतरीन तालमेल को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है। झांकी की शुरुआत भारतीय नौसेना के दमखम से होती है, जो समुद्र में नौसेना के दबदबे को दर्शाता है। इसके बाद भारतीय थलसेना का निर्णायक रूप सामने आता है, जहां एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर की सटीक गोलाबारी से दुश्मन के मंसूबों को नाकाम किया जाता है।
झांकी के बीच में भारत की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की झलक दिखाई देती है, जिसका मूल मंत्र है तेज कार्रवाई, हालात को नियंत्रण में रखते हुए दबाव बढ़ाना और सटीक वार करना। इसमें हारोप लोइटरिंग म्यूनिशन के जरिए दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को खत्म करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद स्कैल्प मिसाइलों से लैस राफेल विमान आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करता दिखाई देगा।
यह साफ दिखाता है कि भारत गहराई तक, तेजी से और पूरी सटीकता के साथ हमला करने में सक्षम है। सबसे निर्णायक दृश्य तब आता है जब भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली की लंबी पहुंच प्रदर्शित होती है। एस-400 सिस्टम 350 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेदते हुए दुश्मन के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म को निष्क्रिय कर देता है। इसका संदेश स्पष्ट है, भारत पहले देखता है, पहले फैसला करता है और पहले वार करता है। ऑपरेशन सिंदूर का हर चरण यह दिखाता है कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल अब पूरी तरह परिपक्व हो चुका है।
यह भी स्पष्ट है कि आतंक और खून एक साथ नहीं बहेंगे और जो भी आतंकवाद को बढ़ावा देगा या पनाह देगा, उसे तेज, सटीक और कड़ा जवाब मिलेगा। ब्रांड इंडिया डिफेंस की ताकत से सजी यह झांकी बताती है कि भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब सिर्फ बराबरी नहीं कर रहीं, बल्कि कई मामलों में आगे निकल चुकी हैं। तीनों सेनाओं का आपसी तालमेल, नागरिक और सैन्य सहयोग तथा रियल-टाइम ऑपरेशनल समन्वय भारत की विश्वसनीय सैन्य शक्ति की रीढ़ बन चुके हैं। कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि यह भारत का रणनीतिक ऐलान है कि ‘जॉइंटनेस से विजय’ अब उसकी पहचान और उसकी ताकत का नया हस्ताक्षर है।