सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रवाना किया 'स्पेयर' अभियान, ₄,८५० किमी हिमालयी EV यात्रा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को एक ऐतिहासिक इलेक्ट्रिक वाहन अभियान की शुरुआत की, जिसे सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने दिल्ली छावनी स्थित मानेकशॉ केंद्र से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 'स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स एक्सपीडिशन' (स्पेयर) नाम का यह दल हिमालय की दुर्गम चोटियों, गंगा के मैदानों और पूर्वोत्तर भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों से गुज़रते हुए लगभग ₄,८५० किलोमीटर की यात्रा पूरी करेगा। यह अभियान सेना की हरित परिवहन के प्रति प्रतिबद्धता और इलेक्ट्रिक वाहनों की सैन्य उपयोगिता को परखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
अभियान का मार्ग और प्रमुख पड़ाव
यात्रा की शुरुआत दिल्ली छावनी से हुई है। पहले चरण में सवार उत्तराखंड के माणा गाँव — जिसे भारत का अंतिम बसा हुआ गाँव माना जाता है — तक पहुँचेंगे। इसके बाद दल उत्तर प्रदेश के गंगा मैदानी क्षेत्र से होते हुए पूर्व दिशा की ओर बढ़ेगा और हिमालय के अत्यंत दुर्गम इलाकों में प्रवेश करेगा।
अभियान में नाथू ला और बुम ला जैसे ऊँचाई वाले दर्रों को पार करना शामिल है, जो समुद्र तल से ₄,५०० मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित हैं। इन स्थानों पर तीव्र ठंड, विरल वायुमंडल और कठिन चढ़ाई जैसी परिस्थितियाँ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वास्तविक परीक्षा बनेंगी।
अभियान का उद्देश्य और वैज्ञानिक महत्व
इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य यह आकलन करना है कि इलेक्ट्रिक वाहन अत्यधिक ऊँचाई, कम तापमान और पहाड़ी रास्तों पर कितने भरोसेमंद और व्यावहारिक साबित होते हैं। लंबी दूरी की यात्रा में उनकी बैटरी क्षमता, सहनशक्ति और संचालन-योग्यता की जाँच की जाएगी।
इसके लिए भारतीय सेना के परिचालन अनुभव को सहयोगी कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा। गौरतलब है कि यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है — इससे दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में वैकल्पिक परिवहन की संभावनाओं का भी व्यावहारिक मूल्यांकन होगा, जो सेना की दीर्घकालिक रसद रणनीति के लिए महत्त्वपूर्ण है।
श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय भावना
यह अभियान केवल तकनीकी परीक्षण नहीं है — इसमें देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का भाव भी निहित है। अभियान का समापन 16 नवंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित वालोंग युद्ध स्मारक पर होगा — यह तिथि वालोंग दिवस के साथ मेल खाती है, जो 1962 के युद्ध में वहाँ लड़े सैनिकों की स्मृति में मनाया जाता है।
सेना की हरित पहल और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत स्तर पर प्रयास कर रही है। भारतीय सेना पहले भी सौर ऊर्जा और जैव-ईंधन के प्रयोगों में अग्रणी रही है, लेकिन इतनी लंबी दूरी और ऊँचाई वाले क्षेत्र में EV का इस पैमाने पर परीक्षण पहली बार हो रहा है।
अभियान के निष्कर्ष भविष्य में सेना की वाहन-खरीद नीति और सीमावर्ती रसद व्यवस्था को नया आकार दे सकते हैं। यह पहल साहसिक गतिविधियों और तकनीकी नवाचार को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जोड़ने का एक अनूठा उदाहरण बन सकती है।