भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा अलग राजस्व न्यायिक सेवा कैडर की मांग वाली PIL पर सुनवाई
सारांश
Key Takeaways
सर्वोच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2026 को उस जनहित याचिका पर सुनवाई की सहमति दी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को भूमि विवादों के निपटारे हेतु अलग राजस्व न्यायिक सेवा कैडर गठित करने और ऐसे मामलों की सुनवाई करने वाले अधिकारियों के लिए न्यूनतम कानूनी योग्यता निर्धारित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब माँगा है।
याचिका में क्या है मुख्य माँग
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि स्वामित्व, उत्तराधिकार, विरासत, कब्जा और संपत्ति अधिकारों से जुड़े मामलों का फैसला ऐसे राजस्व और चकबंदी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जिनके पास औपचारिक कानूनी शिक्षा और न्यायिक प्रशिक्षण नहीं है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 50 का उल्लंघन करती है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि देश में करीब 66 प्रतिशत दीवानी मुकदमे भूमि और संपत्ति विवादों से जुड़े हैं, लेकिन उनका प्रारंभिक निर्णय प्रायः ऐसे कार्यपालिका अधिकारियों द्वारा किया जाता है जिनके पास कानूनी प्रशिक्षण नहीं होता। इससे फैसलों में असंगति, अनावश्यक देरी और कानूनी त्रुटियाँ सामने आती हैं।
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा,