क्या 2026 में कोर्सेज की डिमांड घट रही है?
सारांश
Key Takeaways
- फ्यूचर-रेडी कोर्सेज की बढ़ती मांग
- पारंपरिक इंजीनियरिंग कोर्सेज में गिरावट
- स्पेशलिस्ट बनना ज़रूरी
- स्किल्स पर ध्यान देने की आवश्यकता
- नौकरी के नए अवसरों की खोज
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक ऐसा समय था जब हर कोई चाहता था कि उनके बच्चे पढ़ाई करके डॉक्टर या इंजीनियर बनें, लेकिन नए साल 2026 में कई वर्षों से चल रहे कोर्सेज की डिमांड अब घटती हुई दिखेगी। आज के स्टूडेंट्स भीड़ का हिस्सा बनना नहीं चाहते, वे अपनी राह खुद चुनना चाहते हैं और यही कारण है कि जो कोर्सेज पहले लोकप्रिय थे, वे अब आउट ऑफ ट्रेंड हो रहे हैं।
पहले सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को सदाबहार माना जाता था। कॉलेजों की लाइब्रेरी में इनके लिए लंबी कतारें लगती थीं। लेकिन अब 2026 में इन क्षेत्रों की डिमांड में धीरे-धीरे कमी आ रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि छात्रों का झुकाव अब कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मार्केटिंग जैसी नई फील्ड्स की ओर बढ़ रहा है। पारंपरिक इंजीनियरिंग में नौकरीफ्यूचर-रेडी कोर्सेज की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
केवल इंजीनियरिंग ही नहीं, सामान्य बीए और बीकॉम जैसे कोर्सेज भी अब उतने आकर्षक नहीं रह गए हैं। आज की 'जेनजी' पीढ़ी थ्योरी में उलझने की बजाय उड़ान भरना चाहती है। बीकॉम या बीए करने के बजाय वे बीकॉम ऑनर्स, डिजिटल मार्केटिंग और फाइनेंशियल एनालिटिक्स जैसे विशेष कोर्स चुन रहे हैं। इसका मतलब है कि अब जनरलिस्ट कम और स्पेशलिस्ट की मांग अधिक है।
शिक्षा से जुड़े टीचर ट्रेनिंग कोर्सेज में भी उत्साह कम हुआ है। बीएड या अन्य शिक्षण कोर्सेज में छात्रों की रुचि घट रही है। भर्ती प्रक्रिया में देरी और निजी स्कूलों में कम सैलरी इसके प्रमुख कारण हैं। युवा अब टीचिंग की जगह एड-टेक, कंटेंट क्रिएशन और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग की दिशा में बढ़ रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और पैकेज मिलता है।
कई कोर्स अब डिजिटल युग और आधुनिक तकनीक के अनुसार अद्यतन नहीं हुए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक नौकरियों के लिए खतरा बढ़ा रहा है। कंपनियां अब डिग्री के बजाय स्किल्स को अधिक महत्व दे रही हैं। युवा अब 9 से 5 की नौकरी से हटकर रिमोट और फ्रीलांसिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2026 में यह परिवर्तन सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में एक बड़ी करवट है। छात्र अब वही कोर्सेज चुनेंगे जो उन्हें फ्यूचर-रेडी और जॉब-रेडी बनाएंगे। जो कोर्सेज केवल किताबी ज्ञान प्रदान करेंगे, उनकी चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ जाएगी।