भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी ने मानव तस्करी नेटवर्क तोड़ा, मिजोरम की दो नाबालिग लड़कियाँ सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने 11 अक्टूबर 2026 को भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी की एक सुनियोजित कोशिश को विफल करते हुए मिजोरम की दो नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बचा लिया। इस अभियान में अहमदाबाद निवासी महेश भूरालाल तन्ना (61) और मुजफ्फरपुर निवासी नवीन कुमार (34) को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से तन्ना को कथित तौर पर इस नेटवर्क का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है।
कैसे हुआ खुलासा
41वीं बटालियन की बॉर्डर इंटेलिजेंस टीम 11 अक्टूबर की शाम करीब 5 बजे पश्चिम बंगाल के पनिटंकी स्थित न्यू ब्रिज पर तैनात थी, जब उसने भारत से नेपाल की ओर जा रही एक संदिग्ध कार को रोका। वाहन में तन्ना, नवीन कुमार और मिजोरम की एक 17 वर्षीय किशोरी सवार थी।
प्रारंभिक पूछताछ में किशोरी ने बताया कि वह अपने पिता के परिचित तन्ना के साथ खरीदारी और कैसीनो भ्रमण के लिए नेपाल जा रही थी। उसने यह भी बताया कि वह कुछ समय से सिलिगुड़ी के सालुगाड़ा इलाके में तन्ना के किराए के फ्लैट में रह रही थी और उसे मुंबई तथा गोवा स्थित स्पा सेंटरों में नौकरी दिलाने का झाँसा दिया गया था।
मोबाइल फोन से मिले अहम सबूत
मामला संदिग्ध लगने पर एसएसबी के रानीडांगा सेक्टर मुख्यालय की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और सहयोगी संस्था कोसी लोक मंच को सूचित किया गया। संयुक्त पूछताछ के दौरान तन्ना के मोबाइल फोन की जाँच की गई, जिसके 'रिसेंटली डिलीटेड' फोल्डर में किशोरी और एक अन्य अज्ञात लड़की की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो मिले।
अधिकारियों के अनुसार, इन सबूतों से रोजगार के नाम पर यौन शोषण की गंभीर आशंका सामने आई। सबूत दिखाए जाने पर तन्ना ने स्वीकार किया कि एक अन्य नाबालिग लड़की भी सालुगाड़ा स्थित उसके फ्लैट में रखी गई है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि मिजोरम स्थित एक एजेंट ने करीब 10 दिन पहले पहली लड़की को तन्ना के पास भेजा था।
दूसरी नाबालिग की भी हुई बरामदगी
सूचना मिलते ही एसएसबी ने स्थानीय पुलिस और एनजीओ टीम को सक्रिय किया। चूँकि सालुगाड़ा क्षेत्र एसएसबी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, पुलिस की सहायता ली गई। पुलिस और कोसी लोक मंच की संयुक्त टीम ने सालुगाड़ा के फ्लैट पर छापा मारकर दूसरी नाबालिग लड़की को भी सकुशल बाहर निकाला।
दोनों लड़कियों को खारीबाड़ी ग्रामीण अस्पताल में चिकित्सकीय जाँच के लिए ले जाया गया। इसके बाद दोनों नाबालिगों, महेश तन्ना, नवीन कुमार और जब्त वाहन को खारीबाड़ी पुलिस थाने के हवाले किया गया। मामले में एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
पुनर्वास और आगे की प्रक्रिया
एनजीओ की मदद से दोनों नाबालिगों की काउंसलिंग, सुरक्षित देखभाल और परिवारों तक वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ एसएसबी अधिकारियों ने जवानों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।
गौरतलब है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है — हाल ही में त्रिपुरा की छह लड़कियों (जिनमें तीन नाबालिग थीं) को भी नेपाल के डांस बार में काम करवाने की कोशिश के दौरान बचाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी एक गंभीर और सतत समस्या बनी हुई है, तथा इससे निपटने के लिए खुफिया तंत्र को और सुदृढ़ किया जा रहा है। एसएसबी विभिन्न एनजीओ और एजेंसियों के साथ समन्वय कर इस नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की कोशिश में लगी है।