सोनम वांगचुक ने बातचीत की धीमी गति पर जताई निराशा, लेह-कारगिल के बीच चिंता बढ़ी

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सोनम वांगचुक ने बातचीत की धीमी गति पर जताई निराशा, लेह-कारगिल के बीच चिंता बढ़ी

सारांश

लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संवाद में देरी से लोगों में निराशा और विभाजन की भावना बढ़ सकती है।

Key Takeaways

  • सोनम वांगचुक ने केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की धीमी गति पर चिंता जताई।
  • बातचीत में देरी के कारण लोगों में निराशा बढ़ रही है।
  • वांगचुक ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से कदम उठाने की अपील की।
  • लद्दाख में सामाजिक आंदोलन हिंसक हो गए थे।
  • वांगचुक को 170 दिन हिरासत में रखा गया था।

श्रीनगर, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लद्दाख के प्रमुख सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत की धीमी गति पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने सोमवार को कहा कि संवाद में हो रही देरी से लोगों में निराशा बढ़ रही है और इससे लेह-कारगिल के बीच विभाजन की भावना भी प्रबल हो सकती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वांगचुक ने लिखा, "आज मेरी एनएसए के तहत हिरासत खत्म होने का एक महीना पूरा हुआ है। इस आदेश से हमें उम्मीद थी कि केंद्र सरकार अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का प्रयास करेगी और आपसी विश्वास के साथ एक सार्थक संवाद को आगे बढ़ाएगी।"

उन्होंने बताया कि 4 फरवरी को हुई आखिरी बातचीत के ढाई महीने बाद भी अब तक अगली बैठक की तारीख तय नहीं की गई है। वांगचुक ने चेतावनी दी कि इस देरी का फायदा उठाकर कुछ संदिग्ध तत्व लेह और कारगिल के बीच, अर्थात बौद्ध और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे राष्ट्रीय हित में शीघ्र कदम उठाएं और इस मुद्दे का समाधान करें।

लद्दाख में लद्दाख एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) लंबे समय से राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची में समावेश और जमीन व सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

इन मांगों के चलते 24 सितंबर 2025 को शुरू हुआ शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक हो गया था। लेह में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में चार लोगों की जान चली गई थी जबकि 80 से अधिक लोग, जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे, घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें भी हुईं, जिसमें भाजपा कार्यालय और पुलिस वाहनों को आग लगा दी गई।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस, लाठीचार्ज और अंततः गोलियां चलानी पड़ीं। इसी दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप था।

करीब 170 दिन हिरासत में रहने के बाद उन्हें 14 मार्च को जोधपुर केंद्रीय कारागार से रिहा किया गया। केंद्र सरकार ने लद्दाख में संवाद को आगे बढ़ाने के लिए उनका हिरासत समाप्त कर दिया था। अब एक बार फिर वांगचुक ने सरकार से बातचीत तेज करने और हालात को संभालने की अपील की है।

Point of View

बल्कि देश के राष्ट्रीय हित को भी चुनौती दे सकती है। संवाद की गति को तेज करना आवश्यक है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

सोनम वांगचुक कौन हैं?
सोनम वांगचुक लद्दाख के एक प्रमुख सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता हैं।
बातचीत की धीमी गति का क्या प्रभाव है?
बातचीत की धीमी गति से लोगों में निराशा और विभाजन की भावना बढ़ सकती है।
क्या वांगचुक ने सरकार से कुछ माँगा है?
हाँ, उन्होंने केंद्र सरकार से बातचीत की गति तेज करने और समस्या का समाधान करने की अपील की है।
लद्दाख में पिछले प्रदर्शन का क्या कारण था?
लद्दाख में प्रदर्शन राज्य का दर्जा और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा की मांग को लेकर हुए थे।
क्या वांगचुक को गिरफ्तार किया गया था?
हाँ, उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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