क्या संसद के शीतकालीन सत्र में हर बिल पर सार्थक चर्चा की आवश्यकता है: अनुप्रिया पटेल?
सारांश
Key Takeaways
- शीतकालीन सत्र 15 दिनों तक चलेगा।
- सभी दलों को सार्थक चर्चा का आग्रह किया गया है।
- इस बार 13 बिल पेश किए जाएंगे।
- सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की गई है।
- जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जरूरी है।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व आयोजित सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी प्राथमिकताओं और मुद्दों को सरकार के सामने रखा। इस बैठक के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि इस बार का संसद का शीतकालीन सत्र कुल 15 दिनों तक चलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लगभग सभी दलों के नेता शामिल हुए। उन्होंने बताया कि सभी पार्टियों ने अपने मुद्दों को स्पष्ट रूप से रखा, और सरकार ने भी उन्हें गंभीरता से सुना। हर बिल पर सार्थक चर्चा की आवश्यकता है।
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि इस बार सरकार ने 13 बिल अंतिम रूप दिए हैं, जिन्हें इस सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने अपील की कि सभी दलों को सदन में हर बिल पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए और समय पर पारित किया जाना चाहिए, ताकि जनहित से जुड़े कार्य तेजी से आगे बढ़ सकें। उन्होंने सभी सांसदों से रचनात्मक संवाद और सदन की गरिमा बनाए रखने की भी अपील की।
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और 19 दिसंबर तक चलेगा। सरकार और विपक्ष दोनों इस सत्र को महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि कई संवेदनशील और जनहितकारी बिल एजेंडे में शामिल हैं।
इस बीच, भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि संसद सत्र के दौरान कुछ महत्वपूर्ण विधेयक लाए जाएंगे और सदन अपनी संसदीय परंपराओं के अनुसार कार्य करता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष जनता से जुड़े रचनात्मक मुद्दे उठाएगा, सरकार की सकारात्मक आलोचना करेगा, और संसदीय समय का सदुपयोग करेगा ताकि लोगों के हित में बेहतर काम हो सके।
भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि हर कोई चाहता है कि सदन सुचारू रूप से चले। विपक्ष को लोकतांत्रिक शिष्टाचार बनाए रखना चाहिए और स्वस्थ चर्चा में भाग लेना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस नेता तरुण गोगाई ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा कि संसद का शीतकालीन सत्र केवल 19 दिन का है, जिसमें केवल 15 दिन ही चर्चा हो पाएगी। शायद यह सबसे छोटा सत्र होगा, लेकिन हम चाहते हैं कि इस सत्र में देश के मुख्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।