क्या चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से मिली जमानत, भूपेश बघेल ने इसे 'सत्य की जीत' बताया?
सारांश
Key Takeaways
- चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
- भूपेश बघेल ने इसे सत्य की जीत कहा।
- ईडी ने शराब घोटाले में 59 नए आरोपियों को शामिल किया।
- घोटाले में तीन हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
- जांच में एक संगठित सिंडिकेट का पता चला।
बिलासपुर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने चैतन्य बघेल को जमानत प्रदान की है। चैतन्य ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।
पहले, कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने यह निर्णय सुनाया।
नए साल की शुरुआत में चैतन्य बघेल को मिली राहत से कांग्रेस
चैतन्य बघेल को ईडी ने शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। हाल ही में ईडी ने इस मामले में अंतिम चार्जशीट पेश की थी। जमानत मिलने के बाद यह माना जा रहा है कि चैतन्य बघेल जेल से रिहा हो सकते हैं।
इस बीच, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह एक अच्छी खबर है कि हाई कोर्ट ने चैतन्य को ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों मामलों में जमानत दी है। उन्होंने यह भी कहा कि चैतन्य की गिरफ्तारी एक फरार व्यक्ति पप्पू बंसल के बयान के आधार पर हुई थी। भूपेश बघेल ने कहा कि आज सत्य की जीत हुई है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उन्हें परेशान कर रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह सफलता हासिल हुई है।
ज्ञात रहे कि ईडी ने विशेष अदालत में अंतिम अभियोजन शिकायत पेश की थी, जिसमें 59 नए लोगों को आरोपी बनाया गया। इससे कुल आरोपियों की संख्या 81 हो गई है। जांच में यह पाया गया कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। ईडी का अनुमान है कि इस अवैध धंधे से करीब तीन हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जिससे राज्य के खजाने को खासी क्षति हुई।
इस घोटाले की जांच में एक संगठित सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें नौकरशाह, राजनीतिक नेता और निजी कारोबारी शामिल हैं। इस सिंडिकेट ने शराब की नीति को कमजोर करके अवैध तरीकों से धन अर्जित किया।
उन्होंने चार मुख्य तरीकों का उपयोग किया। पहला, शराब आपूर्तिकर्ताओं से अवैध कमीशन वसूला गया। इसके लिए शराब की आधिकारिक कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता था, जिससे राज्य का पैसा रिश्वत के रूप में इस्तेमाल होता था। दूसरा, बिना हिसाब की शराब बेची जाती थी। नकली होलोग्राम वाली बोतलें नकद में खरीदकर सरकारी दुकानों से बेची जातीं, जिससे कोई टैक्स या उत्पाद शुल्क नहीं जाता था। तीसरा, डिस्टिलरी वाले बाजार में हिस्सा बनाए रखने और लाइसेंस के लिए सालाना रिश्वत देते थे। चौथा, विदेशी शराब के लिए नई लाइसेंस श्रेणी बनाई गई, जिसमें सिंडिकेट को बड़ा मुनाफा होता था।