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स्वर्णिका संवाद में डॉ. सोनल मानसिंह: 'विरासत के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा'

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स्वर्णिका संवाद में डॉ. सोनल मानसिंह: 'विरासत के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा'

सारांश

पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह का संदेश सीधा था — विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं, अलग-अलग नहीं। स्वर्णिका संवाद में उन्होंने CSR से संस्कृति की उपेक्षा और सामुदायिक केंद्रों के क्षरण पर चिंता जताई, और इस संवाद को टियर-2 व टियर-3 शहरों तक ले जाने का संकल्प लिया।

मुख्य बातें

सोनल मानसिंह ने 24 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्वर्णिका संवाद को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य सांस्कृतिक विरासत के बिना पूरा नहीं हो सकता।
सस्मित पात्रा ने इसे देश की धरोहर को प्रतिपादित करने वाला 'स्वर्णिम अध्याय' बताया।
मानसिंह ने CSR के अंतर्गत संस्कृति को मिलने वाले अत्यल्प समर्थन पर चिंता जताई।
संवाद को पहले चार-पाँच बड़े शहरों और फिर टियर-2 व टियर-3 शहरों तक विस्तारित करने की योजना है।
पिछले 25-30 वर्षों में तकनीकी परिवर्तनों से सामुदायिक सांस्कृतिक केंद्रों के ढाँचे के क्षरण पर भी ध्यान दिलाया गया।

पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने 24 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सेंटर फॉर क्लासिकल डांसेज के मंच पर आयोजित 'स्वर्णिका संवाद' में कहा कि विश्वव्यापी अव्यवस्था के इस दौर में संस्कृति ही वह केंद्रीय बिंदु है जो जीवन, विचार और विकास को स्थिर रख सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का लक्ष्य सांस्कृतिक विरासत की जड़ों के बिना पूरा नहीं हो सकता। इस संवाद को आगे चलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तारित करने की योजना भी घोषित की गई।

स्वर्णिका संवाद: मुख्य घटनाक्रम

भारतीय शास्त्रीय नृत्य, कला और संस्कृति की रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर केंद्रित यह एकदिवसीय कार्यक्रम शनिवार, 24 अक्टूबर को आयोजित हुआ। कार्यक्रम में पैनल चर्चाओं के माध्यम से कला नीति-निर्माण, सरकार की भूमिका और रचनात्मकता को आर्थिक ढाँचे से जोड़ने के तरीकों पर विचार-विमर्श हुआ। बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद डॉ. सस्मित पात्रा और ओडिसी नृत्य की वैश्विक दूत डॉ. सोनल मानसिंह इस अवसर पर प्रमुख वक्ता रहीं।

डॉ. सोनल मानसिंह के मुख्य विचार

डॉ. मानसिंह ने कहा, 'विरासत के बिना, जड़ों के बिना वृक्ष न तो फलता है और न ही फूलता है।' उन्होंने रेखांकित किया कि संस्कृति हज़ारों वर्षों से अविरल चली आ रही है, जबकि अर्थव्यवस्थाएँ बदलती रहती हैं। उनके अनुसार रचनात्मकता को अंतःप्रेरणा और कल्पनाशक्ति के माध्यम से विकसित करने की आवश्यकता है, किंतु यह संस्कृति की नींव के बिना संभव नहीं।

उन्होंने प्रदर्शन स्थलों के ढाँचे के क्षरण पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार लाजपत नगर, डिफेंस कॉलोनी, गीता कॉलोनी और शाहदरा जैसे इलाकों के सामुदायिक केंद्र, जहाँ कभी नृत्य-संगीत की कक्षाएँ और प्रस्तुतियाँ होती थीं, अब लगभग समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन और अब कृत्रिम मेधा (AI) जैसे तकनीकी परिवर्तनों ने पिछले 25-30 वर्षों में नई और जटिल परिस्थितियाँ उत्पन्न की हैं।

सांसद सस्मित पात्रा की प्रतिक्रिया

बीजद सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस आयोजन को देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रतिपादित करने वाला 'स्वर्णिम अध्याय' बताया। उन्होंने कहा, 'डॉ. सोनल मानसिंह ओडिसी की एक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में पूरे विश्व में ख्याति-संपन्न हैं।' उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस संवाद से उभरने वाले बिंदु भविष्य की सांस्कृतिक नीतियों को दिशा देंगे।

सीएसआर और संस्कृति: एक अनदेखा संकट

डॉ. मानसिंह ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत संस्कृति को मिलने वाले अत्यल्प समर्थन पर ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार स्वास्थ्य और शिक्षा को CSR में प्राथमिकता दी जाती है, परंतु यदि शिक्षा से संस्कृति को अलग कर दिया जाए तो उसका सार ही नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा, 'शिक्षा का मक्खन तो संस्कृति है।'

आगे की योजना

डॉ. मानसिंह ने घोषणा की कि यह संवाद केवल नृत्य, संगीत, वस्त्र-कला, हस्तशिल्प या सिनेमा तक सीमित नहीं है — यह समग्रता में सोचने का प्रयास है। इसे पहले चार-पाँच अन्य बड़े शहरों में और उसके बाद टियर-2 व टियर-3 शहरों तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संवाद के माध्यम से आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारों को भी सोचने पर मजबूर किया जाएगा। यह पहल भारत की सांस्कृतिक पहचान को आर्थिक और नीतिगत मुख्यधारा में स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह नीति-निर्माताओं के लिए असुविधाजनक आईना है। असली प्रश्न यह है कि स्वर्णिका संवाद जैसे आयोजन संकल्प से आगे बढ़कर मापनीय नीतिगत बदलाव कब लाएँगे — क्योंकि सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की बात तब तक अधूरी है जब तक उसके लिए बजट, ढाँचा और जवाबदेही सुनिश्चित न हो।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वर्णिका संवाद क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
स्वर्णिका संवाद सेंटर फॉर क्लासिकल डांसेज द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक विमर्श मंच है, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्य, कला और संस्कृति की रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य कला नीति-निर्माण, सरकारी भूमिका और सांस्कृतिक विरासत को विकास से जोड़ने पर संवाद स्थापित करना है।
डॉ. सोनल मानसिंह ने विरासत और विकास पर क्या कहा?
डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि विरासत के बिना, जड़ों के बिना वृक्ष न फलता है और न फूलता है। उनके अनुसार विकसित भारत का लक्ष्य सांस्कृतिक विरासत की नींव के बिना पूरा नहीं हो सकता और संस्कृति ही वह केंद्रीय बिंदु है जो अव्यवस्था के दौर में जीवन और विकास को स्थिर रख सकती है।
स्वर्णिका संवाद को आगे कहाँ-कहाँ ले जाने की योजना है?
डॉ. मानसिंह ने घोषणा की कि इस संवाद को पहले चार-पाँच अन्य बड़े शहरों में और उसके बाद टियर-2 व टियर-3 शहरों तक विस्तारित किया जाएगा। इसका लक्ष्य आम नागरिकों और सरकारों दोनों को सांस्कृतिक प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित करना है।
CSR और संस्कृति के बारे में डॉ. मानसिंह ने क्या चिंता जताई?
डॉ. मानसिंह ने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) में स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन संस्कृति के लिए बहुत कम समर्थन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से संस्कृति को हटा दिया जाए तो उसका सार ही समाप्त हो जाता है और इसे फिर से एकीकृत करने की पहल होनी चाहिए।
सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस कार्यक्रम पर क्या कहा?
बीजद सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने स्वर्णिका संवाद को देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रतिपादित करने वाला 'स्वर्णिम अध्याय' बताया। उन्होंने कहा कि इस संवाद से उभरने वाले बिंदु भविष्य की नीतियों को दिशा देंगे और कला-संस्कृति को मजबूती के साथ आगे ले जाने में सहायक होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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