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सूरत टेक्सटाइल धोखाधड़ी: हर्ष संघवी के आदेश पर 7 दिनों में डेढ़ साल से फरार आरोपी गिरफ्तार

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सूरत टेक्सटाइल धोखाधड़ी: हर्ष संघवी के आदेश पर 7 दिनों में डेढ़ साल से फरार आरोपी गिरफ्तार

सारांश

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के एक कड़े आदेश ने वह कर दिखाया जो डेढ़ साल की पुलिस जाँच नहीं कर पाई — ₹23.50 लाख की धोखाधड़ी में फरार आरोपी 7 दिनों में गिरफ्तार। सूरत के टेक्सटाइल व्यापारियों के लिए यह राहत है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि बिना राजनीतिक दखल के न्याय कितना सुलभ है।

मुख्य बातें

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के निर्देश पर सूरत क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई की।
आरोपी मोहम्मद जकीरिया डेढ़ साल से फरार था; 7 दिनों में गिरफ्तार हुआ।
तीन टेक्सटाइल व्यापारियों से कुल ₹23.50 लाख की धोखाधड़ी का आरोप।
पीड़ित व्यापारी मनीष पटेल ने स्वयं गांधीनगर जाकर उपमुख्यमंत्री से मुलाकात की थी।
आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया; मुकदमा जारी रहेगा।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री हर्ष संघवी के कड़े निर्देश के बाद सूरत क्राइम ब्रांच ने मात्र 7 दिनों के भीतर डेढ़ साल से फरार चल रहे आरोपी मोहम्मद जकीरिया को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला सूरत के टेक्सटाइल कारोबारियों के साथ ₹23.50 लाख की धोखाधड़ी से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद पीड़ित व्यापारियों ने उपमुख्यमंत्री संघवी और सूरत पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया।

मामले का पूरा घटनाक्रम

आरोपी मोहम्मद जकीरिया ने 2017 में सूरत के बमरोली स्थित हरिओम इंडस्ट्रियल सोसायटी-2 में ग्रे यार्न का कारोबार शुरू किया था। उसने जय अंबिका टेक्सटाइल्स के मनीष पटेल, देव टेक्सटाइल्स के जय पटेल और जय साधिमा टेक्सटाइल्स के रोहित पटेल के साथ साझेदारी में व्यवसाय किया।

शुरुआती दौर में आरोपी ने समय पर भुगतान करके तीनों व्यापारियों का विश्वास अर्जित किया। इसके बाद उसने बड़ी मात्रा में ग्रे कपड़ा उधार पर लिया और ग्रे यार्न खरीद के नाम पर मनीष पटेल से ₹13 लाख, जय पटेल से ₹3.80 लाख तथा रोहित पटेल से ₹6.46 लाख — कुल ₹23.50 लाख — ले लिए।

आरोप है कि जब पीड़ित व्यापारियों ने बकाया राशि माँगी तो उन्हें धमकाया गया। इसके बाद पीड़ितों ने सलाबतपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और न्यायालय में कानूनी कार्रवाई भी की। हालाँकि, आरोपी ने अपनी दुकान का पता बदल-बदलकर और अदालती सुनवाई से गैरहाजिर रहकर कानून की पकड़ से बचने की कोशिश की।

उपमुख्यमंत्री का हस्तक्षेप

पुलिस की लंबी जाँच के बावजूद आरोपी के बार-बार ठिकाना बदलने से कार्रवाई अटकी रही। अंततः पीड़ित व्यापारी मनीष पटेल स्वयं गांधीनगर पहुँचे और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी से मुलाकात की। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, संघवी ने शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लिया और सूरत डीसीपी क्राइम ब्रांच को तत्काल एवं कठोर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए।

7 दिनों में हुई गिरफ्तारी

उपमुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही सूरत क्राइम ब्रांच डीसीपी बी.पी. रोजिया और उनकी टीम ने जाँच की रफ्तार तेज कर दी। पुलिस ने 7 दिनों से भी कम समय में डेढ़ साल से फरार आरोपी मोहम्मद जकीरिया को पकड़ा और उसे न्यायालय में पेश करके जेल भेज दिया।

पीड़ित व्यापारियों की प्रतिक्रिया

इस त्वरित कार्रवाई पर पीड़ित व्यापारी मनीष पटेल ने संतोष जताते हुए कहा, 'हम कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन गांधीनगर जाकर उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के सामने मामला रखने के बाद, जिस तरह उन्होंने तुरंत सख्त आदेश दिए और क्राइम ब्रांच को सक्रिय किया, उससे गांधीनगर में हमारी कोशिश पूरी तरह रंग लाई है। उपमुख्यमंत्री और सूरत पुलिस की इस जल्दी कार्रवाई से हमें इंसाफ मिला है।' उन्होंने टेक्सटाइल सेक्टर के अन्य व्यापारियों से अपील की कि वे बिना घबराए पुलिस और सरकार से संपर्क करें।

आगे क्या होगा

आरोपी के न्यायिक हिरासत में जाने के बाद अब न्यायालय में मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह मामला सूरत के टेक्सटाइल कारोबार में क्रेडिट-आधारित लेनदेन के जोखिमों को भी उजागर करता है, जहाँ छोटे व्यापारी अक्सर ऐसे धोखाधड़ी के शिकार होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च-स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना ऐसे मामलों में न्याय मिलने में वर्षों लग सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन साथ ही एक असुविधाजनक सच्चाई भी उजागर करता है — आरोपी डेढ़ साल तक फरार रहा और तब पकड़ा गया जब पीड़ित को उपमुख्यमंत्री तक सीधी पहुँच मिली। सवाल यह है कि जिन व्यापारियों के पास गांधीनगर तक पहुँचने के साधन या संपर्क नहीं हैं, उनके लिए न्याय की राह कितनी लंबी है? क्राइम ब्रांच की 7 दिनों की सफलता यह भी दर्शाती है कि क्षमता थी — बस प्राथमिकता की कमी थी। टेक्सटाइल उद्योग में क्रेडिट-आधारित लेनदेन के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए, राज्य सरकार को व्यापारिक धोखाधड़ी के लिए एक स्वतंत्र और तेज़ शिकायत निवारण तंत्र बनाने पर विचार करना चाहिए।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत टेक्सटाइल धोखाधड़ी मामला क्या है?
यह मामला सूरत के तीन टेक्सटाइल व्यापारियों के साथ ₹23.50 लाख की धोखाधड़ी से जुड़ा है। आरोपी मोहम्मद जकीरिया ने 2017 में साझेदारी में ग्रे यार्न का कारोबार शुरू किया, विश्वास जीतकर उधार माल और नकद लिया, और फिर भुगतान से इनकार करते हुए धमकी देकर फरार हो गया।
आरोपी को इतनी जल्दी कैसे पकड़ा गया?
पीड़ित व्यापारी मनीष पटेल ने गांधीनगर जाकर उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी से सीधे मुलाकात की। संघवी ने सूरत डीसीपी क्राइम ब्रांच को तत्काल कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए, जिसके बाद डीसीपी बी.पी. रोजिया की टीम ने 7 दिनों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के खिलाफ अब क्या होगा?
मोहम्मद जकीरिया को न्यायालय में पेश किया जा चुका है और उसे जेल भेज दिया गया है। अब न्यायालय में धोखाधड़ी और धमकी के आरोपों पर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पीड़ित व्यापारियों ने पहले शिकायत क्यों नहीं की?
पीड़ित व्यापारियों ने सलाबतपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी और न्यायालय में कानूनी कार्रवाई भी की थी। हालाँकि, आरोपी बार-बार ठिकाना बदलता रहा और अदालती सुनवाई से गैरहाजिर रहा, जिससे गिरफ्तारी में देरी हुई।
सूरत के अन्य टेक्सटाइल व्यापारी ऐसे मामलों में क्या करें?
पीड़ित व्यापारी मनीष पटेल ने अपील की है कि अन्य व्यापारी बिना डरे पुलिस और सरकार से संपर्क करें। उनके अनुसार, सिस्टम सहयोग के लिए तैयार है और उच्च-स्तरीय शिकायत पर त्वरित कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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