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सैम पित्रोदा: शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिए आवश्यक है राजनीतिक इच्छाशक्ति

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सैम पित्रोदा: शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिए आवश्यक है राजनीतिक इच्छाशक्ति

सारांश

सैम पित्रोदा ने शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, मुफ्त शिक्षा मॉडल को सफल बनाने के लिए एक ठोस दृष्टिकोण की जरूरत है।

मुख्य बातें

राजनीतिक इच्छाशक्ति शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिए आवश्यक है।
मुफ्त शिक्षा मॉडल को लागू करने के लिए ठोस दृष्टिकोण की जरूरत है।
निजी स्कूलों की हाई फीस पर चिंता जताई गई है।
मुस्लिम आरक्षण का लाभ सभी निचले तबके के लोगों को मिलना चाहिए।
सरकार को अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़नी चाहिए।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने बताया कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में ठोस सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक है।

राष्ट्र प्रेस से संवाद के दौरान, पित्रोदा ने अरविंद केजरीवाल के मुफ्त शिक्षा मॉडल को "बोगस" कहा। उन्होंने कहा, "यह सब बोगस है। उन्हें कोई समझ नहीं है। मेरा कहना है कि इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए। आप इसे अलग-अलग एक-दो कॉलेज या किसी एक राज्य में लागू करके सफल नहीं बना सकते।"

उन्होंने आगे कहा, "देश के तौर पर एक विजन होना चाहिए कि हम शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेंगे। हर बच्चे को लगभग मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए।"

पित्रोदा ने भारत में निजी स्कूलों की ऊंची फीस पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "आज छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए 10,000 से 20,000 रुपये महीना फीस दे रहे हैं, जो बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है। मेरा मानना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य का इतना अधिक निजीकरण नहीं होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। "निजी क्षेत्र की भी भूमिका है, लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ सकती। आज हम एक राष्ट्र के रूप में अपनी जिम्मेदारी से दूर हो रहे हैं।"

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर पित्रोदा ने कहा कि मुसलमानों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए, लेकिन समाज के निचले तबके के सभी लोगों को मदद की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "मैं खुद ओबीसी परिवार से हूं, लेकिन मेरी पीढ़ी में इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। मुझे भी बाद में पता चला। जब हम ओबीसी, मुसलमानों और अन्य वर्गों के लिए लाभ की बात करते हैं, तो शिक्षा और स्वास्थ्य लगभग मुफ्त होने चाहिए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

निस्संदेह एक गंभीर विषय है। सभी वर्गों के लोगों की भलाई के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैम पित्रोदा ने शिक्षा में सुधार के लिए क्या कहा?
सैम पित्रोदा ने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
क्या पित्रोदा ने केजरीवाल के मुफ्त शिक्षा मॉडल के बारे में क्या कहा?
उन्होंने केजरीवाल के मुफ्त शिक्षा मॉडल को 'बोगस' करार दिया और कहा कि इसे सफल नहीं बनाया जा सकता।
पित्रोदा ने निजी स्कूलों की फीस के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की उच्च फीस तर्कसंगत नहीं है और शिक्षा का अधिक निजीकरण नहीं होना चाहिए।
पित्रोदा का मुस्लिम आरक्षण पर क्या विचार है?
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन सभी निचले तबके के लोगों की मदद की ज़रूरत है।
क्या पित्रोदा ने सरकारी जिम्मेदारी पर कुछ कहा?
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती और यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है।
राष्ट्र प्रेस
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