क्या सांसद मनन कुमार मिश्रा ने राहुल पर षडयंत्र का आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- प्रदर्शन की स्वतंत्रता में एक सीमा होनी चाहिए।
- किसी भी प्रदर्शन के दौरान देश की प्रतिष्ठा का ध्यान रखना आवश्यक है।
- राहुल गांधी पर षड्यंत्र का आरोप एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है।
- एआई समिट के दौरान शर्मनाक घटनाएं नहीं होनी चाहिए।
- सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कानून और संविधान की बात की।
नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रदर्शन करना अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन यह एक सीमा के भीतर होना चाहिए। जब इस सीमा से बाहर जाकर देश को शर्मसार किया जाता है, तो यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं कहलाती। मर्यादा के उल्लंघन को अधिकार नहीं माना जा सकता। हमारे संविधान और कानून इसकी इजाजत नहीं देते। यह बात भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की शर्मनाक हरकत की आलोचना करते हुए कही।
वास्तव में, रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में एआई समिट की उस घटना की निंदा की, जिसमें कांग्रेस पार्टी ने पूरे विश्व के सामने देश को शर्मिंदा किया था। इस मुद्दे पर मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने आज इसका जिक्र किया, क्योंकि पूरा देश इससे आक्रोशित है और दुखी है।
कांग्रेसियों द्वारा की गई यह घटना बहुत ही शर्मनाक थी। मिश्रा ने आरोप लगाया कि यह घटना राहुल गांधी के उकसाने पर हुई थी। उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी का षड्यंत्र था, जिससे समिट में कैसे खलल डाला जाए। यह पूरी साजिश राहुल गांधी और उनकी पार्टी द्वारा रची गई थी।
विश्व का सबसे बड़ा समिट हमारे देश में हो रहा है, जिससे पूरा देश खुश है। देश का युवा वर्ग इस समिट से प्रेरित है और एक नई शक्ति का अनुभव कर रहा है। हमारा देश बहुत आगे बढ़ने की ओर है। 2047 तक हमें पूरे विश्व का गुरु बनना है। इसके लिए प्रधानमंत्री देश में टेक्नोलॉजी और विज्ञान के विकास पर ध्यान दे रहे हैं। हमारे विदेशों से रिश्तों को मजबूत करने के लिए वे दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसे में जब देश में विश्व स्तर का कार्यक्रम हो, जहां विभिन्न देशों के अतिथि आए हुए हों, और वहां इस तरह की शर्मनाक घटना घटित हो, तो यह हर देशवासी के लिए दुखद है। इसलिए आज प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी चर्चा की।
सांसद ने कहा कि भले ही कांग्रेस अपने बचाव में कुछ भी कहे, लेकिन सच्चाई यह है कि अभिव्यक्ति की आजादी यह नहीं है कि आप अपनी मर्यादा भूल जाएं और पूरे विश्व के सामने देश को शर्मिंदा करें। हमारा कानून और संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। एक सीमा के भीतर रहकर प्रदर्शन करना ही कानून के दायरे में आता है। यह भाजपा की मीटिंग नहीं थी, बल्कि यह एक विश्व स्तर का कार्यक्रम था, जिसका नेतृत्व हमारा देश कर रहा था।
-- राष्ट्र प्रेस
अर्पित याज्ञनिक/एमएस