क्या स्ट्रोक से जान बचाने में 'फास्ट' फॉर्मूला बेहद कारगर है?
सारांश
Key Takeaways
- स्ट्रोक एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है।
- फास्ट फॉर्मूला जान बचाने में मददगार है।
- प्रारंभिक लक्षणों को पहचानना आवश्यक है।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहिए।
- तनाव प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 'इंडियन आइडल' सीजन 3 के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग का केवल 43 वर्ष की आयु में स्ट्रोक के कारण निधन हो गया है। यह अत्यंत दुःखद घटना एक बार फिर से स्ट्रोक के खतरों की गंभीरता को उजागर करती है। ऐसे में, स्ट्रोक के प्रति जागरूकता ही संभावित बचाव का उपाय है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस संकट के समय में लोगों को जागरूक करने के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह 'फास्ट' के रूप में प्रस्तुत की है। यदि स्ट्रोक के प्रारंभिक लक्षणों को समय पर पहचाना जाए, तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती है।
स्ट्रोक को ब्रेन अटैक भी कहा जाता है। यह तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक रुक जाती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं: इस्केमिक स्ट्रोक (जो खून के थक्के के कारण होता है) और हेमोरेजिक स्ट्रोक (जो रक्त वाहिका के फटने से होता है)। कभी-कभी मिनी स्ट्रोक भी होता है, जो कुछ ही मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन यह एक बड़ा स्ट्रोक आने का संकेत हो सकता है।
आयुष मंत्रालय ने स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों को याद रखने के लिए सरल फॉर्मूला 'फास्ट' पेश किया है। यह जान बचाने में अत्यधिक प्रभावी है। इसे इस प्रकार समझें:
एफ - फेस: क्या मुस्कान फीकी पड़ गई है? क्या चेहरा एक तरफ झुक रहा है?
ए - आर्म्स: क्या आप दोनों हाथों को ऊपर उठाने के लिए कह सकते हैं? क्या एक हाथ नीचे गिर रहा है या कमजोर है?
एस - स्पीच: क्या बोलने में अस्पष्टता, टेढ़ापन या अजीबता है?
टी - टाइम: जैसे ही ये लक्षण नजर आएं, बिना किसी देरी के तुरंत अस्पताल पहुँचें।
आयुर्वेद में, स्ट्रोक को मुख्यतः वात दोष के असंतुलन से संबंधित एक न्यूरोलॉजिकल रोग माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे रोकने के लिए वात को संतुलित रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहिए, जिसमें नियमित दिनचर्या, सुबह जल्दी उठना, और रात को समय पर सोना शामिल है।
संतुलित आहार का सेवन करें, जिसमें गर्म, ताजा, और पौष्टिक भोजन जैसे कि दालें, सब्जियाँ, सूप, और घी-तेल युक्त खाद्य पदार्थ हों। ठंडा, सूखा, तला-भुना, या बासी भोजन से बचें। नियमित समय पर भोजन करें और कभी भी भूखा न रहें। हल्का व्यायाम या योग करें, तथा तिल के तेल से शरीर की मालिश (अभ्यंग) करें, जिससे रक्त संचार में सुधार होता है और वात शांत रहता है।
साथ ही, तनाव को कम करने के लिए ध्यान, प्राणायाम या गहरी सांस लेने की आदत डालें और धूम्रपान, शराब से पूरी तरह दूर रहें। उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी बीमारियों पर नियंत्रण रखें।