पीयूष गोयल और कनाडाई मंत्री मनिंदर सिद्धू की मुलाकात, भारत-कनाडा CEPA को 2026 के अंत तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 18 सितंबर 2026 को कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ नई दिल्ली में मुलाकात की और भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए / CEPA) की वार्ताओं को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया। दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने नेतृत्व की उस प्रतिबद्धता को दोहराया कि इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
बैठक में क्या हुआ
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने वस्तुओं, सेवाओं और निवेश सहित कई क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से सीईपीए वार्ताओं में तेजी लाने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि समझौते के शीघ्र निष्कर्ष से भारत-कनाडा द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आर्थिक साझेदारी और भी मजबूत होगी।
चौथे दौर की वार्ता और पृष्ठभूमि
इस सप्ताह नई दिल्ली में प्रस्तावित सीईपीए के लिए चौथे दौर की वार्ता आयोजित की गई, जो पाँच दिनों तक चली। इन वार्ताओं में वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, मूल नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) और तकनीकी व्यापार बाधाएं जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल रहे। इससे पहले तीसरा दौर जुलाई 2026 में कनाडा की राजधानी ओटावा में संपन्न हुआ था।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मार्च 2026 में नई दिल्ली में हुई शिखर बैठक के दौरान सीईपीए वार्ताओं को वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की थी।
द्विपक्षीय व्यापार का परिदृश्य
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा। इसमें कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर था। भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में दवा उत्पाद, मशीनरी, लोहा-इस्पात उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, आभूषण, रत्न, परिधान, समुद्री उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।
वहीं कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का पल्प, विमान के पुर्जे और लोहा-एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं। सेवा क्षेत्र में भारत का IT उद्योग कनाडा को सेवाओं के निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है।
सीईपीए से क्या बदलेगा
सीईपीए लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में सक्रिय है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीईपीए से भारतीय IT सेवाओं, फार्मा और वस्त्र उद्योग को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
आने वाले महीनों में वार्ताओं की गति और राजनीतिक प्रतिबद्धता यह तय करेगी कि समझौता वर्ष 2026 की समयसीमा के भीतर साकार हो पाता है या नहीं।