18 सितंबर 2026
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युवा धर्म संसद उज्जैन: 'संवाद से ही युवाओं को धर्म से जोड़ा जा सकता है' — प्रो. वरखेड़ी

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युवा धर्म संसद उज्जैन: 'संवाद से ही युवाओं को धर्म से जोड़ा जा सकता है' — प्रो. वरखेड़ी

सारांश

उज्जैन में युवा धर्म संसद के छठे संस्करण में प्रो. वरखेड़ी ने स्पष्ट किया कि जेन-ज़ी पीढ़ी धर्म से दूर नहीं है — ज़रूरत है सुनने और संवाद करने की। 'युवा स्वप्न है, बुजुर्ग अनुभव — दोनों को जोड़ने से नयापन निकलेगा।'

मुख्य बातें

श्रीनिवास वरखेड़ी , वाइस-चांसलर, सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी , ने 18 सितंबर 2026 को उज्जैन में युवा धर्म संसद के दौरान संवाद को युवाओं को धर्म से जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
युवा धर्म संसद पूज्य मिथिलेश नंदनी शरण महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित अपना छठा संस्करण है।
वरखेड़ी ने जेन-ज़ी के धर्म से दूर होने की धारणा को खारिज किया; जेन अल्फा की बात सुनने पर भी ज़ोर दिया।
मोहन भागवत की पश्चिमी प्रभाव वाली टिप्पणी के संदर्भ में कहा — 'स्वधर्म को छोड़कर हम पाश्चात्य नहीं बन सकते।' उज्जैन को भारतीय काल-गणना के केंद्र के रूप में रेखांकित करते हुए कहा — भारत को समय के साथ नहीं, समय से आगे चलना है।

सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के वाइस-चांसलर प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने 18 सितंबर 2026 को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के दौरान कहा कि युवाओं के साथ संवाद ही उन्हें धर्म और संस्कृति से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। जेन-ज़ी और जेन अल्फा पीढ़ियों पर पश्चिमी प्रभाव को लेकर चल रही बहस के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं की शक्ति को समझना और उनसे संवाद करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

युवा धर्म संसद और इसकी पृष्ठभूमि

पूज्य मिथिलेश नंदनी शरण महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित यह युवा धर्म संसद अपना छठा संस्करण है, जिसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय धर्म एवं संस्कृति से जोड़ना है। उज्जैन, जो महाकाल की नगरी के रूप में विख्यात है और भारतीय काल-गणना का ऐतिहासिक केंद्र रहा है, इस आयोजन के लिए एक प्रतीकात्मक स्थल है।

प्रो. वरखेड़ी ने कहा, 'उज्जैन का महाकाल से गहरा नाता रहा है और यह भारतीय समय-गणना का केंद्र रहा है। अब युग बदलने का समय आ गया है। हमें सिर्फ समय के साथ नहीं चलना चाहिए, बल्कि एक नया युग बनाना चाहिए और समय से भी आगे निकलना चाहिए।'

जेन-ज़ी और धर्म से दूरी का सवाल

जेन-ज़ी पीढ़ी के धर्म से दूर होने की धारणा पर प्रो. वरखेड़ी ने असहमति जताई। उन्होंने कहा, 'ऐसा कुछ नहीं है। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि युवाओं की ताकत का इस्तेमाल कैसे किया जाए। युवाओं की ताकत के बिना कोई देश नहीं बन सकता। भारत एक युवा देश है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जेन अल्फा पीढ़ी का उदय हो चुका है और उनकी बात सुनना उतना ही आवश्यक है जितना जेन-ज़ी की। गौरतलब है कि भारत की लगभग 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है, जो इस संवाद को राष्ट्रीय महत्व देता है।

स्वप्न और अनुभव का संतुलन

प्रो. वरखेड़ी ने युवाओं और वरिष्ठ पीढ़ी के बीच संवाद को एक अनूठे दृष्टिकोण से परिभाषित किया। उनके अनुसार, 'सपने हमेशा भविष्य से आते हैं और बुजुर्ग स्वप्न नहीं देख सकते। स्वप्न देखने वाला युवा समाज हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। युवा स्वप्न है और बुजुर्ग अनुभव। अगर दोनों को जोड़ा जाए, तो शायद वहीं बात धर्म संसद में हो रही है।'

यह ऐसे समय में आया है जब देश में पीढ़ीगत संवाद को लेकर शैक्षणिक और सामाजिक मंचों पर व्यापक चर्चा हो रही है। दोनों पीढ़ियों के संयोजन से उभरने वाले 'नयेपन' पर उनका ज़ोर उल्लेखनीय है।

मोहन भागवत की टिप्पणी और पश्चिमी प्रभाव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा युवाओं पर पश्चिमी प्रभाव को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि किसी भी देश को दूसरे के प्रभाव में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा, 'पश्चिमी देशों के विचारों के द्वारा हम पूरा जीवन नहीं बिता सकते। स्वधर्म को छोड़कर हम पाश्चात्य नहीं बन सकते।'

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय सांस्कृतिक पहचान और वैश्वीकरण के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हुई है।

आगे की राह और भारत का भविष्य

प्रो. वरखेड़ी ने यह भी कहा कि 'भारत युग निर्माता होगा और नए काल की सृष्टि होगी।' उनके अनुसार यह संवाद संकल्प से कार्यसिद्धि की ओर और कार्यसिद्धि से लक्ष्य की ओर ले जाएगा। युवा धर्म संसद का यह छठा आयोजन इस दिशा में एक सुनियोजित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ युवाओं और अनुभवी पीढ़ी के बीच संवाद को संस्थागत रूप देने की कोशिश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न पश्चिम को सर्वग्राही खतरा। लेकिन असली सवाल यह है कि 'संवाद' का यह आह्वान संस्थागत ढाँचे में कैसे उतरेगा — युवा धर्म संसद के छह संस्करण बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि इस संवाद के मापनयोग्य परिणाम क्या हैं। 'युवा स्वप्न, बुजुर्ग अनुभव' वाला रूपक प्रेरक है, पर तब तक अधूरा है जब तक युवाओं को केवल 'सुनने का पात्र' नहीं, बल्कि 'एजेंडा तय करने वाला भागीदार' न माना जाए।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युवा धर्म संसद क्या है और यह कहाँ आयोजित होती है?
युवा धर्म संसद पूज्य मिथिलेश नंदनी शरण महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला एक धार्मिक-सांस्कृतिक मंच है, जिसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय धर्म एवं संस्कृति से जोड़ना है। 18 सितंबर 2026 को उज्जैन में इसका छठा संस्करण आयोजित किया गया।
प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी कौन हैं?
प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के वाइस-चांसलर हैं। वे संस्कृत शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में एक प्रमुख शिक्षाविद् के रूप में जाने जाते हैं।
जेन-ज़ी पीढ़ी के धर्म से दूर होने पर प्रो. वरखेड़ी का क्या मत है?
प्रो. वरखेड़ी ने इस धारणा को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि युवाओं की शक्ति को पहचानकर उनसे संवाद करना ज़रूरी है, न कि उन्हें दूर मानना। उन्होंने जेन अल्फा पीढ़ी की बात सुनने की भी वकालत की।
मोहन भागवत की पश्चिमी प्रभाव वाली टिप्पणी पर प्रो. वरखेड़ी की प्रतिक्रिया क्या थी?
प्रो. वरखेड़ी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि किसी देश को दूसरे के प्रभाव में नहीं आना चाहिए और स्वधर्म को छोड़कर पाश्चात्य नहीं बना जा सकता।
उज्जैन को युवा धर्म संसद के लिए क्यों चुना गया?
प्रो. वरखेड़ी के अनुसार उज्जैन का महाकाल से गहरा नाता है और यह भारतीय काल-गणना का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। इसी प्रतीकात्मकता के कारण यह स्थान युग-परिवर्तन की प्रेरणा के लिए उपयुक्त माना गया।
राष्ट्र प्रेस
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