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राजद के 30वें स्थापना दिवस पर लालू प्रसाद का आह्वान: गरीबों की लड़ाई और भाजपा के खिलाफ एकजुटता

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राजद के 30वें स्थापना दिवस पर लालू प्रसाद का आह्वान: गरीबों की लड़ाई और भाजपा के खिलाफ एकजुटता

सारांश

राजद के 30 साल पूरे होने पर लालू प्रसाद का संदेश महज़ उत्सव नहीं था — यह राजनीतिक रणनीति भी था। गरीबों की लड़ाई, संविधान की रक्षा और भाजपा के खिलाफ व्यापक विपक्षी गठबंधन का आह्वान करते हुए उन्होंने बिहार चुनाव से पहले अपनी वैचारिक ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश की।

मुख्य बातें

लालू प्रसाद यादव ने 5 जुलाई 2025 को राजद के 30वें स्थापना दिवस पर लिखित संदेश जारी किया।
राजद की स्थापना 5 जुलाई 1997 को गरीबों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए की गई थी।
लालू प्रसाद ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया।
राममनोहर लोहिया , जयप्रकाश नारायण , कर्पूरी ठाकुर और डॉ.
आंबेडकर की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
सभी प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों को मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने 5 जुलाई 2025 को पार्टी के 30वें स्थापना दिवस पर बिहार की जनता और कार्यकर्ताओं के नाम एक विस्तृत लिखित संदेश जारी किया, जिसमें सामाजिक न्याय, संविधान की रक्षा और वंचित तबकों के अधिकारों की लड़ाई को और तेज़ करने का आह्वान किया गया। उन्होंने सभी प्रगतिशील एवं लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होकर दक्षिणपंथी राजनीति का मुकाबला करने का संकल्प दिलाया।

पार्टी की स्थापना और तीन दशकों की यात्रा

लालू प्रसाद ने अपने संदेश में याद दिलाया कि 5 जुलाई 1997 को राजद की नींव गरीबों, शोषितों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों को उनका हक और सम्मान दिलाने के उद्देश्य से रखी गई थी। उन्होंने इस दिन को बिहार की राजनीतिक दिशा और दशा बदलने वाला ऐतिहासिक क्षण बताया।

तीन दशकों की इस यात्रा में राजद ने सामाजिक और आर्थिक असमानता, सांप्रदायिकता तथा भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा, ऐसा उन्होंने कहा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के त्याग और समर्पण को राजद की मज़बूती का आधार बताते हुए हर दौर में साथ देने वाले नेताओं और समर्थकों के प्रति आभार जताया।

विकास का वैकल्पिक मॉडल

राजद अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का विकास मॉडल केवल बड़े हवाई अड्डों, मॉल और आलीशान इमारतों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, विकास तभी सार्थक है जब समाज के अंतिम व्यक्ति — मज़दूर, कारीगर और गरीब परिवार — के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार आए।

उन्होंने समाजवादी विचारधारा के प्रणेताओं — डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. भीमराव आंबेडकर — के विचारों के प्रति राजद की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उनका कहना था कि अब सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सशक्तिकरण की लड़ाई को भी निर्णायक मुकाम तक पहुँचाना होगा।

केंद्र सरकार पर आरोप

लालू प्रसाद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर कब्ज़ा, पूंजी के प्रभाव और दक्षिणपंथी राजनीति के ज़रिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, शिक्षा, रोज़गार और समान अवसरों जैसे बुनियादी मुद्दों को धार्मिक ध्रुवीकरण के ज़रिए दबाने की कोशिश हो रही है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं और विपक्षी एकजुटता की परीक्षा सामने है। लालू प्रसाद ने हाल के चुनावी घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ संघर्ष और तेज़ करने की ज़रूरत है।

कार्यकर्ताओं से आह्वान और आगे की राह

राजद अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि राजद को महज़ चुनाव लड़ने वाली राजनीतिक मशीन नहीं, बल्कि संसद से सड़क तक जनाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने सभी प्रगतिशील और लोकतांत्रिक शक्तियों से छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की, ताकि गरीबों, किसानों और वंचितों की लड़ाई को निर्णायक अंजाम तक पहुँचाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि तीन दशकों में सामाजिक न्याय के नारे के बावजूद बिहार में पिछड़ों और दलितों की आर्थिक स्थिति में कितना वास्तविक बदलाव आया। विपक्षी एकजुटता का आह्वान चुनावी मौसम में स्वाभाविक है, लेकिन 'इंडिया' गठबंधन की आंतरिक खींचतान यह सवाल उठाती है कि क्या यह एकता सिर्फ मंच तक सीमित रहेगी। धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोप लगाना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, पर इसका जवाब ज़मीनी संगठन और ठोस वैकल्पिक एजेंडे से ही मिलेगा।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजद का 30वाँ स्थापना दिवस कब और कहाँ मनाया गया?
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का 30वाँ स्थापना दिवस 5 जुलाई 2025 को मनाया गया। पार्टी की स्थापना मूल रूप से 5 जुलाई 1997 को हुई थी।
लालू प्रसाद यादव ने स्थापना दिवस पर क्या संदेश दिया?
लालू प्रसाद यादव ने लिखित संदेश में सामाजिक न्याय, संविधान की रक्षा और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने सभी प्रगतिशील ताकतों को भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील भी की।
लालू प्रसाद ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर कब्ज़ा कर, पूंजी के प्रभाव और दक्षिणपंथी राजनीति के ज़रिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर कर रही है। उनके अनुसार, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को धार्मिक ध्रुवीकरण से दबाने की कोशिश हो रही है।
राजद किन विचारकों की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करती है?
राजद डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. भीमराव आंबेडकर की समाजवादी एवं सामाजिक न्याय की विचारधारा को अपना आधार मानती है। लालू प्रसाद ने इन नेताओं के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता अपने संदेश में दोहराई।
लालू प्रसाद ने राजद कार्यकर्ताओं से क्या अपेक्षा जताई?
उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि राजद को केवल चुनावी पार्टी नहीं, बल्कि संसद से सड़क तक जनाधिकारों के लिए लड़ने वाला आंदोलन बनाएँ। साथ ही छोटे मतभेद भुलाकर व्यापक विपक्षी एकता बनाने पर ज़ोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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