असम: फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल सदस्य गिरफ्तार, जमानत के बदले ₹15,000 की कथित मांग
सारांश
मुख्य बातें
असम के उदलगुरी जिले में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के एक सदस्य को 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने ट्रिब्यूनल में एक मामले में जमानत दिलाने के एवज में कथित तौर पर ₹15,000 की माँग की थी। पुलिस के बयान के अनुसार, यह गिरफ्तारी माजबाट पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत की जाँच के बाद की गई।
कौन है आरोपी
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान भूपेन चंद्र पेगू के रूप में हुई है, जो उदलगुरी जिले के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के सदस्य थे। पुलिस के अनुसार, 29 अगस्त को एक शिकायत प्राप्त होने के बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पेगू ने ट्रिब्यूनल की जमानत प्रक्रिया के सिलसिले में यह राशि माँगी थी।
पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है, जो जबरन वसूली से संबंधित है। अधिकारियों ने अब तक शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की भूमिका
फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल असम में एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसे उन मामलों की सुनवाई के लिए गठित किया गया है जिनमें किसी व्यक्ति के विदेशी होने का संदेह हो। ये ट्रिब्यूनल साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेते हैं कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक है या विदेशी।
यह संस्था असम में नागरिकता निर्धारण प्रक्रिया की एक केंद्रीय कड़ी है। ऐसे में किसी ट्रिब्यूनल सदस्य पर वित्तीय अनियमितता के आरोप संवेदनशील माने जाते हैं।
निष्पक्षता पर उठे सवाल
जमानत के बदले कथित रूप से धन माँगने के इस मामले ने उन कार्यवाहियों की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें लोगों की नागरिकता की जाँच होती है। आलोचकों का कहना है कि यदि इस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो यह उन लाखों लोगों के अधिकारों को प्रभावित करती है जिनकी नागरिकता ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब असम में नागरिकता निर्धारण से जुड़ी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर लगातार सार्वजनिक और न्यायिक नज़र बनी हुई है।
जाँच की स्थिति
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भूपेन चंद्र पेगू पर लगे आरोपों की जाँच अभी जारी है और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। जाँच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस मामले में अन्य व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है या नहीं।
जिस विशेष ट्रिब्यूनल मामले में कथित तौर पर धन की माँग की गई थी, उसके विवरण भी अधिकारियों ने अब तक साझा नहीं किए हैं।
आगे क्या होगा
मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ-साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि असम सरकार और न्यायिक प्रशासन फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की निगरानी व जवाबदेही को लेकर क्या कदम उठाते हैं। इस गिरफ्तारी से ट्रिब्यूनल प्रणाली में आंतरिक पारदर्शिता के सवाल और मुखर हो सकते हैं।