18 सितंबर 2026
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बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल मंगुभाई पटेल बोले — 2047 तक विकसित भारत के लिए युवाशक्ति अनिवार्य

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बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल मंगुभाई पटेल बोले — 2047 तक विकसित भारत के लिए युवाशक्ति अनिवार्य

सारांश

भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने युवाओं को 2047 के विकसित भारत का आधार बताया। 85 शोधार्थियों को पी.एच.डी. और 27 को स्वर्ण पदक मिले। मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बताया कि इस वर्ष उच्च शिक्षा में बेटियों का नामांकन लड़कों से अधिक रहा।

मुख्य बातें

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 18 सितंबर 2026 को बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह में कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लिए युवाशक्ति अनिवार्य है।
समारोह में 85 शोधार्थियों को पी.एच.डी.
उपाधि और 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बताया कि मध्य प्रदेश में इस वर्ष उच्च शिक्षा में बेटियों का नामांकन लड़कों से अधिक रहा।
रंगराजन ने कहा कि वैश्विक अवसरों के लिए अब विदेश जाना ज़रूरी नहीं — भारत में ही अपार संभावनाएँ हैं।
राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा का हवाला देते हुए चरित्र निर्माण और लोक कल्याण पर बल दिया।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 18 सितंबर 2026 को भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने में युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और जनसेवा की भावना निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के व्यापक हित में भी लगाएँ।

मुख्य संदेश: सफलता के साथ विनम्रता और कृतज्ञता

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की यात्रा अपने आप में अनूठी होती है और उपलब्धियों पर गर्व स्वाभाविक है। किंतु उन्होंने स्मरण दिलाया कि इस सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग और शिक्षकों का सहयोग अनमोल है — इसे कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे जहाँ भी जाएँ, अपने विश्वविद्यालय और परिवार की गरिमा को ऊँचा रखने का संकल्प लें।

भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा का संदर्भ

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा कभी केवल सूचना या ज्ञान संचय का माध्यम नहीं रही — यह सत्य की खोज, चरित्र निर्माण और लोक कल्याण का पथ रही है। उन्होंने श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा के गुरु सांदीपनि के आश्रम में एक समान शिक्षा प्राप्त करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में समानता, अनुशासन और चरित्र निर्माण को सर्वोपरि स्थान दिया गया है।

उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी एवं शिक्षाविद् बरकतउल्लाह के देशप्रेम और अपनी माटी की सेवा के जज़्बे को भी याद किया और विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी

उच्च तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने दीक्षांत समारोह में घोषणा की कि मध्य प्रदेश में इस वर्ष उच्च शिक्षा में बेटियों का नामांकन लड़कों की तुलना में अधिक दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा केवल शिक्षा के क्षेत्र का बदलाव नहीं, बल्कि एक बदलते और सशक्त होते भारत की तस्वीर है।

वैश्विक अवसर अब भारत में ही: कुलपति प्रो. रंगराजन

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. के. रंगराजन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज वैश्विक होने के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारत में ही अपार अवसर उपलब्ध हो गए हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज़ी से विस्तार पा रही है।

उपाधि और पुरस्कार वितरण

अपर मुख्य सचिव एवं कुलगुरू अनुपम राजन ने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में 85 शोधार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि और 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ भी दिलाई। यह समारोह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगन का उत्सव है जो नई ज़िम्मेदारियों और अवसरों के द्वार खोलता है। राज्यपाल के संबोधन के साथ यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर ठोस नीतिगत रोडमैप से प्रायः खाली रहती है। 2047 के 'विकसित भारत' का लक्ष्य केंद्र सरकार की आधिकारिक नीति है, लेकिन इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए राज्य स्तर पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, रोज़गार योग्यता और अनुसंधान निवेश जैसे प्रश्न अनुत्तरित रहते हैं। बेटियों के नामांकन की बढ़त निस्संदेह उत्साहजनक है, परंतु नामांकन और गुणवत्तापूर्ण रोज़गार के बीच की खाई को पाटने की रणनीति अभी भी स्पष्ट नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि 85 पी.एच.डी. और 27 स्वर्ण पदक किन विषयों में दिए गए और उन शोधार्थियों की रोज़गार स्थिति क्या है — ये आँकड़े ही असली माप हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह 2026 में क्या हुआ?
18 सितंबर 2026 को भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल मुख्य अतिथि थे। समारोह में 85 शोधार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि और 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
राज्यपाल पटेल ने कहा कि युवाओं को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के हित में भी लगाना चाहिए। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की ऊर्जा और नवाचार को अनिवार्य बताया।
मध्य प्रदेश में बेटियों के उच्च शिक्षा नामांकन की स्थिति क्या है?
मंत्री इन्दर सिंह परमार ने दीक्षांत समारोह में बताया कि इस वर्ष मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा में बेटियों का नामांकन लड़कों की तुलना में अधिक हुआ है। उन्होंने इसे बदलते और सशक्त होते भारत की तस्वीर बताया।
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम किसके नाम पर है?
विश्वविद्यालय का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी एवं शिक्षाविद् बरकतउल्लाह के नाम पर रखा गया है। राज्यपाल पटेल ने समारोह में उनके देशप्रेम और अपनी माटी की सेवा के जज़्बे को याद किया।
प्रो. के. रंगराजन ने विद्यार्थियों को क्या सलाह दी?
भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. के. रंगराजन ने कहा कि आज वैश्विक होने के लिए विदेश जाना ज़रूरी नहीं है क्योंकि भारत में ही अपार अवसर उपलब्ध हो गए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को देश में रहकर अपनी क्षमताओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्र प्रेस
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