क्या संजय निषाद ने एकजुट होने की अपील की है?
सारांश
Key Takeaways
- कल्याण सिंह का जीवन प्रेरणादायक है।
- परिवारों की मजबूती से समाज की मजबूती आती है।
- संविधान का पालन हर नागरिक का कर्तव्य है।
- एकता और सामाजिक समरसता की आवश्यकता है।
- सकारात्मक सोच से ही देश आगे बढ़ सकता है।
लखनऊ, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। संजय निषाद ने कल्याण सिंह के योगदान, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता पर अपनी बात रखी।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से कहा कि 'बाबूजी' का जीवन देश के लिए प्रेरणा है। मैं कल्याण सिंह जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धा के साथ याद करता हूं और उन्हें सादर नमन करता हूं। हर भारतीय को गर्व होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने वह कर दिखाया, जो वर्षों तक बहुत से लोग नहीं कर सके।
कल्याण सिंह का नाम भारतीय राजनीति और जनसेवा के इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'लव जिहाद' संबंधी बयान पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी को लेकर भी संजय निषाद ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि देश और समाज की मजबूती मजबूत परिवारों से आती है। हर परिवार में अनुशासन और संस्कार होने चाहिए, क्योंकि राष्ट्र की ताकत परिवारों की मजबूती पर निर्भर करती है। सोच शुद्ध रहेगी तो व्यवस्था भी सही तरीके से चलेगी। परिवारों को संवारने और मजबूत करने की जरूरत है। इस संदर्भ में विदेशी मानसिकता रखने वाले लोगों के बयान न तो प्रासंगिक हैं और न ही किसी सवाल का जवाब देते हैं।
संजय निषाद ने यह भी कहा कि समाज में मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा मिल सके और देश आगे बढ़ सके।
दिल्ली में 2020 के दंगों से जुड़े मामलों में शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई को लेकर मंत्री ने कहा कि देश संविधान से चलता है।
उन्होंने कहा, "हर नागरिक को संविधान का पालन करना चाहिए और देश को महान बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सभी को यह सोचना चाहिए कि वे देश की प्रगति और मजबूती में क्या योगदान दे सकते हैं।"
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान ही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और सभी को कानून का सम्मान करते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की एकता, सामाजिक समरसता और विकास के लिए सकारात्मक सोच और जिम्मेदार व्यवहार की जरूरत है, तभी भारत अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।