क्या 33 वर्षों में वैष्णो देवी की यात्रा पर ऐसा भयानक मंजर पहले कभी देखा गया?

सारांश
Key Takeaways
- भूस्खलन ने तीर्थयात्रियों के बीच हाहाकार मचाया।
- 33 वर्षों में पहली बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।
- सुरक्षा के लिए यात्रा को रोक दिया गया है।
- नदियों का उफान खतरे का संकेत है।
- मौसम की जानकारी लेना जरूरी है।
रियासी, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। वैष्णो देवी मंदिर के पास 26 अगस्त को अर्द्धकुंवारी के निकट इंद्रप्रस्थ भोजनालय में आए भूस्खलन ने गंभीर तबाही मचाई। वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आए तीर्थयात्रियों ने बताया कि स्थिति बेहद डरावनी थी, चारों ओर चीख-पुकार सुनाई दी।
पटना से आए एक भक्त ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भूस्खलन के समय भारी बारिश हो रही थी, जिससे हर तरफ हाहाकार मच गया। वे 50 मीटर पीछे थे, जिसके कारण उनकी जान बच गई, लेकिन उनके दो साथी लापता हैं। उन्होंने सहायता केंद्र में जानकारी ली और अस्पताल जाकर भी चेक कर रहे हैं।
श्रद्धालु ने कहा कि वे 33 साल से वैष्णो देवी आ रहे हैं, लेकिन ऐसा डरावना मंजर पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने इस घटना को बादल फटने जैसी स्थिति करार दिया है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, "सभी नदियां उफान पर हैं और गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही हैं। पानी खतरे के स्तर से ऊपर बढ़ गया है। अपने 48 वर्षों के जीवन में, मैंने कभी इतना पानी नहीं देखा, न ही मेरे पिता ने और न ही किसी और ने ऐसी स्थिति देखी है।"
नैना (श्रद्धालु) ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ दिल्ली से वैष्णो देवी आई थीं। उन्होंने कहा कि यहां भूस्खलन और भारी बारिश के कारण स्थिति अत्यंत नाजुक बन गई है। 26 अगस्त को अर्धकुंवारी के पास आए भूस्खलन के बाद से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण यात्रा पूरी तरह से रोक दी गई है। तीर्थयात्रियों को चार किलोमीटर पहले ही उतार दिया गया। हालांकि, जिला प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है। नैना ने प्रशासन के यात्रा रोकने के फैसले की सराहना की, क्योंकि यह सुरक्षा के लिए आवश्यक था। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रद्धालु यात्रा से पहले मौसम विभाग की जानकारी अवश्य लें, क्योंकि ट्रेनें भी रद्द हो रही हैं और स्थिति नाजुक बनी हुई है।