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पाकिस्तान की 'फुली फंडेड' स्कॉलरशिप विवाद: बांग्लादेशी छात्रों ने वादाखिलाफी का आरोप लगाया

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पाकिस्तान की 'फुली फंडेड' स्कॉलरशिप विवाद: बांग्लादेशी छात्रों ने वादाखिलाफी का आरोप लगाया

सारांश

पाकिस्तान की 'नॉलेज कॉरिडोर' स्कॉलरशिप पहल पहले ही चरण में विवादों में फँस गई — बांग्लादेशी छात्रों का आरोप है कि 'फुली फंडेड' वादे के बावजूद भोजन, परिवहन और हवाई यात्रा का खर्च नहीं मिल रहा। कई छात्रों ने स्कॉलरशिप अस्वीकार की, पाकिस्तान सरकार चुप।

मुख्य बातें

पाकिस्तान सरकार की नॉलेज कॉरिडोर पहल के तहत 5 वर्षों में बांग्लादेशी छात्रों को 500 फुली फंडेड स्कॉलरशिप देने का वादा किया गया था।
ऑफर लेटर में केवल ट्यूशन फीस और डॉर्मिटरी की छूट शामिल; भोजन, परिवहन, हवाई यात्रा और मासिक भत्ता अनुपस्थित।
पहले बैच के 74 छात्र फरवरी से पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
दूसरे चरण के चयनित कई छात्रों ने शर्तों से असंतुष्ट होकर स्कॉलरशिप अस्वीकार करने का फैसला किया।
पाकिस्तान सरकार और HEC की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पाकिस्तान सरकार की 'नॉलेज कॉरिडोर' पहल के तहत बांग्लादेशी छात्रों को दी गई 'फुली फंडेड' स्कॉलरशिप विवादों में घिर गई है। चयनित छात्रों का आरोप है कि घोषणा के समय जो वादे किए गए थे, उनके अनुरूप सुविधाएँ प्रदान नहीं की जा रही हैं — ऑफर लेटर में केवल ट्यूशन फीस और आवास शामिल हैं, जबकि भोजन, परिवहन, हवाई यात्रा और मासिक भत्ते का कोई प्रावधान नहीं है। इस स्थिति से निराश कई छात्रों ने स्कॉलरशिप अस्वीकार करने का फैसला किया है।

नॉलेज कॉरिडोर की पृष्ठभूमि

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा सहयोग को मज़बूत करने के उद्देश्य से 'नॉलेज कॉरिडोर' पहल की घोषणा की थी। इसके तहत पाँच वर्षों में बांग्लादेशी छात्रों को 500 फुली फंडेड स्कॉलरशिप देने का वादा किया गया था।

पाकिस्तान के हायर एजुकेशन कमीशन (HEC) द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के तहत परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रमों के लिए छात्रों को ऑफर लेटर जारी किए गए। पहले बैच के करीब 74 छात्र फरवरी में पाकिस्तान की विभिन्न विश्वविद्यालयों में दाखिला ले चुके हैं।

छात्रों के आरोप और वास्तविक स्थिति

मई में ढाका में दूसरे चरण की स्कॉलरशिप की घोषणा की गई और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों को बताया गया कि उन्हें केवल ट्यूशन फीस और डॉर्मिटरी में छूट मिलेगी। छात्रों के अनुसार, इस ऑफर में मासिक भत्ता, भोजन, परिवहन और हवाई यात्रा का कोई प्रावधान नहीं है — जबकि 'फुली फंडेड' स्कॉलरशिप की घोषणा के समय इन सुविधाओं को शामिल माना जाता था।

बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया के अनुसार, एक चयनित छात्र ने कहा कि 'छात्रों से एक बात कही गई और बाद में दूसरी व्यवस्था सामने आई', जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह आरोप उन छात्रों की ओर से उठाया गया है जो परीक्षा उत्तीर्ण कर चयन प्रक्रिया पार कर चुके थे।

पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया

उल्लेखनीय है कि स्कॉलरशिप की शर्तों को लेकर उठे इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या HEC की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है। इस चुप्पी ने छात्रों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की कोशिश हो रही है। शैक्षणिक सहयोग को इस रिश्ते की नींव के रूप में पेश किया गया था।

छात्रों पर असर और आगे की राह

निराश छात्रों की एक बड़ी संख्या ने स्कॉलरशिप स्वीकार करने से इनकार करने का फैसला किया है, क्योंकि ट्यूशन और आवास के अलावा बाकी खर्च खुद वहन करना उनके लिए संभव नहीं है। इससे नॉलेज कॉरिडोर पहल के दूसरे चरण के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।

यदि पाकिस्तान सरकार स्कॉलरशिप की शर्तों में संशोधन नहीं करती या स्पष्टीकरण नहीं देती, तो इस शैक्षणिक कूटनीतिक पहल की विश्वसनीयता को गहरा नुकसान पहुँचने की आशंका है। दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग का भविष्य अब काफी हद तक इस विवाद के समाधान पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पहले ही चरण में पारदर्शिता की कमी ने उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। HEC की चुप्पी और सरकारी स्पष्टीकरण का अभाव यह संकेत देता है कि वित्तीय प्रतिबद्धता को शुरू से ही सीमित रखने की योजना थी — जो कि छात्रों को सूचित किए बिना की गई। ऐसे में यदि इस विवाद का त्वरित और पारदर्शी समाधान नहीं हुआ, तो यह पहल दोनों देशों के बीच अविश्वास की एक नई परत जोड़ देगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान की 'नॉलेज कॉरिडोर' स्कॉलरशिप पहल क्या है?
यह पाकिस्तान सरकार द्वारा बांग्लादेशी छात्रों के लिए शुरू की गई शैक्षणिक सहयोग पहल है, जिसके तहत पाँच वर्षों में 500 फुली फंडेड स्कॉलरशिप देने का वादा किया गया था। इसकी घोषणा पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश दौरे के दौरान की थी।
बांग्लादेशी छात्रों को स्कॉलरशिप में क्या सुविधाएँ नहीं मिल रहीं?
छात्रों के अनुसार ऑफर लेटर में केवल ट्यूशन फीस और डॉर्मिटरी की छूट शामिल है। भोजन, परिवहन, हवाई यात्रा और मासिक भत्ता — जो 'फुली फंडेड' स्कॉलरशिप में अपेक्षित होते हैं — उसमें शामिल नहीं हैं।
कितने बांग्लादेशी छात्र इस स्कॉलरशिप के पहले बैच में हैं?
पहले बैच में करीब 74 छात्रों ने फरवरी में पाकिस्तान की विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई शुरू की। दूसरे चरण की चयन प्रक्रिया मई में ढाका में घोषित स्कॉलरशिप के तहत पूरी हुई।
क्या पाकिस्तान सरकार ने इस विवाद पर कोई जवाब दिया है?
अब तक पाकिस्तान सरकार या HEC की ओर से स्कॉलरशिप की शर्तों को लेकर उठे आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस चुप्पी ने छात्रों की चिंताओं को और गहरा किया है।
इस विवाद का पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की कोशिश कर रहे हैं और 'नॉलेज कॉरिडोर' को इस रिश्ते की नींव के रूप में पेश किया गया था। यदि स्कॉलरशिप की शर्तों का पारदर्शी समाधान नहीं हुआ, तो शैक्षणिक कूटनीति की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँच सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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