तृणमूल नेता इफ्तिखार अहमद गिरफ्तार: पूर्वी बर्दवान में रंगदारी और जानलेवा धमकी के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले की पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रभावशाली नेता इफ्तिखार अहमद उर्फ पप्पू को बुधवार, 2 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया। उन पर हथियार दिखाकर रंगदारी वसूलने और जान से मारने की धमकी देने सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी पड़ोसी पश्चिमी बर्दवान जिले के दुर्गापुर क्षेत्र के विरिंगी इलाके से की गई।
मुख्य घटनाक्रम
इफ्तिखार अहमद, बर्दवान नगर पालिका की पूर्व पार्षद शेफाली बेगम के पति हैं, जिन्होंने पिछले महीने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। गुरुवार को जब उन्हें बर्दवान जिला अदालत में पेश किया गया, तो पुलिस ने विस्तृत जाँच के लिए 10 दिन की हिरासत की माँग की। अदालत ने 3 दिन की पुलिस हिरासत का आदेश दिया।
पुलिस का कहना है कि अहमद 2019 से 2026 के बीच अपने राजनीतिक संपर्कों और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए बर्दवान स्टेशन और बर्दवान शहर के व्यापारियों व आम नागरिकों से जबरन रंगदारी वसूल रहे थे।
शिकायतकर्ता पर हमले की कहानी
यह मामला 26 मई 2026 को दर्ज एक लिखित शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता शिवशंकर चौधरी ने आरोप लगाया कि रंगदारी देने से इनकार करने पर बर्दवान रेलवे स्टेशन के पास उनकी दुकान पर हमला किया गया और तोड़फोड़ की गई। उन्हें कथित तौर पर बंदूक की नोक पर जान से मारने की धमकी दी गई और विरोध करने पर उनकी पत्नी के साथ भी मारपीट की गई।
इसके बाद आरोपी कथित तौर पर उनके घर में घुस गए और नकदी व सोने के गहने लूट लिए। पुलिस के अनुसार, अहमद ने इलाके में अवैध हथियारों के बल पर डर का माहौल बनाए रखा था।
राजनीतिक कनेक्शन और रंगदारी नेटवर्क
जाँच में सामने आया है कि अहमद ने बर्दवान दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व तृणमूल विधायक खोकन दास से अपनी करीबी का फायदा उठाकर रंगदारी से भारी रकम वसूली। पुलिस का दावा है कि यह राशि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निवेश की गई थी।
गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संरक्षण में पनपने वाले जबरन वसूली के उन कथित नेटवर्कों की ओर ध्यान दिलाता है, जिन पर आलोचक लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, अहमद ने पूछताछ में कई अहम जानकारियाँ दी हैं।
जाँच की अगली दिशा
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार तृणमूल नेता ने रंगदारी नेटवर्क और अवैध हथियारों का पता लगाने में सहयोग का आश्वासन दिया है। 3 दिन की पुलिस हिरासत के दौरान जाँचकर्ता इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने का प्रयास करेंगे। यह देखना बाकी है कि इस मामले में और कितने नाम सामने आते हैं और क्या तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।