25 जुलाई 2026
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मंगलुरु: यूथ कांग्रेस महासचिव समेत दो गिरफ्तार, व्यापारी से ₹2.77 करोड़ की ब्लैकमेलिंग का आरोप

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मंगलुरु: यूथ कांग्रेस महासचिव समेत दो गिरफ्तार, व्यापारी से ₹2.77 करोड़ की ब्लैकमेलिंग का आरोप

सारांश

मंगलुरु में यूथ कांग्रेस महासचिव निजाम और उसके साथी जितेश ने एक व्यापारी को अश्लील वीडियो और फर्जी आत्महत्या की साजिश से ब्लैकमेल कर दो वर्षों में ₹2.77 करोड़ वसूले। पीड़ित ने जितेश को जीवित देखा तो पूरा षड्यंत्र उजागर हो गया और दोनों गिरफ्तार हुए।

मुख्य बातें

मंगलुरु पुलिस ने 9 जून 2026 को यूथ कांग्रेस महासचिव निजाम और साथी जितेश को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने व्यापारी की अश्लील तस्वीरों व वीडियो से ब्लैकमेल कर शुरुआत में ₹35 लाख वसूले।
मई 2024 में फर्जी आत्महत्या और सुसाइड नोट की साजिश रचकर डर का माहौल बनाया गया।
2024 से 2026 के बीच पीड़ित से कुल ₹2.77 करोड़ वसूले गए।
धोखाधड़ी तब उजागर हुई जब पीड़ित ने जून 2026 में जितेश को मंगलुरु में जीवित देखा और उरवा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
गिरफ्तारी के बाद निजाम की कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल।

मंगलुरु पुलिस ने 9 जून 2026 को यूथ कांग्रेस के मंगलुरु महासचिव निजाम और उसके साथी जितेश को एक स्थानीय व्यापारी से ₹2.77 करोड़ की जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, यह वसूली 2024 से 2026 के बीच लगभग दो वर्षों में ब्लैकमेल और फर्जी आत्महत्या की साजिश के ज़रिए की गई।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के बयान के अनुसार, जितेश ने पहले पीड़ित व्यापारी को अपने जाल में फँसाया और फिर उसकी अश्लील तस्वीरों व वीडियो का उपयोग कर ब्लैकमेल करना शुरू किया। शुरुआत में ₹35 लाख की माँग की गई और वीडियो व्यापारी की पत्नी को दिखाने की धमकी दी गई। बदनामी के भय से व्यापारी ने चेक के माध्यम से यह राशि चुका दी।

जब माँगें थमी नहीं, तो पीड़ित ने मदद के लिए निजाम से संपर्क किया। पुलिस का आरोप है कि निजाम ने सहायता करने के बजाय जितेश का साथ दिया और इस जबरन वसूली के रैकेट में सक्रिय भागीदार बन गया।

फर्जी आत्महत्या की साजिश

मई 2024 में आरोपियों ने एक और षड्यंत्र रचा — निजाम ने व्यापारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में पीड़ित का नाम दर्ज है। इस झूठ को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर जितेश की 'मृत्यु' और 'अंतिम संस्कार' की फर्जी तस्वीरें भी दिखाईं। इसके बाद व्यापारी को आपराधिक मामले में फँसाने की धमकी देकर पैसे वसूले जाते रहे।

धोखाधड़ी का भंडाफोड़

यह पूरा षड्यंत्र जून 2026 में उस समय उजागर हुआ जब पीड़ित व्यापारी ने मंगलुरु में जितेश को जीवित देखा — वही व्यक्ति जिसे वह मृत समझ रहा था। हैरान व्यापारी ने तत्काल उरवा पुलिस स्टेशन पहुँचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया

गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर निजाम की मंगलुरु और कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल हो गई हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से जुड़े आपराधिक मामले पहले से ही चर्चा में हैं।

आगे की जाँच

पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, वसूली की कुल राशि ₹2.77 करोड़ आँकी गई है, जो दो वर्षों में विभिन्न किस्तों में ली गई। आगे की जाँच में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संगठनात्मक निगरानी की गंभीर विफलता दर्शाता है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें यह सवाल उठाती हैं कि राजनीतिक नेतृत्व को ऐसे आरोपियों की पृष्ठभूमि की जाँच कब और कैसे होती है। जब तक दल आंतरिक सत्यापन तंत्र नहीं बनाते, ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगलुरु ब्लैकमेल मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने मंगलुरु यूथ कांग्रेस के महासचिव निजाम और उनके साथी जितेश को गिरफ्तार किया है। दोनों पर एक स्थानीय व्यापारी से ₹2.77 करोड़ की जबरन वसूली का आरोप है।
आरोपियों ने व्यापारी को कैसे ब्लैकमेल किया?
आरोप के अनुसार, जितेश ने पहले व्यापारी को जाल में फँसाया और फिर उसकी अश्लील तस्वीरों व वीडियो का उपयोग कर ₹35 लाख की माँग की। बाद में फर्जी आत्महत्या और सुसाइड नोट की साजिश रचकर आपराधिक मामले में फँसाने की धमकी दी गई।
यह धोखाधड़ी कैसे उजागर हुई?
जून 2026 में पीड़ित व्यापारी ने मंगलुरु में जितेश को जीवित देखा, जबकि उसे बताया गया था कि जितेश की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद व्यापारी ने उरवा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और पूरा षड्यंत्र उजागर हो गया।
पीड़ित व्यापारी से कुल कितनी रकम वसूली गई?
पुलिस के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच लगभग दो वर्षों में पीड़ित व्यापारी से कुल ₹2.77 करोड़ वसूले गए। यह राशि विभिन्न किस्तों में चेक और अन्य माध्यमों से ली गई।
इस मामले का राजनीतिक प्रभाव क्या है?
गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर निजाम की कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल हो गई हैं। मामले की जाँच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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