दक्षिण मध्य रेलवे ने 487 किलोमीटर रूट के लिए सफलतापूर्वक कवच परीक्षण का कार्य पूरा किया
सारांश
Key Takeaways
- कवच प्रणाली मानव त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करती है।
- 487 किलोमीटर रूट के लिए परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
- ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से ट्रेनों की आवाजाही में सुधार होता है।
- दक्षिण मध्य रेलवे ने सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया है।
- कवच 4.0 की स्थापना में सावधान योजना और कार्यान्वयन शामिल है।
हैदराबाद, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण मध्य रेलवे ने 2025-26 के दौरान 487 किलोमीटर के रूट के लिए कवच क्षेत्र परीक्षण को सफलता के साथ पूरा कर लिया है, जो रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।
कवच एक स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली है, जिसे मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विकसित किया गया है।
यह प्रणाली किसी खतरे के सिग्नल को पार करने वाली ट्रेन के लिए अपने आप ब्रेक लगा सकती है और लगातार स्पीड एवं सिग्नल की निगरानी करके सुरक्षित ट्रेन संचालन को सुनिश्चित करती है।
दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने रविवार को कहा कि उसने सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया है और इस दिशा में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर नेटवर्क में कवच 4.0 की स्थापना के लिए कदम उठाए गए हैं।
यह जोन रेलवे बोर्ड के 402 रूट किलोमीटर के लक्ष्य को पार करते हुए 487 रूट किलोमीटर की दूरी के लिए फील्ड ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है।
एससीआर द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सावधानीपूर्वक योजना और प्रभावी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप यह उल्लेखनीय उपलब्धि संभव हो पाई है।
जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी शुरु किया है, जिससे पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 357 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 479 रूट किलोमीटर (आरकेएम) की दूरी के लिए सेक्शन की क्षमता को बढ़ाने में मदद मिली है।
कवच 4.0 इंस्टॉलेशन का फील्ड परीक्षण विभिन्न खंडों में किया गया था, जैसे काजीपेट पेद्दामपेट (101 मार्ग किमी), मल्काजगिरि कामारेड्डी (106 मार्ग किमी), चारलापल्ली रघुनाथपल्ली (79 मार्ग किमी), गुंतकल रायचूर (120 मार्ग किमी), और मुदखेड परभणी (81) के बीच। इन खंडों में लोको कवच का परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया।
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर ने काजीपेट बलहरशाह, विजयवाड़ा दुव्वाडा और वाडी रेनिगुंटा के बीच 479 रकमाल की दूरी के विभिन्न खंडों में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम को चालू किया है।
ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक ऐसी रेल संचालन प्रणाली है, जिसमें ट्रेनों की आवाजाही स्वचालित स्टॉप सिग्नलों द्वारा नियंत्रित होती है। ये सिग्नल ट्रेनों के गुजरने पर अपने आप सक्रिय होते हैं।
एबीएस प्रणाली का उद्देश्य एक ही दिशा में चलने वाली ट्रेनों को बिना टक्कर के सुरक्षित रूप से एक-दूसरे का अनुसरण करने में सक्षम बनाना है। इससे रेलवे की लागत कम होती है, खंड की क्षमता में सुधार होता है और ट्रेनों की औसत गति भी बढ़ती है।
इस प्रणाली को प्राथमिकता के साथ एससीआर नेटवर्क के उच्च घनत्व वाले और महत्वपूर्ण मुख्य मार्गों पर लागू किया जा रहा है।
एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर सिग्नल और दूरसंचार विंग के अधिकारियों के असाधारण योगदान की सराहना की है, जिसके कारण जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और कवच फील्ड परीक्षणों को रिकॉर्ड स्तर पर सफलतापूर्वक पूरा किया है।
महाप्रबंधक ने यह भी कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कवच और एबीएस को प्राथमिकता दी जाएगी।