‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का समापन: दुर्गम क्षेत्रों की यात्रा का अनूठा अनुभव

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‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का समापन: दुर्गम क्षेत्रों की यात्रा का अनूठा अनुभव

सारांश

थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का समापन किया। यह यात्रा 3,400 किलोमीटर लंबी थी, जिसमें कच्छ का रण और थार मरुस्थल जैसे दुर्गम क्षेत्रों का दौरा शामिल था। जानिए इस अभियान के महत्व और उद्देश्यों के बारे में।

मुख्य बातें

भारत रणभूमि दर्शन अभियान का उद्देश्य सैनिकों के बलिदान को उजागर करना था।
यात्रा की लंबाई 3,400 किलोमीटर थी।
कच्छ का रण और थार मरुस्थल जैसे दुर्गम क्षेत्रों का दौरा किया गया।
यात्रा में 35 सदस्य शामिल थे।
समापन कार्यक्रम नेशनल वॉर मेमोरियल पर आयोजित किया गया।

नई दिल्ली, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बुधवार को ‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का औपचारिक समापन किया। यह यात्रा लगभग 3,400 किलोमीटर की थी, जिसमें गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण युद्ध क्षेत्रों और अग्रिम सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया गया।

इस यात्रा के दौरान टीम ने कच्छ का रण और थार मरुस्थल जैसे दुर्गम क्षेत्रों को पार किया। यह अभियान भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। अभियान के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में विकसित सड़कों और संपर्क व्यवस्था को भी दर्शाया गया।

महत्वपूर्ण है कि इनमें कई ऐसे मार्ग शामिल हैं जो सेना की तैयारियों और सीमावर्ती नागरिकों की सुविधा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यात्रा के समापन के अवसर पर कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह आयोजन नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर किया गया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य देश के ऐतिहासिक युद्ध स्थलों और सीमावर्ती क्षेत्रों को आम लोगों से जोड़ना था। साथ ही नई पीढ़ी को सैनिकों के बलिदान के प्रति जागरूक करना भी इसका एक महत्वपूर्ण लक्ष्य था।

थल सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसे प्रयास देश के गौरवशाली इतिहास को जीवित रखते हैं और युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं। यह अभियान 3 फरवरी को गुजरात के तटीय शहर द्वारका से आरंभ हुआ था। इस यात्रा में कुल 35 सदस्य शामिल थे, जिनमें आर्टिलरी रेजिमेंट के जवान, भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल के कर्मी भी शामिल थे।

इस यात्रा के मार्ग में सैन्य दल ने पश्चिमी मोर्चे के प्रमुख युद्ध स्मारकों पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वीर नारियों, पूर्व सैनिकों, राष्ट्रीय छात्र सेना के कैडेटों, विद्यार्थियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों से संवाद किया। हर पड़ाव पर स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों ने अभियान दल का स्वागत किया।

इससे यह संदेश गया कि देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों और नागरिकों के बीच गहरा विश्वास और सम्मान का संबंध है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत रणभूमि दर्शन अभियान का सफल समापन दर्शाता है कि भारतीय सशस्त्र बल अपने वीर अतीत को सम्मान देते हुए वर्तमान से जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही वे भविष्य की पीढ़ी को एक सुरक्षित, एकजुट और सशक्त भारत का संदेश भी दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी बताता है कि कैसे हम अपनी नई पीढ़ी को अपने वीर अतीत से जोड़ सकते हैं। यह यात्रा उन क्षेत्रों की कठिनाइयों और महत्व को भी उजागर करती है, जहाँ हमारे सैनिकों ने अपनी वीरता दिखाई। एक राष्ट्र के रूप में हमें अपने सैनिकों का सम्मान करना चाहिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत रणभूमि दर्शन अभियान का उद्देश्य क्या था?
इस अभियान का उद्देश्य देश के ऐतिहासिक युद्ध स्थलों और सीमावर्ती क्षेत्रों को आम लोगों से जोड़ना और नई पीढ़ी को सैनिकों के बलिदान के प्रति जागरूक करना था।
इस यात्रा की लंबाई कितनी थी?
यह यात्रा लगभग 3,400 किलोमीटर लंबी थी।
इस यात्रा में कितने सदस्य शामिल थे?
इस अभियान में कुल 35 सदस्य शामिल थे।
यात्रा का समापन कब हुआ?
यात्रा का औपचारिक समापन 25 फरवरी को हुआ।
कौन से दुर्गम क्षेत्रों को यात्रा में शामिल किया गया?
यात्रा में कच्छ का रण और थार मरुस्थल जैसे दुर्गम क्षेत्रों को शामिल किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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