क्या अनिद्रा, माइग्रेन या तनाव के लिए शिरोधारा बेहद कारगर है?
सारांश
Key Takeaways
- शिरोधारा मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
- यह अनिद्रा और तनाव को कम करता है।
- इससे चेहरे की चमक बढ़ती है।
- बालों की समस्याओं में भी मददगार है।
- इसे केवल चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए।
नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता और अनियमित दिनचर्या ने अनिद्रा, तनाव, माइग्रेन, चिंता और थकान जैसी समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे में आयुर्वेद की प्राचीन और प्रभावी चिकित्सा शिरोधारा सबसे बेहतरीन विकल्प है।
इस प्रक्रिया में गर्म औषधीय तेल या दूध की निरंतर धारा माथे पर डाली जाती है, जो मन को शांति देती है, नींद लाने में मदद करती है, माइग्रेन को दूर करती है और पूरे शरीर की नसों को आराम देकर ऊर्जा प्रदान करती है। शिरोधारा के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने शिरोधारा को एक प्रभावी आयुर्वेदिक चिकित्सा के रूप में स्वीकार किया है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में सहायक है। यह प्राचीन केरल की एक विशेष तकनीक है जिसमें गर्म तेल, दूध, जड़ी-बूटियों का काढ़ा या अन्य औषधीय द्रव्य माथे पर लगातार बहाए जाते हैं।
शिरोधारा सबसे पहले अनिद्रा की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करती है। यह मन को शांत और एकाग्र बनाए रखने का एक बेहतरीन उपाय है। आजकल, कई लोग रात में नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं, ऐसे में शिरोधारा एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प साबित होता है। इसके अतिरिक्त, यह माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या को ठीक करने में भी कारगर है। लगातार सिर में दर्द, आंखों के सामने चमकना या उल्टी जैसी परेशानियों में इस चिकित्सा से काफी सुधार होता है।
शिरोधारा केवल दर्द कम करने के लिए ही नहीं बल्कि चेहरे की चमक के लिए भी लाभकारी है। यह चेहरे पर झुर्रियों को कम कर त्वचा को पोषण देती है और चेहरे की प्राकृतिक चमक को बढ़ाती है। नियमित शिरोधारा से चेहरा तरोताजा और युवा नजर आने लगता है। बालों से संबंधित समस्याओं में भी यह चिकित्सा अत्यधिक उपयोगी है। बालों का झड़ना, डैंड्रफ और कमजोर बालों जैसी समस्याएं शिरोधारा से दूर हो सकती हैं। यह स्कैल्प को पोषण देती है, रक्त संचार को बढ़ाती है और बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करती है। शिरोधारा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पूरे शरीर की नसों को ढीला करती है और गहरे तनाव को समाप्त करती है।
माथे पर गर्म धारा का निरंतर प्रवाह मस्तिष्क को विश्राम देता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं कम हो जाती हैं। हालाँकि, इसे स्वयं से न करें और किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में शिरोधारा करवाना बेहतर है।