बांग्लादेश स्टार्टअप संकट: फंडिंग में भारी गिरावट, कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम गंभीर संकट में है — कंपनियां कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हो रही हैं।
- मार्च 2025 में 'चालदाल' के जशोर दफ्तर के बाहर सैकड़ों कर्मचारियों ने 4 महीने के बकाया वेतन के लिए विरोध प्रदर्शन किया।
- स्टार्टअप फंडिंग 2021 के 434 मिलियन डॉलर के शिखर से गिरकर 2024 में सिर्फ 42 मिलियन डॉलर रह गई।
- 2010 के बाद से इस क्षेत्र में आई 1.12 अरब डॉलर की फंडिंग का अधिकांश हिस्सा विदेशी निवेशकों का था।
- 2025 में 12 डील्स में से 110 मिलियन डॉलर की एकमात्र डील 'सल्कि ग्रुप' को मिली, जो शॉपअप और सऊदी 'सेरी' के विलय से बना है।
- घरेलू निवेश का अभाव और विदेशी पूंजी पर अत्यधिक निर्भरता इस संकट की मूल वजह मानी जा रही है।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश का एक समय तेजी से उभरता स्टार्टअप इकोसिस्टम अब गंभीर वित्तीय संकट की चपेट में है। फंडिंग में भारी गिरावट के कारण कंपनियां अपने कारोबार को समेटने पर मजबूर हो रही हैं और कई प्रमुख स्टार्टअप्स अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में भी असमर्थ साबित हो रही हैं। यह स्थिति उस देश के लिए बड़ा झटका है जिसने पिछले एक दशक में डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की थी।
चालदाल विवाद: संकट का पहला बड़ा संकेत
मार्च 2025 की शुरुआत में यह संकट तब खुलकर सामने आया जब ऑनलाइन किराना डिलीवरी कंपनी 'चालदाल' के जशोर स्थित दफ्तर के बाहर सैकड़ों कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें चार-चार महीने तक वेतन नहीं दिया गया। 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट में इस घटना को बांग्लादेश के स्टार्टअप क्षेत्र में आई व्यापक मंदी का प्रतीक बताया गया है।
2013 में स्थापित 'चालदाल' बांग्लादेश में ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी की अग्रणी कंपनी रही है और शहरी उपभोक्ताओं के बीच एक विश्वसनीय नाम बन चुकी थी। कंपनी ने 2015 से 2025 के बीच करीब 40 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई और कोविड-19 महामारी के दौरान कंपनी का सालाना राजस्व 55 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया था।
फंडिंग का सुनहरा दौर और अचानक पतन
बांग्लादेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2010 के दशक में 'बीकाश', 'शॉपअप', 'पथाओ' और 'सहज' जैसी कंपनियों के उभार के साथ तेज़ी से विकसित हुआ। इसी दौर में उबर और फूडपांडा जैसी वैश्विक कंपनियों ने भी बांग्लादेश के बाजार में प्रवेश किया। अपने चरम पर देश में 1,200 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय थे और हर साल करीब 200 नए स्टार्टअप शुरू हो रहे थे।
2010 के बाद से इस क्षेत्र में कुल 1.12 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग आई, जिसमें अधिकांश हिस्सा विदेशी निवेशकों का था। 2021 में स्टार्टअप्स ने 94 डील्स के माध्यम से 434 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग हासिल की। इसमें सॉफ्टबैंक द्वारा 'बिकाश' में किया गया 250 मिलियन डॉलर का निवेश सबसे बड़ी डील थी।
लेकिन इसके बाद गिरावट की रफ्तार चौंकाने वाली रही। 2024 तक सालाना फंडिंग घटकर महज 42 मिलियन डॉलर रह गई, जिसमें केवल 41 डील्स हुईं। 2025 में अब तक सिर्फ 12 डील्स दर्ज हुई हैं, जिनसे करीब 124 मिलियन डॉलर आए — लेकिन इस राशि का लगभग पूरा हिस्सा 110 मिलियन डॉलर की एकमात्र डील से आया, जो 'शॉपअप' और सऊदी अरब स्थित 'सेरी' के विलय से बने 'सल्कि ग्रुप' को मिली।
विशेषज्ञों की राय और असली कारण
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यह संकट वैश्विक और स्थानीय दोनों स्तरों पर उत्पन्न दबावों का परिणाम है। वसीम अलीम ने स्वीकार किया कि पिछले 12-13 वर्षों में पहली बार कंपनी को वेतन भुगतान में इस तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं उद्यमी फहीम अहमद का कहना है कि पिछले दो वर्षों में स्टार्टअप्स की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
गौरतलब है कि बांग्लादेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम शुरू से ही विदेशी पूंजी पर अत्यधिक निर्भर रहा है। जब वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ीं और निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता घटी, तो उभरते बाजारों से पूंजी तेजी से वापस खिंची। यही वह कमजोर कड़ी थी जिसने बांग्लादेश के स्टार्टअप क्षेत्र को सबसे पहले और सबसे गहरे प्रभावित किया।
भारत और क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में तुलना
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी स्टार्टअप फंडिंग में गिरावट आई है, लेकिन इन देशों में मजबूत घरेलू निवेशक आधार और बड़े उपभोक्ता बाजार ने इस झटके को काफी हद तक अवशोषित किया। बांग्लादेश में घरेलू वेंचर कैपिटल का अभाव और सीमित पूंजी बाजार इस संकट को और गहरा बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बांग्लादेश घरेलू निवेश का एक मजबूत ढांचा नहीं खड़ा करता, तब तक यह इकोसिस्टम विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना रहेगा।
आगे की राह
बांग्लादेश सरकार और नीति-निर्माताओं के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वे स्थानीय निवेशकों को स्टार्टअप क्षेत्र में प्रोत्साहित करें और कंपनियों को टिकाऊ राजस्व मॉडल विकसित करने में मदद करें। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या 'चालदाल' जैसी कंपनियां पुनर्गठन के जरिए खुद को बचा पाती हैं या यह संकट और अधिक स्टार्टअप्स को बंद होने पर मजबूर करता है।