क्या विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन ने सबरीमाला सोना चोरी विवाद में पार्टी से खुद को अलग किया?

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क्या विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन ने सबरीमाला सोना चोरी विवाद में पार्टी से खुद को अलग किया?

सारांश

क्या विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन ने सबरीमाला सोना चोरी के विवाद में अपनी पार्टी से खुद को अलग करने का फैसला किया है? इस कहानी में जानिए उनके बयानों के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक हालात की जटिलता।

Key Takeaways

  • सुरेंद्रन ने पोट्टी के घर जाने की बात स्वीकार की।
  • विधानसभा में राजनीतिक असहमति बढ़ी।
  • सुरेंद्रन ने अपनी पार्टी की स्थिति से खुद को अलग किया।
  • पार्टी में आंतरिक मतभेद स्पष्ट हुए।
  • यह विवाद आगामी चुनावों पर असर डाल सकता है।

तिरुवनंतपुरम, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व देवस्वम मंत्री और सीपीआई (एम) के प्रमुख विधायक कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन, सबरीमाला सोने की चोरी के विवाद में सत्ताधारी पार्टी के सबसे संकटपूर्ण चेहरों में से एक बन गए हैं। गुरुवार को केरल विधानसभा के अंदर और बाहर की घटनाओं ने लेफ्ट फ्रंट के भीतर बढ़ती असहमति को उजागर किया।

बुधवार को बढ़ते दबाव के बीच अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सुरेंद्रन ने मीडिया से कहा कि वह मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के घर केवल एक बार गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पोट्टी से कोई उपहार या लाभ नहीं लिया।

सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में सीपीआई (एम) के तीन वरिष्ठ नेताओं और एक सीपीआई नेता सहित कुल 13 लोग न्यायिक हिरासत में हैं। सुरेंद्रन ने कहा कि वह पोट्टी के पिता से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे और बच्चे के कार्यक्रम का पहले उल्लेख एक गलती थी।

पूर्व मंत्री ने जोर देकर कहा कि उस समय पोट्टी को आरोपी नहीं माना जाता था और उनके साथ कोई गलत या अनुचित संबंध नहीं था। जैसे ही विवाद बढ़ा, सबरीमाला सोने की चोरी का मुद्दा विधानसभा की कार्यवाही पर छाया रहा।

जब विपक्ष ने सरकार पर नया हमला बोला, तो ट्रेजरी बेंच के विधायकों ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के साथ पोट्टी की एक तस्वीर दिखाकर ध्यान भटकाने का प्रयास किया। इसे आरोपी की लेफ्ट से बाहर तक राजनीतिक पहुंच के सबूत के रूप में पेश किया गया।

सुरेंद्रन ने बाहर आकर अलग रुख अपनाया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सोनिया गांधी जानबूझकर किसी दागी व्यक्ति को अपने घर आने देंगी। इस बयान के जरिए उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों से खुद को अलग कर लिया।

यह विरोधाभास जनता की नजर से नहीं बचा। जहां ट्रेजरी बेंच पोट्टी को लेकर राजनीतिक विवाद फैलाने की कोशिश कर रही थी, वहीं सुरेंद्रन ने कहा कि सोने की चोरी की जांच हाई कोर्ट की निगरानी में हो रही है और विपक्ष पर बेवजह राजनीतिक नाटक करने का आरोप लगाया।

सुरेंद्रन लगातार यह कहते रहे हैं कि सबरीमाला के प्रशासनिक कामकाज में देवस्वोम मंत्री की दखल की आवश्यकता नहीं थी। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की जांच तेज होने और विपक्ष के हमले बढ़ने के बीच सुरेंद्रन का सतर्क और बचाव वाला रुख उन्हें विवाद के केंद्र में ले आया है।

सीपीआई (एम) नेतृत्व के दो अलग-अलग रुख विधानसभा के अंदर आक्रामक और बाहर संयमित ने सत्ताधारी मोर्चे के भीतर रणनीतिक मतभेद को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया है।

जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ रहा है, यह घटनाक्रम दिखाता है कि सुरेंद्रन एक मुश्किल राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद पिनाराई विजयन सरकार के सामने सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बन गया है, खासकर जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।

Point of View

तो यह संकेत है कि अंदरूनी मतभेद गहरे हो चुके हैं। इस विवाद के राजनीतिक नतीजे आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

सबरीमाला सोना चोरी विवाद क्या है?
यह विवाद सबरीमाला में हुई सोने की चोरी से संबंधित है, जिसमें कई राजनीतिक नेताओं का नाम शामिल है।
कडाकम्पल्ली सुरेंद्रन का इसमें क्या रोल है?
सुरेंद्रन का नाम इस विवाद में सामने आया है, और उन्होंने कहा है कि उन्होंने आरोपी से कोई लाभ नहीं लिया।
क्या सुरेंद्रन ने अपनी पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है?
उन्होंने अपनी पार्टी के आक्रामक रुख से खुद को अलग करने का प्रयास किया है।
क्या इस विवाद का विधानसभा चुनाव पर असर पड़ेगा?
यह विवाद निश्चित रूप से पिनाराई विजयन सरकार के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर चुनाव के नजदीक।
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