26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एसआईआर विवाद: आदित्य साहू का बड़ा आरोप — हेमंत सोरेन घुसपैठी वोटरों को बचाने के लिए मतदाताओं को कर रहे गुमराह

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एसआईआर विवाद: आदित्य साहू का बड़ा आरोप — हेमंत सोरेन घुसपैठी वोटरों को बचाने के लिए मतदाताओं को कर रहे गुमराह

सारांश

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने CM हेमंत सोरेन पर एसआईआर के नाम पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। 2019-24 में झारखंड में मतदाता वृद्धि दर 16.7% रही, जो राष्ट्रीय औसत 10.1% से कहीं अधिक है — साहू ने इसे फर्जी वोटरों का सबूत बताया।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने CM हेमंत सोरेन पर एसआईआर के नाम पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।
2019 से 2024 के बीच झारखंड में मतदाता वृद्धि दर 16.7% रही, जो राष्ट्रीय औसत 10.1% से कहीं अधिक है।
2014-19 में झारखंड की मतदाता वृद्धि दर मात्र 6.2% थी, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम थी।
एसआईआर आजादी के बाद से 13 बार हो चुकी है, अंतिम बार 2004 में — यह कोई नई प्रक्रिया नहीं।
बिहार और पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद किसी भी वास्तविक नागरिक का नाम सूची से नहीं हटा — भाजपा का दावा।
साहू ने कहा कि यह चुनाव आयोग की स्वायत्त प्रक्रिया है, जिसमें किसी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप नहीं होता।

रांची, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर झारखंड के मतदाताओं को जानबूझकर भ्रमित कर रहे हैं। साहू के अनुसार, मुख्यमंत्री गरीब, आदिवासी और मूलवासियों की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, जबकि उनकी असली चिंता उन फर्जी मतदाताओं को बचाने की है जो उनके कार्यकाल में अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल हो गए।

मुख्यमंत्री के बयान को बताया आधारहीन

आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन के उस बयान को पूरी तरह निराधार करार दिया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा एसआईआर के माध्यम से आदिवासियों और पिछड़े वर्गों को उनके मताधिकार, राशन और पेंशन से वंचित करना चाहती है। साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह बेचैनी और बौखलाहट इसलिए है क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए फर्जी मतदाताओं की पहचान होने वाली है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर कोई नई या असाधारण प्रक्रिया नहीं है। आजादी के बाद से अब तक कुल 13 बार यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है, जिसमें अंतिम बार वर्ष 2004 में इसे लागू किया गया था।

कांग्रेस राज में कोई आपत्ति नहीं, अब क्यों विवाद?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तीखा सवाल उठाया कि जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के शासनकाल में इस नियमित प्रक्रिया पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई, तो अब मोदी सरकार के कार्यकाल में इसे विवादास्पद क्यों बनाया जा रहा है? उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह भारत निर्वाचन आयोग का स्वायत्त और संवैधानिक कार्य है, जिसमें किसी भी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप नहीं होता।

साहू ने कहा कि इस प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न हो और कोई भी अपात्र व्यक्ति फर्जीवाड़े के जरिए सूची में शामिल न हो सके।

बिहार और बंगाल में खुली भ्रामक प्रचार की पोल

आदित्य साहू ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर को लेकर इसी तरह का भ्रामक प्रचार किया गया था, लेकिन वहां यह साबित हो चुका है कि किसी भी वास्तविक और पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की असली बेचैनी उन घुसपैठियों को लेकर है जिन्होंने उनके शासनकाल में झारखंड की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) को बदल दिया है।

चौंकाने वाले आंकड़े: मतदाता वृद्धि दर में असामान्य उछाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2014 से 2019 के बीच झारखंड में मतदाताओं की वृद्धि दर मात्र 6.2 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम थी। लेकिन 2019 से 2024 के बीच, यानी जब राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी, यह वृद्धि दर उछलकर 16.7 प्रतिशत पर पहुंच गई।

यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत से कहीं अधिक है। साहू ने इसे फर्जी मतदाताओं को सूची में शामिल कराने का ठोस प्रमाण बताया और कहा कि यही कारण है कि एसआईआर की प्रक्रिया से सत्तारूढ़ दल इतना घबराया हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषण: क्या है असली दांव?

गौरतलब है कि झारखंड में आदिवासी और मूलवासी मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में एसआईआर को लेकर जो राजनीतिक संग्राम छिड़ा है, वह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विरोध नहीं, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों की तैयारी का हिस्सा भी माना जा रहा है। यदि मतदाता सूची की गहन समीक्षा में बड़ी संख्या में अपात्र नाम सामने आते हैं, तो यह सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए राजनीतिक रूप से बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।

आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया की रिपोर्ट और उस पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं झारखंड की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह महज संयोग नहीं हो सकता — यह सवाल उठाता है। विडंबना यह है कि जो दल आदिवासी अधिकारों का सबसे मुखर समर्थक होने का दावा करता है, वही एक संवैधानिक और नियमित चुनावी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश में है। मुख्यधारा की मीडिया इस आंकड़ेबाजी के पीछे की असली कहानी — झारखंड की बदलती डेमोग्राफी और उसके चुनावी निहितार्थ — को अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या होता है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की गहन जांच की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति फर्जी तरीके से सूची में शामिल न हो। आजादी के बाद से यह प्रक्रिया 13 बार अपनाई जा चुकी है।
आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एसआईआर के नाम पर मतदाताओं को भ्रमित कर रहे हैं। उनका असली उद्देश्य आदिवासियों की आड़ में उन घुसपैठी वोटरों को बचाना है जो उनके कार्यकाल में फर्जी तरीके से मतदाता सूची में शामिल हुए।
झारखंड में मतदाता वृद्धि दर को लेकर क्या विवाद है?
आदित्य साहू के अनुसार 2014-19 में झारखंड में मतदाता वृद्धि दर 6.2% थी, लेकिन 2019-24 में यह बढ़कर 16.7% हो गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 10.1% है। भाजपा इसे फर्जी मतदाताओं को सूची में शामिल कराने का प्रमाण मानती है।
क्या एसआईआर से आदिवासियों के वोट कटेंगे?
भाजपा का कहना है कि एसआईआर से किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं कटता — बिहार और बंगाल में यह साबित हो चुका है। यह प्रक्रिया केवल अपात्र और फर्जी मतदाताओं की पहचान के लिए है।
एसआईआर प्रक्रिया पहले कब-कब हुई है?
एसआईआर भारत में आजादी के बाद से अब तक कुल 13 बार हो चुकी है। इस प्रक्रिया को अंतिम बार वर्ष 2004 में लागू किया गया था, जब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले